स्वतंत्र प्रभात-भारतीय न्यायपालिका  के इतिहास मे पहली बार सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों द्वारा प्रेस् कांफ्रेंस

 

 

 

 

 

भारत के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों जे चेलमेशवार, रंजन गोगोई, मदन लोकुर और कुरियन जोसफ ने मीडिया के सामने आकर सीजेआई की प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हमने इस मुद्दे पर सीजेआई दीपक मिश्रा से बात की, लेकिन उन्होंने हमारी बात नहीं सुनी। हमें लगा कि देश को बताना चाहिए कि सर्वोच्च न्यायालय में क्या चल रहा है। अपनी बात कह कर हम देश के प्रति अपना कर्ज़ उतार रहे हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद चारों जजों ने एक चिट्ठी जारी की, जिसमें गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

चेलमेश्वर ने कहा कि हमारे पत्र पर अब राष्ट्र को विचार करना है कि सीजेआई के खिलाफ महाभियोग चलाया जाना चाहिए या नहीं। सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन सही से नहीं चल रहा है। बीते कुछ महीनों से काफी गलत चीजें हो रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को संबोधित सात पन्नों के पत्र में जजों ने कुछ मामलों के बेंचों में वितरण को लेकर नाराजगी जताई है। जजों का आरोप है कि सीजेआई की ओर से कुछ मामलों को चुनिंदा बेंचों और जजों को ही दिया जा रहा है। सीजेआई उस परंपरा से बाहर जा रहे हैं, जिसके तहत महत्वपूर्ण मामलों में निर्णय सामूहिक तौर पर लिए जाते रहे हैं। चीफ जस्टिस केसों के बंटवारे में नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। 

प्रेस कॉन्फ्रेंस में चारों जजों ने कहा 'सीजेआई महत्वपूर्ण मामले, जो सुप्रीम कोर्ट की अखंडता को प्रभावित करते हैं, उन्हें बिना किसी तार्किक कारण के उन बेंचों को सौंप देते हैं, जो चीफ जस्टिस की पसंद की हैं। इससे संस्थान की छवि बिगड़ी है। हम ज़्यादा केसों का हवाला नहीं दे रहे हैं। एमओपी का मामला संविधान पीठ का था लेकिन सीजेआई ने यह मामला तीन जजों के सामने लगाकर खत्म कर दिया।'

AMIT PRAKASH SRIVASTAVA
recommend to friends

Comments (0)

Leave comment