स्वतंत्र प्रभात-कमीशन के चक्कर में निजी अस्पताल को किया रेफर

 

अमेठी जिले के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर जिम्मेदार लोग खिलवाड़ कर रहे हैं प्रसव के नाम पर अवैध वसूली का सिलसिला नहीं खत्म हो रहा है

एक तरफ विभाग के जिम्मेदार व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए लाखों रुपये खर्च कर रहे हैं तो दूसरी तरफ लापरवाह अधिकारी और कर्मचारी किरकिरी कर रहे हैं

आये दिन प्रसव में लापरवाही और जच्चा व बच्चा की मौत होने के मामले सरकारी अस्पतालों में हो रहे है ऐसा ही एक मामला मंगलवार की देर शाम अमेठी जिले के तिलोई सीएचसी में सामने आया तो लोगों की रूह ही कांप गई।  अमेठी में सरकारी अस्पताल से डिलेवरी केस निजी नर्सिगहोम भेजे जा रहे हैं

महकमे में चर्चा है कि सरकारी अस्पतालों के डाक्टर व स्टाफ नर्स से निजी अस्पताल संचालकों की साठगांठ हैं वह प्रसूता के परिजनों को इतना डरा देते हैं कि वह निजी अस्पताल मरीज ले जाने को मजबूर हो जाते हैं। जिला अस्पताल परिसर के बाहर खड़ी निजी नर्सिगहोम की एंबुलेंस से मरीज भेज दिया जाता है। इसके बदले उन्हें मोटी रकम मिलती है।

एक दो नहीं बल्कि इस तरह के दर्जनों मामले प्रकाश में आ चुके हैं। ऐसा ही एक मामला अमेठी जनपद तिलोई सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र का है जहां मिली जानकारी के अनुसार तिलोई कस्बा निवासी हरिकेश मोदनलाल की पत्नी मंजू देबी उर्म 28वर्ष को कल शाम 7-30 मिनट पर रायबरेली जिला अस्पताल रेफर 102 से किया गया लेकिन रायबरेली न जाकर वह मोहनगज मे बैगेर राजिस्टेशन का चल रहा आस्था क्लीनिक पर आशा बहू बंदना सिह सहित उतार दिया और वहाँ पर तैनात डाक्टर यू सी पाण्डेय द्धारा 22000 हजार की माँग की गयी पैसा देने मे अस्मर्थता ब्यक्त की और हरिकेश ने इसकी शिकायत उप जिलाधिकारी अशोक कुमार शुक्ला से कीऔर हो रही लूट की शिकायत कर कार्यवाही की माँग किया

तत्काल सूचना पाकर उपजिलाधिकारी घटना स्थल पर पहुँच कर 102के डाईबर अवधेश कुमार को लेकर थाना मोहनगज लेकर चले गये इस तरह लूट पाट तथा कर्मचारियो की सेटिंग का मामला का पर्दा उठा बताते चले कि इसमे मोटी रकम सरकारी गाड़ी से लेकर आये ड्राइवर के साथ कर्मचारियों का निश्चित है अमेठी जिले मे सैकडो प़ाईवेट क्लीनिक धडल्ले से बैगेर राजिस्टेशन के चल रहे है जिन पर कार्यवाही न होने के कारण हौसले बुलद है एसे क्लीनिक शकरगज मोहनगज शाहम ऊ सेमरौता इहौन्ना सहित कस्बों मे बिद्धमान है l

इस संबंध में मुख्य चिकित्सक अधिकारी राजेश मोहन से बात करने का प्रयास किया गया तो उनका मोबाइल स्विच ऑफ था कर्जा लेने को मजबूर परिजन अमेठी : गरीब तबके के लोग डिलेवरी केस में हो रहे इस खेल में कर्जदार हो रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में उन्हें मरीज की सीरियस हालत बताकर निजी नर्सिगहोम भेज दिया जाता है। इसके बाद नर्सिगहोम में उनसे मोटी रकम मांगी जाती है।

रुपये के तत्काल इंतजाम में परेशान व्यक्ति कर्जा लेने को मजबूर हो जाता है। रिपोर्ट संतोष त्रिपाठी

DILIP KUMAR TIWARI
recommend to friends

Comments (0)

Leave comment