स्वतंत्र प्रभात-गंभीर समस्या है कुपोषण

 

कुपोषण की समस्या से दुनिया के अधिकांश देश जूझ रहे हैं। यूनिसेफ की मानें तो दुनिया में कुपोषण के शिकार कुल बच्चों की तादाद तकरीबन 14.6 करोड़ से भी अधिक है।

इनमें से 5.7 करोड़ से ज्यादा तो अकेले भारत में ही हैं। यह तादाद दुनिया के कुल कुपोषित बच्चों की एक तिहाई से अधिक है। देश में तकरीबन 19 करोड़ लोग कुपोषित हैं। यह आंकड़ा कुल आबादी का 14 फीसदी के करीब है।

कुपोषण के मामले में सबसे ज्यादा खराब स्थिति महिलाओं की है। भारत में 18 साल तक के बच्चों की तादाद 43 करोड़ है। इसमें यदि महिलाओं की तादाद मिला दी जाये तो यह आंकड़ा कुल आबादी का 70 फीसदी के आस-पास पहुँच जाता है। दुनिया में हर पाँचवाँ बच्चा भारतीय है। जहाँ तक भुखमरी का सवाल है, दुनिया में यह तेजी से बढ़ रही है। यदि दुनिया में भूखे लोगों की आबादी में भारत की हिस्सेदारी देखें तो यह कुल 23 फीसदी के करीब बैठती है।

इस बारे में दुनिया के विशेषज्ञों की चिंता जायज है। उनके अनुसार आने वाले बरसों में मौसम में आ रहे परिवर्तन का सबसे ज्यादा कहर गरीबों पर बरपेगा। इससे दुनिया में बाढ़, तूफान, सूखा, प्राकृतिक जलस्रोतों के सूखने के संकट के साथ महामारी फैलेगी, प्राकृतिक आपदाएँ आयेंगी। जहाँ आपदा प्रबन्धन, शुद्ध पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं की समुचित और मजबूत व्यवस्था नहीं होगी, वहाँ इन आपदाओं और महामारियों के चलते बहुत बड़ी तादाद में लोग अनचाहे मौत के शिकार होंगे। उनमें 85 फीसदी तादाद मासूम बच्चों की होगी। हमारी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली जगजाहिर है।

फिर हमारे यहाँ कुपोषण की समस्या वैसे भी भयावह है, उसे देखते हुए यहाँ की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। सुशील कुमार वर्मा,सिन्दुरियां महराजगंज, गोरखपुर विश्वविद्यालय

SUSHIL KUMAR VERMA
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