ज्योतिष से करे रोग का इलाज......

ज्योतिष से करे रोग का इलाज......

ज्योतिष शास्त्र और रोग -

रोगों का विचार कुंडली के छठे भाव से किया जाता है तथा इसके साथ ही 6thभाव के कारक मंगल, शनि, लग्न-लग्नेश, चंद्र-राशीश तथा इन सभी पर पाप प्रभाव का विचार महत्वपूर्ण है। . किस ग्रह के कारण कौन सा रोग होता है ? : सूर्य – हड्डी, मुँह से झाग निकलना , रक्त चाप , नेत्र दोष

चंद्र – मानसिक तनाव, माइग्रेन, घबराहट, आशंका की बीमारी मंगल – रक्त सम्बंधी समस्या, उच्च रक्तचाप, कैंसर, वात रोग , गठिया ,

बुध – दंत सम्बंधी बीमारी, हकलाहट, गुप्त रोग, त्वचा की बीमारी, कुष्ट रोग , चेचक, नाड़ी की कमजोरी

गुरू – पेट की गैस, फेफड़े की बीमारी, यकृत की दिक़्क़त, पीलिया

शुक्र – शुक्राणुओं से सम्बंधित , त्वचा, खुजली, मधुमेह

शनि- कोई भी लम्बी चलने वाली बीमारी जैसे एड्स, कैंसर, पैरों में फ्रैक्चर आदि

राहू – बुखार , दिमाग़ी बिमारी, दुर्घटना, पेट संबंधी रोग, आदि

केतू – रीढ़, स्वप्नदोष, कान, हार्निया यदि कुंडली में ये ग्रह छठे भाव के स्वामी के साथ सम्बंध बनायें, और उनकी दशा, अंतर्दशा, प्रत्यंतर दशा आये है तो उसी समय , उस दशानाथ से सम्बंधित बीमारी जन्म लेती है । रोग उपचार : मंत्र जप द्वारा रोगी की स्थिति में अनुकूलता लाई जा सकती है। मंत्र जाप में इतनी शक्ति होती है कि इनसे कई तरह के रोगों का उपचार होता है। मंत्र जाप को अध्यात्म का दवाखाना भी कहा जाता है। पीड़ित ग्रह संबंधी दान करने से भी रोग स्थिति में अनुकूलता पाई जा सकती है।

इति शुभम्

( पंडित अम्बरीष चन्द्र मिश्रा अयोध्या )

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