पुलिस की सुस्त कार्यप्रणाली से कबाड़ मजदूर भुखमरी की कगार पर

मजदूरों का कहना है कि आखिर उनका कसूर क्या है

 
स्वतंत्र प्रभात

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लहरपुर सीतापुर नगर क्षेत्र के गौरिया स्थित अंतर्राज्यीय स्तर पर चर्चित कबाड़ व्यवसाय पर पुलिस की सुस्ती के चलते कबाड़ मार्केट में पूरी तरह से सन्नाटा पसरा हुआ है और इस व्यवसाय से जुड़े हुए सैकड़ों मजदूर तबके के लोग भुखमरी की कगार पर हैं। बताते चलें कि लगभग 1 माह पूर्व लहरपुर के गौरिया स्थित कबाड़ मार्केट के कुछ कबाड़ व्यवसाईयों के द्वारा कबाड़ व्यवसाय की आड़ में चोरी के वाहन काटने की सूचना मिलने पर पुलिस क्षेत्राधिकारी राजू कुमार साव ने कबाड़ मार्केट का औचक निरीक्षण कर सभी कबाड़ व्यवसाईयों को तत्काल रजिस्ट्रेशन करा

कर और अपने स्टॉक रजिस्टर को मेंटेन करके सत्यापन कराने को कहा था और जब तक सत्यापन नहीं हो जाता है तब तक सारी दुकानें बंद रखने का निर्देश दिया था पर स्थानीय पुलिस की सुस्ती के चलते मामले को लगभग 1 माह बीत चुका है अभी तक न सत्यापन पूरा हो पाया है और ना ही कबाड़ मार्केट में व्यवसाय दोबारा से शुरू हो पाया है जिसके चलते कबाड़ की दुकानों पर काम कर रहे सैकड़ों मजदूर, ठेलिया वाले और पुरानी गाड़ियों को खींच कर लाने वाले इस कबाड़ व्यवसाय से जुड़े वाहन चालक सभी पूरी तरह से बेरोजगार हो गए हैं सच्चाई यह है कि कुछ कबाड़ व्यवसायियों के कारण आज लगभग 1 माह से कबाड़ की मार्केट पूरी तरह से बंद है

और कबाड़ व्यवसाय से जुड़े लोगों के परिवारों के हजारों लोग भुखमरी की कगार पर हैं। कोविड के चलते जहां एक तरफ पहले से ही नौकरियों और व्यवसाय के साथ-साथ मजदूरी के क्षेत्र में अवसरों की कमी आई है वही कबाड़ मार्केट के बंद होने से इस व्यवसाय से जुड़े हजारों लोगों के भुखमरी की कगार पर पहुंच जाने से समस्या और गंभीर हो गई है कबाड़ मार्केट के बंद हो जाने से गली गली घूम कर कबाड़ खरीदने वाले कबाड़ की दुकानों पर कबाड़ को काटने का काम करने वाले मजदूर और सामान

इधर-उधर लाने ले जाने वाले ठेलिया चालक मजदूर सभी के घर खाने को लाले हो गए हैं न प्रशासन और ना ही कबाड़ व्यवसाई किसी को इन गरीब मजदूरों का दर्द नजर नहीं आता। जानकार ये भी बताते हैं कि कबाड़ मार्केट नगर क्षेत्र से बाहर की तरफ होने से किसी भी दुकान पर बिजली का कनेक्शन नहीं है जिसके चलते सीसीटीवी कैमरों के लगने की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं हो पा रही थी किन्तु पुलिस क्षेत्राधिकारी राजू कुमार साव की पहल पर विद्युत विभाग द्वारा कनेक्शन के लिये आवेदन होने की स्थिति में वहीं पर ट्रांसफार्मर लगा कर नए विद्युत कनेक्शन देने की बात स्वीकार कर ली गई है कहने को तो सत्यापन का कार्य भी चल रहा है

किंतु सच्चाई के आईने में झांक कर देखें तो इस समूची प्रक्रिया में लगने वाला समय और इसके दौरान बाजार की बंदी यहां काम करने वाले मजदूरों और उसके परिजनों के लिए बहुत भारी साबित हो रही है देखना यह है कि क्या प्रशासन जांच और सत्यापन प्रक्रिया में तेजी लाकर गरीब मजदूरों की रोजी-रोटी से जुड़े इस मानवीय संवेदना के विषय पर जल्द कोई राहत देने का काम कर पाएगा या नहीं।

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