स्वतंत्र प्रभात-नए वर्ष में नई पहल हो। कठिन ज़िंदगी और सरल हो।।

 

 नए वर्ष में नई पहल हो।
कठिन ज़िंदगी और सरल हो।।


अनसुलझी जो रही पहेली।
अब शायद उसका भी हल हो।।


जो चलता है वक्त देखकर।
आगे जाकर वही सफल हो।।


नए वर्ष का उगता सूरज।
सबके लिए सुनहरा पल हो।।


नए वर्ष की नए हर्ष संग,नए उत्कर्ष की मंगल कामना,

 शुभकामनाएँ,बधाई व् दिव्य प्रणाम।।

DEV VRAT SINGH
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