वैज्ञानिक खेती कर अच्छी फसल उगाये ।

विलंब से बुवाई हेतु वरदान व आशीर्वाद का चयन करें क्षारीय व लवणीय भूमि के लिए
 
वैज्ञानिक खेती कर अच्छी फसल उगाये ।

स्वतंत्र प्रभात 

ए. के. फारूखी (रिपोर्टर)

 भदोही । सरसों या राई रबी तिलहनी फसलों में प्रमुख स्थान रखता है इसकी खेती कम सिंचाई एवं कम लागत से बेहतर लाभकारी होता है बशर्ते वैज्ञानिक विधि  अपनाई जाए। सरसों उत्पादन करने में कुछ प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान देने की आवश्यकता होती है जैसे प्रजातियों का चयन-क्षेत्रीय जलवायु के दृष्टिकोण से पूर्वी उत्तर प्रदेश में समय से बुवाई हेतु  क्रांति, पूसा बोल्ड, पूसा जगन्नाथ, पूसा विजय, भारत सरसों -1 ,भारत सरसों- 2, पूसा जय किसान, पूसा विजय , गिरिराज, आर.एच-749,आर.एच.-725  इत्यादि प्रजातियों का चयन करें। विलंब से बुवाई हेतु वरदान व आशीर्वाद का चयन करें क्षारीय व लवणीय भूमि के लिए नरेंद्र राई 1, सी एस. -52, सी एस-54 व सी एस- 56 प्रजातियों का चयन करें।


बीज दर : 2.4 से 3 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर अथवा 600 ग्राम से 750 ग्राम प्रति बीघा ही बीज प्रयोग करें।
बीज शोधन: 2.5   ग्राम कार्बेंडाजिम प्रति किलोग्राम बीज की दर से बीज शोधन अवश्य करें।
बुवाई का समय: सितंबर के अंतिम सप्ताह से 25 अक्टूबर तक बुवाई अवश्य संपन्न कर ले विलंब से बुवाई करने पर माहू का प्रकोप तथा पैदावार में कमी हो जाती है।
बुवाई की विधि : सरसों की बुवाई हमेशा पंक्तियों में करें पंक्ति से पंक्ति की दूरी 45- 60 सेंटीमीटर तथा पौध से पौध की दूरी 20 से 25 सेंटीमीटर कर दें बुवाई के 20 दिनों के अंदर  विरलीकरण अवश्य कर दें और पौधों से पौधों की दूरी 25 से 30 सेंटीमीटर  सुनिश्चित करें।

पोषक तत्व प्रबंधन: बुवाई के पूर्व 20 से 25 कुंटल गोबर की सड़ी खाद तथा बुवाई के समय 25 से 32 किलोग्राम डी.ए.पी., 16 से 18 किलोग्राम यूरिया तथा 15 से 16 किलोग्राम म्यूरेट  ऑफ पोटाश तथा 8 से 9किलोग्राम  सल्फर 90%  चीलेटेड डीपी का प्रयोग करें। पहली सिंचाई के बाद अर्थात बुवाई के 35 दिन बाद 25 से 32 किलोग्राम  यूरिया प्रति बीघा की दर से प्रयोग करें।
सिंचाई: सरसों की सिंचाई कभी भी 30 दिन के अंदर ना करें 35 से 40 दिन के अंदर पहली सिंचाई करें, दूसरी सिंचाई फली बनने के बाद करें सिंचाई  सदैव हल्की करें तथा 15 दिसंबर से लेकर 15 जनवरी तक सिंचाई कदापि ना करें। उन्नतशील प्रजातियों एवं वैज्ञानिक सस्य विधियां अपनाकर 8 से 9 कुंटल प्रति बीघा सरसों की पैदावार ली जा सकती है।

FROM AROUND THE WEB