स्वतंत्र प्रभात-गड्डामुक्त अभियान के तहत गड्डों की समस्या तो दूर हालात बाद से बदतर

 

गड्डामुक्त अभियान के तहत गड्डों की समस्या तो दूर, ग्रामीणों व नगर में मूलभूत समस्याओं की अती

 

संवाददाता हर्षित मिश्रा

आज का हमारा अहम मुद्दा है ग्रामीणों की मूल समस्याओं व अभी तक कितनी समस्याओं से मिली निजात का।

जी हां बता दे कि, भाजपा सरकार में विकास व दावों को लेकर वादे तो कई अहम किये गये। पर उन वादों पर कितना खरा उतर पायी है।

योगी सरकार ने गड्डामूक्त अभियान तो चलाया पर क्या इस अभियान के तहत सभी सड़क, रोड, हाई—वे क्या गड्डामुक्त हो पाये है क्या इसका जवाब गंगा विहार, पिंक सिटी, डिप्टीखेड़ा, फैज्जुलागंज गांव, गौरभीठ गांव समेंत करीब आधा दर्जन कॉलोनियां में निरिक्षण करने पर मिल जायेगा। 

जी​ हां आपको बता दे कि अभी भी कई एसी नगर, गांव व कालोली है जहां मूलभूत समस्याएं जैसे सड़क, सीवर, पानी और बिजली जैसी समस्याओं से लोगो को जूझना पड़ रहा है। आलम ये है कि अब तक सुविधाएं मिल पाने कारण लोगों को तरह—तरह की समस्याओ से जूझना पड़ रहा है,

तो वहीं ग्रमीण इलाकों का हाल यह है कि, इलाके की बदहाल सड़क, बांस—बल्लियों के सहारे ​खींचे गए बिजली के तार, जगह—जगह लगा गंदगी का अम्बार, नाली जाम, विधुत अपूर्ति ठप जैसी अन्य समस्याओं से लोगों को जूझना पड़ रहा है।

बता दें कि फज्जुलागंज के अन्तर्गत कई वार्ड आतें है, और हाल ये है कि विकास के मामले में लचर साबित हो रहा है, फैज्जलागंज गांव की हालत ये कि गड्डामुक्त ता बहुत दूर सड़क जलभराव के कारण तालाब बनी रहती है, नली जाम है वहीं गौर भी गांव की हालत यह है।

स्थानीय निवासीयों को सीवर का गंदा मल, गंदे तालाब के चलते डेंगु, टाइफाईड, मलेरीया जैसी अन्य बीमारीयों का भय सताता रहता है। एसी स्थिती के चलते गड्डामुक्त आभियान की पोल तो खुल ही रही है, उधर नगर निगर व स्थानीय प्रतीनीधियों पर भी तरह—तरह के सवाल खड़े हो रहें है।

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