स्वतंत्र प्रभात-शांति भंग करने वाले असामाजिक तत्वों पर लगाम लगायें – गयूरूल हसन रिजवी

 

शांति भंग करने वाले असामाजिक तत्वों पर लगाम लगायें – गयूरूल हसन रिजवी (चेयरमैन, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग)

अल्पसंख्यक समाज को असामाजिक तत्वों से भयभीत होने की जरूरत नहीं, आयोग के दरवाजे हमेशा खुले हैं

केंद्रीय ईसाई विश्वविद्यालय की स्थापना करने की मांग

माइन्डशेयर राष्ट्रीय ज्ञान कॉन्क्लेव लखनऊ में आयोजित

अल्पसंख्यक समाज को असामाजिक तत्वों से भयभीत होने की जरूरत नहीं, आयोग के दरवाजे हमेशा खुले हैं। भारत हम सबका है सिर्फ कुछ लोग पूरे समाज को बदनाम करते हैं।

 यह बात सय्यद गयूरूल हसनरिजवी (चेयरमैन, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग) ने आज दिनांक दिनांक 12 फरवरी 2018 को सेंट जोसफ कैथेड्रल, हजरतगंज, लखनऊ में आयोजित माइन्डशेयर राष्ट्रीय ज्ञान एवं सांस्कृतिक संरक्षण कॉन्क्लेव मेंकही। कॉन्क्लेव में अल्पसंख्यक संस्थानों एवं चर्च के प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा स्वतंत्रता के बाद इस देश में जो मुस्लमान हैं वह ’बाई चांस’ ;ठल ब्ींदबमद्ध नहीं बल्कि ’बाई चॉइस’ ;ठलब्ीवपबमद्ध हैं क्यूंकि उन्होंने आजादी के बाद तमाम मुश्किलों के बाद भी अपने वतन में ही रहने का प्रण लिया।

 उन्होंने कहा कि इस वर्ष सिर्फ कुछ महत्वपूर्ण विभागों के बजट में ही वृद्धि की गयी जिसमेअल्पसंख्यक कल्याण भी शामिल है जिससे यह सिद्ध होता हैं कि सरकार बिना किसी भेदभाव के अल्पसंख्यकों के कल्याण और उनके विकास के लिए समर्पित है। इस अवसर पर उन्होंने सभा में उपस्थित लोगों केसवालों के जवाब भी दिए।

कॉन्क्लेव को बिशप जेराल्ड जॉन मथायस ने आयोग और शिक्षा विभाग से अल्पसंख्यक संस्थानों की समस्याओं पर विचार करने का आग्रह करते हुए कहा कि समाज के लिए समर्पित होने के बावजूद मिशिनरीस्कूलों को एन.ओ.सी. और अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त करने के लिए वर्षों सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

मेथोडिस्ट चर्च के बिशप फिलिप मसीह ने सरकार से ईसाई केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग करते हुए कहा कि आयोग को अल्पसंख्यक संस्थानों की स्वायत्ता और उनके संरक्षण पर ध्यान देना चाहिए।उन्होंने कहा कि वर्तमान में चर्च और मिशनरी संस्थानों को विभिन्न न्यायिक मामलों में उलझा दिया गया है जिसके कारण हमारा सर्वाधिक समय सामाजिक कार्य के बजाये कोर्ट कचहरी में बर्बाद हो जाता है।

अपर शिक्षा निदेशक श्री विष्णु कांत पाण्डे ने भारत सरकार की राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान द्वारा स्कूलों को दी जा रही सहायता एवं सुविधाओं के बारे में बताया और संस्थानों के प्रतिनिधिओं के सवालों केजवाब दिए। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा दिव्यांगों के लिए फ्री पुस्तकों और ऑडियो वीडियो बुक्स का प्रबंध कराया जा रहा है।

इस अवसर पर एंग्लो इंडियन मनोनीत विधायक डा० डेन्जिल गोडिन ने स्कूलों की सम्बद्धता और अल्पसंख्यक दर्जे प्राप्त करने में उत्पन्न समस्याओं पर बोलते हुए कहा कि वर्षों की दौड़भाग के बाद भी स्कूलों कोसी.बी.एस.सी. द्वारा मांन्यता नहीं मिल रही। उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष डा० आशीष मैसी ने अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय और बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की तर्ज पर सरकार से केंद्रीयईसाई विश्वविद्यालय की स्थापना करने की मांग की।

इस अवसर पर माइंडशेयर द्वारा संत फ्रांसिस दिव्यांग स्कूल की प्रिंसिपल सिस्टर जोसिया, नवज्योति दिव्यांग स्कूल की प्रिंसिपल सिस्टर रीना, डॉ रमा शंखधर और अपर शिक्षा निदेशक श्री विष्णु कांत पाण्डे कोमाइंडशेयर ह्यूमन राइट्स अवार्ड से सम्मानित किया गया।

कॉन्क्लेव में फादर पॉल रॉड्रिक्स और मौलाना शबाब रजा ने अथितिगण का स्वागत किया। इस अवसर पर रे० आशीष मस्टोन, रे० सैर वर्मा, रे० जे पी के जोसफ, रे० क्रिस्टोफर सामुएल, रे० नरेश सिंह, रे० मनोजसिंह, रे० संजय वर्मा, रे० आजाद मसीह, डा. डेविड चार्ल्स, विनीता प्रकाश, डा. रोबर्ट रवि लायल (प्रबंधक, लखनऊ क्रिस्चियन कालेज) फादर अनिल तिर्की, डा हरमेश चैहान, जमानत अब्बास, डा. रमाकांत, जमानतअली समेत बड़ी संख्या में चर्च के प्रतिनिधियों एवं शिक्षाविधों उपस्थित हुए। फादर डोनाल्ड डिसूजा ने अथितिगण को धन्यवाद् ज्ञापित किया। कार्यक्रम का समापन दिव्यांगजनों द्वारा राष्टगान से हुआ। कार्यक्रमका सन्चालन माइंडशेयर के महासचिव सय्यद जुल्फी द्वारा किया गया।

 

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