स्वतंत्र प्रभात-विश्व निमोनिया दिवस पर विशेष :

 


इस दिवस को मनाने का उद्देश्य निमोनिया की गंभीरता के बारे में वैश्विक जागरूकता या रोकथाम एवं उपचार को बढ़ाना तथा इससे बचने के लिए कार्यवाही करना है।

 निमोनिया मुख्य रूप से बैक्टीरिया या वायरस द्वारा और कम आम तौर पर फफूंद और परजीवियों द्वारा होता है। हालांकि संक्रामक एजेंटों के 100 से अधिक उपभेदों की पहचान की गयी है लेकिन अधिकांश मामलों के लिये इनमें केवल कुछ ही जिम्मेदार हैं। वायरस व बैक्टीरिया के मिश्रित कारण वाले संक्रमण बच्चों के संक्रमणों के मामलों में 45% तक और वयस्कों में 15% तक जिम्मेदार होते हैं। सावधानी के साथ किये गये परीक्षणों के बावजूद लगभग आधे मामलों में कारक एजेंट पृथक नहीं किये जा सकते हैं।

निमोनिया होने की संभावना को बढ़ाने वाली परिस्थितियों और जोखिम कारकों में धूम्रपान, प्रतिरक्षा की कमी तथा मद्यपान की लत, गंभीर प्रतिरोधी फेफड़ा रोग, गंभीर गुर्दा रोग और यकृत रोग शामिल हैं अम्लता-दबाने वाली दवाओं जैसे प्रोटॉन-पंप इन्हिबटर्स या H2 ब्लॉकर्स का उपयोग निमोनिया के बढ़े जोखिम से संबंधित है। उम्र का अधिक होना निमोनिया के होने को बढ़ावा देता है।

"आधुनिक चिकित्सा का पिता" के नाम से जाने जाने वाले सर विलियम ओस्लर ने निमोनिया द्वारा होने वाली मृत्यु और अक्षमता को मान्यता प्रदान की और इसको 1918 में "मनुष्यों की मृत्यु का कप्तान" कहा, क्योंकि इस समय तक इससे होने वाली मौतो की संख्या ने तपेदिक से होने वाली मौतों की संख्या को पीछे छोड़ दिया था।

 वार्षिक रूप से, निमोनिया लगभग 450 मिलियन लोगों को प्रभावित करता है जो कि विश्व की जनसंख्या का सात प्रतिशत है और इसके कारण लगभग 4 मिलियन मृत्यु होती हैं। निमोनिया (फुफ्फुस प्रदाह) फेफड़ों का संक्रमण है, जो कि बहुत से विषाणुओं व जीवाणुओं में से किसी एक की वजह से होता है। इसमें फेफड़ों में सूजन आ जाती है और तरल पदार्थ भर जाता है, जिससे खांसी होती है और सांस लेना मुश्किल हो जाता है। यह बीमारी आमतौर पर सर्दियों और बसंत के मौसम में होती है, और अक्सर सर्दी-जुकाम होने के बाद शुरु होती है।

निमोनिया दो तरह का होता है, विषाणुजनित (वायरल) और जीवाणुजनित (बैक्टिरियल)।

 

विषाणुजनित निमोनिया

 यह साधारणत: सर्दी-जुकाम की तरह शुरु होता है और धीरे-धीरे स्थिति बिगड़ने लगती है। इसमें निम्नांकित लक्षण हो सकते हैं:

•101.5 डिग्री फेहरनहाइट या इससे ज्यादा बुखार

•खांसी, जो बढ़ती जा रही हो

•तेज सांस लेना

•उल्टी

•दस्त (डायरिया)

•सांस में घरघराहट की आवाज आना

 विषाणुजनित निमोनिया आमतौर पर जीवाणुजनित निमोनिया से कम गंभीर होता है। मगर, यदि शिशु को यह हो जाए, तो उसे भविष्य में विषाणुजनित निमोनिया होने का खतरा ज्यादा रहता है।

 

जीवाणुजनित निमोनिया

 इसमें अचानक लक्षण सामने आते हैं। इन लक्षणों में शामिल हैं:

•103 डिग्री फेहरनहाइट तक बुखार

•तेज सांसे चलना

•खांसी

•नाखूनों और होठों का रंग नीला-सलेटी सा होना

•भूख न लगना

•दस्त (डायरिया)

•शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन)

निमोनिया का प्रमुख कारण स्ट्रेप्टोकॉकस निमोनिया (Steptococcus pneumonia) नाम का एक बैक्टीरिया होता है। जो हमारे फेफड़ों को इन्फेक्टेड करके हमारी श्वसन प्रणाली को प्रभावित करता है, लेकिन कभी -कभी किसी फ्लू वायरस की वजह से भी हमें निमोनिया हो जाता है। निमोनिया के रोगाणु अवसरवादी होते हैं इसीलिए अगर आपका इम्यून सिस्टम कमजोर है तो आप जल्दी ही इसकी चपेट में आ सकते हैं। यह एक जानलेवा बीमारी है,इसलिए जितनी जल्दी इसका पता चले तभी इसका इलाज करा लेना चाहिए। निमोनिया के लक्षण, सर्दी जुखाम के लक्षणों से इतने मिलते हैं कि कई बार ग़लतफ़हमी हो जाती है। इसलिए यहाँ कुछ ऐसे ही लक्षण बताये जा रहे हैं, जिनको जानना बहुत ज़रूरी है।

 

1 – खांसी

 

लगातार खांसी आना इसका मुख्य लक्षण है। बैक्टीरियल निमोनिया में हरे या पीले रंग का थूक निकलता है। फेफड़े के उतकों में इसके रोगाणुओ के संक्रमण के कारण कभी कभी थूक में खून के धब्बे भी दिखते हैं। लेजिनोला निमोनिया(Legionella pneumonia) में खूनी बलगम भी आते हैं।

 

2 – बुखार

 

निमोनिया में बच्चों को तेज ठंड के साथ बहुत तेज बुखार आता है लगभग 100 डिग्री फारेनहाइट से ज्यादा। बड़े लोगों में बुखार की तीव्रता कम होती है।

 

3 – तेज सांस चलना

 

निमोनिया एक इन्फ्लैमटोरी बीमारी है। इसके रोगाणु सबसे पहले फेफड़ों के वायु छिद्रों पर एटैक करते हैं फिर जब इनकी संख्या काफी बढ़ जाती है तो यह नाक और गले से गुजरने वाली हवा को प्रभावित करने लगते हैं जिससे सांस लेने में बहुत ज्यादा तकलीफ होने लगती है। कोई भी मेहनत वाला काम करने पर साँसों का उखड़ जाना इसके प्रमुख लक्षण हैं।

 

4 – सीने में दर्द

 

संक्रमण ज्यादा बढ़ जाने पर लगातार खांसी आने लगती है और ज्यादा खांसने के कारण आपको सीने में दर्द का अनुभव होने लगता है। इस दर्द के ज्यादा बढ़ जाने पर इंसान को सांस लेने में और खांसने में भी तकलीफ होने लगती है।

 

5 – मतिभ्रम

 

सांसो में तकलीफ के कारण हमारे मस्तिष्क को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन और ज़रूरी पोषक तत्व नही मिल पाते हैं। परिणामस्वरूप कई उम्रदराज लोगों में मतिभ्रम की स्थिति आ जाती है।

 

इन प्रमुख लक्षणों के अलावा कुछ और भी लक्षण है जो इस प्रकार हैं

 

6 – पसीना आना

 

बैक्टीरियल निमोनिया के संक्रमण में कई लोगों को ठंड के साथ आने वाले तेज बुखार में पसीना आते भी देखा गया है।

 

7 – होंठ और नाखूनों का रंग बदलना

 

बैक्टीरियल निमोनिया में होने वाले साँसों की कमी के कारण शरीर कि कोशिकाओं में ऑक्सीजन कि मात्रा काफी कम हो जाती है जिसके कारण कई बार नाखूनों और होंठो के कलर में परिवर्तन होने लगता है,नाखूनों का रंग सफ़ेद हो जाता है और होंठ पीले पड़ जाते हैं।

 

8 – एनर्जी लेवल कम होना और थकान

 

ऑक्सीजन लेवल कम होने के कारण लगातार थकान,मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और पूरे शरीर में कमजोरी होने लगती है।

 

9 – माइकोप्लाज्मा निमोनिया के लक्षण –

 

कभी-कभी निमोनिया का प्रमुख कारक फंगस या माइकोप्लाज्मा(mycoplasma) भी हो सकता है। उस कंडीशन में आपको ऊपर बताये हुए लक्षणों के अलावा आँख,कान और गले में दर्द तथा स्किन रैशेज़ भी हो सकते हैं।

अगर आपको खांसी के साथ-साथ ऊपर बताये हुए कोई भी लक्षण हैं तो आपको निमोनिया होने की संभावना बहुत ज्यादा है।

जब हम उचित पौष्टिक आहार का सेवन करते हैं और स्वच्छ वातावरण में रहते हैं तो हम इस रोग को रोक सकते हैं। इसके अलावा हमें कुछ घरेलू उपाय करने चाहिए जैसे कि :-

 

1. बादाम व मुनक्का

 

अगर आप चाहते हैं कि आप के बच्चें को निमोनिया की शिकायत न हो तो निमोनिया से बचने के लिए बच्चें को बादाम और मुनक्का मिलाकर देने चाहिए। इससे बच्चें की इम्युनिटी पावर बढ़ती है साथ में बच्चा तंदुरुस्त रहता है। इसके इस्तेमाल से बच्चें के शरीर में गर्मी पैदा होती है। जिसके कारण वह बीमारी से बच सकता है।

 

2. शहद

 

शहद एक महत्वपूर्ण औषधि है। शहद में हर फुल का रस पाया जाता है जिससे बीमार होने की संभावना कम होती है। कलोंजी के तेल में शहद मिलकर बच्चे को देने से निमोनिया दूर किया जा सकता है।

 

3. पुरे कपड़े पहनाएं

 

निमोनिया का मुख्य कारण होता है सर्दी लगना बच्चों पर सर्दी दो तरह से वार करती है पहला पैर के रास्ते से और दूसरा सिर से। इसलिए बच्चों के पैर और सिर को ढक कर रखने चाहिए।

 

4. जैतून का तेल

 

जैतून का तेल गर्म होता है इसलिए रात को सोते समय बच्चों के सिर पर इसकी मालिश करनी चाहिए। ऐसा करने से बच्चे का शरीर गर्म रहता है। पैर पर मालिश करने से बच्चे निमोनिया से बचें रहते हैं।

 

5. लहसुन

 

लहसुन की चार कलियों को लेकर सरसों के तेल में गर्म करे। फिर उससे बच्चों के तलवों की मालिश करे। ऐसा करने से बच्चे के शरीर में गर्मी पैदा होती है।

 

निमोनिया के अन्य बचाव

•हल्दी, अदरक,काली मिर्च और मेथी का प्रतिदिन सेवन करने से फेफड़े स्वस्थ रहते हैं।

•सर्दी के दिनों में बच्चों को धूप में रखें।

•पांच पत्ते तुलसी, तीन ग्राम मिश्री और पांच काली मिर्च पिस कर चूर्ण तैयार कर लें। फिर इसकी छोटी छोटी गोलियां बनाकर सुबह और शाम पानी के साथ लें।

•दूध में केसर मिलाकर बच्चों को देने से निमोनियां से बचा जा सकता है।

 


12 नवम्बर : इतिहास तथा महत्वपूर्ण दिवस

रेल बिहार कल्याण समिति, गोरखपुर द्वारा निशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन    

 

 

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