साहित्य उपवन

वो दुल्हन (कविता)

रूप मनोहर, एकल काठी और निखरता नव-यौवन, देखा जिसको सपनो में, सहमी-सिमटी वो दुल्हन ।।   केश सुगन्धित, लता बेल से, लहराते, हर लेते मन, नयन निराले प्रेम से पुलकित, फिर भी ......

क्या फिर से वो दिन आयेंगे??

प्यार से बालों को सुलझाना, पास में आकर गले लगाना, पीठ पे हौले से सहलाना, कंधे पर रखकर सर अपना, सीने पर कुछ लिख जाना, क्या फिर हम यूँ मिल पाएं......