कृषि विश्वविद्यालय की सलाह सेे किसान भाई करें सरसों की खेती

 
स्वतंत्र प्रभात

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       आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ बिजेंद्र सिंह के दिशा निर्देश के क्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ अशोक कुमार सिंह ने बताया कि किसानों के लिए सरसों की खेती मुनाफे का सौदा है। इस बार सरसों की जबरदस्त कीमत मिली है और पूरे साल भाव उच्चतर स्तर पर बने रहे। इस बार मिली अच्छी कीमत को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि आगामी सीजन में सरसों की पैदावार में भारी बढ़ोतरी होगी। कुछ किसान अगेती सरसों की खेती की तैयारी शुरू कर चुके हैं।

सस्य वैज्ञानिक डाँ अशोक कुमार सिंह ने बताया कि जिन्हें फरवरी माह में गन्ना, अगेती सब्जियां और जनवरी में प्याज व लहसून की खेती करना चाहते हैं, ऐसे किसान अपनी खेतों को खाली रखते हैं। उनके लिए सरसों की अगेती खेती काफी लाभदायक हो सकती है, और वे अतिरिक्त मुनाफा हासिल कर सकते है। डॉ सिंह के मुताबिक, इस तरह के खेत सितंबर से लेकर जनवरी तक खाली रहते हैं। ऐसे में किसान भाई कम समय में पककर तैयार हो जानी वाली भारतीय सरसों की अच्छी प्रजाति लगाकर मुनाफा कमा सकते हैं। डॉ सिंह बताते हैं कि पूसा ने कुछ किस्मों को विकसित किया है, जो जल्द पककर तैयार हो जाती हैं और उत्पादन भी अधिक मिलता है।

 विश्वविद्यालय की मीडिया प्रभारी डॉ अखिलेश कुमार सिंह ने बताया कि अधिक उत्पादन देने वाली किस्में के बारे मे कृषि सस्य विशेषज्ञ डाँ अशोक कुमार सिंह ने बताया कि किसान भाई पूसा अग्रणी किस्म की खेती कर सकते हैं, यह 110 दिन में पक कर तैयार हो जाती है और एक हेक्टेयर में 13.5 क्विंटल पैदावार मिलती है। इसके अलावा, पूसा तारक और पूसा महक किस्मों की अगेती खेती हो सकती है। ये दोनों किस्में करीब 110-115 दिन के बीच पक जाती हैं और प्रति हेक्टेयर औसतन 15-20 क्विंटल पैदावार हासिल होती है।

उन्होंने एक और किस्म के बारे में जानकारी दी, जो सबसे कम समय में पककर तैयार हो जाती है. डॉ सिंह ने बताया कि पूसा सरसों- 25 नाम की किस्म 100 दिन में तैयार हो जाती है. एक हेक्टेयर में पूसा सरसों- 25 की बुवाई कर 14.5 क्विंटल पैदावार प्राप्त कर सकते हैं।

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