बुझी समाजवाद की आखिरी लौ नहीं रहे सत्येंद्र राय ।

हिंद मजदूर कालीन बुनकर पंचायत  संगठन बना था उस संगठन में इन्होंने महामंत्री के रूप में काम भी किया था
 
बुझी समाजवाद की आखिरी लौ नहीं रहे सत्येंद्र राय ।

ए के फारूखी (रिपोर्टर)

ज्ञानपुर,भदोही ।

 जनपद के समाजवाद की आखिरी लौ उस समय बुझ गई जब सत्येंद्र राय ने आखरी सांस ली डॉ राम मनोहर लोहिया के साथी समाजवाद के पुरोधा  सत्येंद्र राय नेताजी का जीवन संघर्षों से भरा रहा मजदूरों की एक आवाज सुनकर दौड़ पढ़ने की खूबी सत्येंद्र राय में समाहित थी  सोशलिस्ट पार्टी में डॉ राम मनोहर लोहिया के आवाहन पर देश को पुर्तगालियों से आजाद कराने के लिए गोवा मुक्ति आंदोलन  तहत सन 62 में   विक्टोरिया की मूर्ति जो वाराणसी के बेनियाबाग में लगा था सत्येंद्र राय द्वारा तोड़ा गया और उसी के तहत इनको 13 महीने का सश्रम कारावास भी हुआ था  उससे प्रभावित होकर डॉक्टर राम मनोहर लोहिया ने इनको सोवियत संघ भेजा था  1977 के    रायबरेली के चुनाव में उन्होंने  राजनारायण के  मुख्य  कंपेनर का काम किया था इसके साथ ही  हिंद मजदूर कालीन बुनकर पंचायत  संगठन बना था उस संगठन में इन्होंने महामंत्री के रूप में काम भी किया था 

पूर्व सांसद यूसुफ  बेग के पारिवारिक मित्र होने के साथ ही  जनपद के मजदूरों में अपनी एक अलग छवि बनाई थी इस दौरान श्री चिंताम़णि राय इंटर कॉलेज की स्थापना मूसी लाटपुर में की थी वहां पर बतौर शिक्षक उन्होंने शिक्षा की लौ जलाई आगे चलकर उसी विद्यालय में प्रधानाचार्य के पद से सेवानिवृत्त हुए ।

 अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ कर गए हैं सत्येंद्र राय के निधन की खबर ज्यों ही  जनपद वासियों को लगी सर्वप्रथम उनके पारिवारिक मित्र पूर्व सांसद यूसुफ के पुत्र एवं पूर्व विधायक जाहिद बेग उनके आवास पर पहुंच गए और अपनी गहरी शोक संवेदनाएं परिजनों के साथ साझा की उनके साथ वरिष्ठ समाजवादी नेता पन्ना लाल यादव लोकदल प्रदेश अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह मुन्ना कामरेड फूलचंद यादव दिनेश मास्टर राजेश राय  आदि शामिल रहे जबकि काका ग्रुप यादवेन्द्र राय काका डॉक्टर प्रमोद राय रमेश राय उत्तर प्रदेश चुनाव चुनाव आयोग के विशेष कार्याधिकारी सहित तमाम लोग मौजूद रहे।


 

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