स्वतंत्र प्रभात-तिहरा शतक जड़ने वाले क्रिकेटर हनुमा विहारी के बारे में भी जान लीजिए

 

 

नई दिल्ली : हनुमा विहारी ने रणजी ट्रॉफी में तिहरा शतक और उसके बाद एक और शतक बना कर अपने हुनर की झलक दिखाई है. रणजी ट्रॉफी में शतक कोई बहुत खास बात नहीं है, तिहरा शतक खास है लेकिन क्या इससे किसी खिलाड़ी का भारतीय क्रिकेट टीम में दावा मजबूत हो जाता हैं खास तौर पर इसी आधार पर उसका चयन कर लिया जाना चाहिए?

अगर आप विशेषज्ञों से पूछें ये सिर्फ आंकड़े ही होंगे वो भी अपने आप में काफी नहीं. लेकिन विहारी की पारियों की चर्चा संख्याओं के बजाय उनके अंदाज की हो रही है. दोनों पारियों में जिस तरह से उन्होंने परिपक्वता दिखाई है उसने सभी का ध्यान खींचा हैं. जो कि न केवल उनकी पारियों में बल्कि बातों में भी दिखाई देती है.
लेकिन विहारी को लगता है परिपक्वता के मामले में वे शुरु से ही अपनी उम्र से कहीं आगे हैं. जिन हालातों से उन्होंने खुद को बाहर निकाला है वे भी यही बयां करते नजर आते हैं. 11 साल की उम्र में पिता को खो दिया. 16 साल की उम्र में सीनीयर क्रिकेट में शुरुआत की.19 साल की उम्र में श्रीलंका के दिग्गज बल्लेबाज कुमार संगकारा ने उन्हें अपने देखे युवा खिलाड़ियों में सर्वश्रेष्ठ कहा.

संगकारा ने कहा था कि जितनी कम उम्र में विहारी जहां पहुंचे हैं वे अपनी उम्र में उसके आसपास भी नहीं पहुंच पाते. लेकिन उसके एक साल बाद ही विहारी ऐसे खिलाड़ी हो गए जो आईपीएल में नहीं बिके. उन पर एक तरह से बोरिंग खिलाड़ी का तमगा लग गया जो शायद रणजी प्रारूप के कारण था.

शानदार रिकॉर्ड रहा है विहारी का
आज 24 साल की उम्र में उन्होंने 58 प्रथम श्रेणी के मैच खेले हैं, जिनमें 59.46 की औसत से 4600 से ज्यादा रन बनाए हैं. इसमें खास बात यह है कि वे अब तक रणजी ट्रॉफी में दो टीमों की कप्तानी कर चुके हैं. इस सत्र की बात करें तो विहारी ने प्रथम श्रेणी में अब तक 98.50 की औसत से 788 रन बना लिए हैं जिसमें एक तिहरा शतक भी शामिल है. रन बनाने के मामले में वे मयंक अग्रवाल से ही पीछे हैं. हालांकि सत्र अभी काफी कुछ बाकी है.

घरेलू क्रिकेट में गेंदबाजों पर हावी होने की क्षमता
विहारी का मानना है कि वे कुछ अलग महसूस कर रहे हैं. इसलिए नहीं कि शुरु में आउट होने के बावजूद भी उन्होंने रन बनाए, बल्कि इसलिए कि उन्हें अब किसी भी (रणजी) गेंदबाजी से फर्क नहीं पड़ता वे उस पर हावी हो सकते हैं. जब आप जानते हैं कि आप ऊंचे स्तर पर खेल रहे हैं तो यह अंदर से ही महसूस हो सकता है. मुझे इस साल लगा कि मैं घरेलू क्रिकेट में हावी हो सकता हूं.

दक्षिण अफ्रीका दौरे का अनुभव रहा खास
रणजी में अपने मैच जिताने वाले शतक और तिहरे शतक से पहले विहारी दिलीप ट्रॉफी में गुलाबी गेंद से शतक लगा चुके हैं. उन्होंने रणजी के हर नाजुक मैच में अर्धशतक लगाया है. लेकिन उनका आत्मविश्वास को नई ऊंचाई अगस्त में भारत ए के दक्षिण अफ्रीका दौरे से मिला. हालांकि वहां उन्होंने एक ही मैच खेला जिसमें उन्होंने 7 और नाबाद 4 रन बनाए. 

पहचान बनाने के लिए 100, 200 नहीं 300 बनाने होंगे
मैंने बड़े स्तर पर गेंदबाजों से उनकी रणनीति के बारे में बहुत सीखा है. फर्स्ट क्लास क्रिकेट में एक बार आप यह सीख जाते हैं तो आप गेंदबाज से एक कदम आगे निकल जाते हैं. वहां रन बनाना आसान नहीं होता है. रणजी स्तर पर आमतौर पर मुझे लगता है कि एक बार 100 बना लेते हैं तो टीम उस बल्लेबाज पर ज्यादा ध्यान देती है. वह समय होता है जब आुप मौके को भुना सकते हैं. इसी तरह विहारी के पिछले कुछ सालों में कुल 13 शतकों में से सबसे ज्यादा शतक आए हैं. हाल ही में ओडीशा के खिलाफ तिहरे शतक वाली पारी थी, वह 200 से ज्यादा रन की पांचवी पारी थी. जबकि पिछली सर्वाधिक 2015 में हिमाचल के खिलाफ 263 रन की पारी थी.  यदि आप पहचान पाना चाहते हैं तो 300 रन बनाने होंगे 100 , 200 तो आज आम बात हो गई है. 

औसत में आया है जबर्दस्त उछाल
पिछले कुछ समय में जो खास बदलाव आया है वह है विहारी के रन बनाने की गति. यह उन्होंने इरादतन किया है. खास तौर पर आईपीएल में न बिक पाने के बाद उनकी छवि धीमे बल्लेबाज की हो गई थी. उन्हें इंग्लैंड के क्रिकेट क्लब हॉटन सीसी की ओर से खेलने का फैसला लिया और वे इसे अपने करियर का टर्निंग पाइंट मानते हैं. उस अनुभव ने उन्हें खुल कर खेलने की आदत को अपने स्वाभाविक खेल में शामिल करने का मौका दिया.

विहारी का स्पष्ट मानना है कि वे इंग्लैंड से बेहतर बल्लेबाज के तौर पर वापस आए. क्लब क्रिकेट में रन बनाने और विकेट लेने का दबाव होता है. आप पर जिम्मेदारी होती है. वे आपको पैसा देते हैं और आपसे प्रदर्शन की उम्मीद रखते हैं. विहारी का औसत भी एक समय के 33.7 से बढ़कर 60 हो गया है.

 मां ने किया हर कदम पर प्रोत्साहित
अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां को देने वाले विहारी का मानना है कि क्रिकेट ने उन्हें सबकुछ दिया है. यहां तक कि पिता के दुख से उबरने में भी मदद की है. 2013 आईपीएल में क्रिसगेल को पहले ओवर में आउट करना विहारी के लिए यादगार लम्हा था. वह फोटो उन्होंने अब तक संभाल कर रखी है. विहारी को विश्वास है कि अगर वे इसी तरह से प्रदर्शन करते रहे, तो उनका समय भी आ जाएगा. वे भारतीय टीम में शामिल होने के लिए बहुत बेकरार नहीं है. 

VIVEK SHUKLA
recommend to friends

Comments (0)

Leave comment