न्याय की आस के लिए दर दर भटक रही है फौजी की पत्नी,

 
न्याय की आस के लिए दर-दर भटक रही है फौजी की पत्नी,


स्वतंत्र प्रभात


 कानपुर मृतक फौजी इंद्रनारायण निगम की पत्नी विधवा उर्मिला निगम  के अनुसार उनकी पती सेना में भर्ती के साथ पूर्ण रूप से मैडकली फिट थे और उनके अपने दायित्वों को दिए गए अनुसार ईमानदारी एवं निष्ठा के साथ निभाते हुए पाकिस्तान के युद्ध में अपनी जान की बाजी लगाकर विजय हासिल करने में सहयोग भी बने जिसके फलस्वरूप उन्हें मेडल देकर सम्मानित भी किया गया मानसिक शोषण तत्कालीन विभागिये अधिकारियों द्वारा अज्ञात कारणों से उनका इतना मानसिक शोषण किया गया

 के  वे दिमागी रूप सेअसंतुलीत हो गए इसके बावजूद अधिकारियों ने उन्हें कार्यकाल से बाहर भी निकाल दिया प्रार्थिनी उर्मिला निगम बताती है कि मेरे बच्चे के भाग्य से वह मुझे भटकते हुए हैं हाल में मिलेगी जो कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं थे उनकी इस स्थिति और ड्यूटी के बारे में पूछते आसामान्य रूप से चिल्लाते हुए रोने लगते थे और कहते थे कि वह मुझे मार देंगे उर्मिला निगम के अनुसार की जानकारी 22/10/1968 क़ो मिली उर्मिला निगम की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के वे अपने पति का इलाज ना करा सकी और 17/10/2006 क़ो उनका स्वर्गवास हो गया

 पति के गवाने के बाद वे उनके सर्विस रिकॉर्ड की जानकारी लेने के लिए दर बदर भटकने लगी पति को प्रार्थी जिस अवस्था में मिली ऐसा प्रतीत होता है कि सारे कार्य क रिकॉर्ड ने छल कपटपूर्ण ढंग से एकतरफा कर करते हुए एक मेडल सिपाही के साथ सेनलेस की तिथि व लापरवाही दर्शाता है उर्मिला निगम के अनुसार स्वर्गवासी पति की हालत जानकारी 22/10 /1968 को उनसे मिलने पर हुई पति की असामान्य स्थिति में होने का कारण किसी भी रिकॉर्ड में अवगत नहीं हो पाई है 

17/ 10 /2006 कोई असली सेवा मुक्ति तिथि माना जाए मृतक की आश्रितो को  कानूनत:से मिलने वाली आर्थिक सहायता प्रदान ना करना कहीं ना कहीं घोर षड्यंत्र का इसारा करता है उर्मिला निगम अब तक सेना के वरिष्ठ अधिकारी रक्षा मंत्री आर्मी हेडक्वार्टर,चीफ एडिटर राष्ट्रपति कोविंद क़ो प्रार्थना पत्र दे चुके हैं परंतु कहीं से भी कोई सहायता प्राप्त नहीं हुई है

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