स्वतंत्र प्रभात-विजय माल्या के वकीलों ने कहा, भारतीय जेल मेरे मुवक्किल के रहने लायक नहीं

 

ब्रिटेन में प्रत्यर्पण मामले की सुनवाई का सामना कर रहे विवादित शराब कारोबारी विजय माल्या के वकीलों ने गुरुवार को कहा कि भारतीय जेलों में क्षमता से अधिक कैदी होते हैं तथा उनमें साफ सफाई भी ठीक नहीं होती है. 

 

खास बातें :

  1. माल्या पर भारत में धोखाधड़ी तथा मनी लांड्रिंग का केस है

  2. माल्या के ऊपर भारतीय बैंकों का 9,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का कर्ज है

  3. विजय माल्या मार्च 2016 में भारत से भागकर ब्रिटेन चले गए थे

लंदन: ब्रिटेन में प्रत्यर्पण मामले की सुनवाई का सामना कर रहे विवादित शराब कारोबारी विजय माल्या के वकीलों ने गुरुवार को कहा कि भारतीय जेलों में क्षमता से अधिक कैदी होते हैं तथा उनमें साफ सफाई भी ठीक नहीं होती है. माल्या की वकील क्लेयर मोंटगोमेरी ने वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की अदालत में गवाह के तौर पर जेल सेवाओं के विशेषज्ञ डॉ एलन मिशेल को पेश किया. उन्होंने धोखाधड़ी तथा काला धन मामले में प्रत्यर्पण की स्थिति में माल्या के साथ किये जाने वाले व्यवहार संबंधी भारत सरकार के दावों को गलत साबित करने की कोशिश की.

मोंटगोमी ने कहा कि माल्या को मुंबई के आर्थर रोड जेल के 12वें बैरक में रखा जाएगा और उसकी स्थिति संतोषजनक नहीं है. डॉ मिशेल ने कहा कि भारत सरकार द्वारा किये गये वादे आम हैं और यह बताते हैं कि जेल की स्थिति माल्या को रखे जाने के लायक हैं, पर किसके हिसाब से लायक? उल्लेखनीय है कि 9000 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी के संदर्भ में ब्रिटेन की अदालत में माल्या के प्रत्यर्पण की जारी सुनवाई चार दिसंबर को शुरू हुई थी.

इससे पहले बीते 5 दिसंबर को लंदन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट अदालत में शराब कारोबारी विजय माल्या की प्रत्यर्पण सुनवाई में भारत की जेल प्रणाली की तुलना रूस के कारागारों के हालात से हुई. 61 वर्षीय माल्या के बचाव दल ने भारत सरकार की ओर से क्राउन प्रोसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) द्वारा धोखाधड़ी के मामले में तैयार किये गये मामले के जवाब में शुरुआती दलीलों के तहत इस मुद्दे को उठाया. बचाव पक्ष ने जज एम्म आर्बुथनॉट से कहा कि भारत में जेलों में सुरक्षित हालात पर भारतीय अधिकारियों द्वारा दिये गये आश्वासनों के सही से अनुपालन की कोई प्रणाली नहीं है.

माल्या के बैरिस्टर क्लेयर मोंटगोमेरी ने अदालत में कहा, ‘सरकार (भारत की) अदालत के आदेशों की अवहेलना को दूर करने के उपायों को लेकर असमर्थ और अनिच्छुक रही है.’ न्यायाधीश ने पूछा कि रूस में जेलों में खराब हालात की तुलना कैसे हो सकती है जहां प्रत्यर्पण के मामले कारावासों के असुरक्षित हालात पर निर्भर करते हैं. मोंटगोमरी ने कहा कि रूस के हालात भारत से बहुत बेहतर हैं क्योंकि वे कम से कम अदालत के आदेशों के उल्लंघन की समीक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को अनुमति देते हैं. न्यायाधीश ने कहा, ‘यह रोचक बात है.

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