अबैध खनन और उसपर माननीयों का मौन संदेह पैदा करने के लिए काफी है

वैसे तो आज देश की कोई नदी नाले व इन नदी नाले के किनारे (टीले) तक इन खनन माफियाओं के चंगुल से मुक्त नहीं हो सके हर जगह अबैध खनन मानक बिहीन कार्य इन लोगो द्वारा कराया जाता है जिसमें प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष इन माननीयों की भागीदारी है ।आज यही कारण है कि मीडिया द्वारा लगातार
 

वैसे तो आज देश की कोई नदी नाले व इन नदी नाले के किनारे (टीले) तक इन खनन माफियाओं के चंगुल से मुक्त नहीं हो सके हर जगह अबैध खनन मानक बिहीन कार्य इन लोगो द्वारा कराया जाता है जिसमें प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष इन माननीयों की भागीदारी है ।आज यही कारण है कि मीडिया द्वारा लगातार वीडियो फोटो दिखाए जाने के बावजूद भी शासन प्रशासन के कानों में जूं तक नहीं रेंगती सो वह भी समय के साथ अपने आप को ढाल इन्हीं के पद चिन्हों पर चलने लगते हैं।

बांदा जनपद की नरैनी विधानसभा के भाजपा विधायक राजकरण कबीर ने इस अवैध खनन ओवर लोडिंग के बिरूद्ध धरने पर बैठ गए थे जो इस बात का सबूत था कि जनपद में अवैध खनन ओवर लोडिंग हो रही है।पर समय के साथ उनका जोश ठंडा पड़ गया य माफियाओं ने य माननीयों ने ठंडा कर दिया यह कहना जरा मुश्किल है पर मन में प्रश्न जरूर उठ रहे हैं कि क्या जनपद में अवैध खनन ओवर लोडिंग के इस कार्य पर अंकुश लगापाने में जिला प्रशासन वास्तव में कामयाब हो गया है। अगर हां तो प्रतिदिन समाचार पत्रों व अन्य प्रचार-प्रसार के प्लेटफार्मो में जो खबरें अबैध खनन ओवर लोडिंग के बारे में छप रही है वह झूठी है

खदानों में गोलीबारी की घटनाएं झूठी है कलमकारों द्वारा जान हथेली पर रखकर घटना स्थल से अवैध खनन ओवर लोडिंग की ली गई फोटो बनाए गए वीडियो झूठे हैं जो प्रतिदिन चिल्ला चिल्ला कर इस अवैध खनन कारोबार होने की सच्चाई सबके सामने रख रहे हैं पर इतना सबकुछ होने देखने सुनने के बाद सभी माननीय मौन किसी की इस विषय में एक चिट्ठी लिखकर शासन-प्रशासन तक नहीं पहुंची जिसमें उल्लेख हो की इसकी जांच कराई जाए वह इस अवैध खनन ओवर लोडिंग कारोबार को रोका जाए।

लिखे भी तो लिखे कैसे सामने आए तो आएं कैसे सफेदी के पीछे कालापन जो है जिसे जनता देख रही है और जवाब भी दे रही है आज पूरे प्रदेश में पंचायत चुनाव शांतिपूर्ण संपन्न हो गये गांव की सरकार गांव में बन गई।बड़ी बात इस पंचायत चुनावों में हर दल पार्ट ने जिला पंचायत चुनावों में अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे थे जिसमें सत्तारूढ़ पार्टी को मुंह की खानी पड़ी यह खामियाजा पार्टी को अपने इन्हीं माननीयों की बदौलत भुगतना पड़ा यही हाल रहा है तो 2022के चुनाव में पार्टी ज़हां से उठकर आगे बढ़ी थी सिमट कर उसी जगह पहुंच जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी।मैं सभी के नाम भी लिख सकता था

किन्तु इसलिए नहीं लिख रहा हूं की जिसे पूरे जनपद की जनता, कलमकार सभी जानते हो पर वह अपने ज़बान,व लेखनी में नहीं ला रहे हैं तो मैं ही क्यूं लिखूं अपनी कलम से क्यों अपवित्र करूं अपनी लेखनी को क्योंकि अपबित्र हो जाने पर गंगा स्नान करवाने जाना पड़ेगा जबकि वह खुद पापियों के पाप धोते धोते मैली हो चुकी है।

आत्माराम त्रिपाठी की कलम से

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