महान सूफी संत हजरत गुलजार शाह उर्फ टक्करी बाबा पर विशेष।

महान सूफी संत हजरत गुलजार शाह उर्फ टक्करी बाबा पर विशेष।


अय्यूब खान/स्वतंत्र प्रभात

बिसवां सीतापुर पूरे हिंदुस्तान में इंसानियत प्यार और हिंदू मुस्लिम एकता का संदेश देने वाले महान सूफी संत शेखउल औलिया हजरत गुलजार शाह रहमतुल्लाह अलैह का उर्स व मेला निजी स्वार्थ खुदगर्जी और राजनीति के रहते आजकल पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।मेला व उर्स कराने की आड़ में लाखों रुपयों और करोड़ों की संपत्ति को अपने निजी स्वार्थ में प्रयोग करने के लिए कई कमेटियां अपना दावा उर्स व मेला कराने के लिए पेश कर रही हैं। स्थानीय प्रशासन इस महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन को सुचारू रूप से संपन्न कराने तथा इस प्रकरण को निस्तारित करने के लिए भले ही साफ़ मन से प्रयास कर रहा है। किंतु ऊंट किस करवट बैठेगा अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगा। कई समितियां राजनीतिक प्रभाव डालने के बाद अपने मकसद में सफल ना होने पर मजबूर होकर माननीय उच्च न्यायालय का सहारा लेने और अपना दावा मजबूत करने के लिए अदालत के चक्कर लगा रही हैं। इस कशमकश में की उर्स व मेला का आयोजन करने का अधिकार किसे है। उसकी मुकर्रर तिथि भी गुजर गई जिससे न सिर्फ बाबा हजरत गुलजार शाह के अकीदत मन्दों को निराशा हुई है। बल्कि बिसवां की आवाम में भी जबरदस्त नाराजगी देखने में आ रही है। उत्तर प्रदेश के मशहूर मेलों में शुमार होने वाला महान सूफी संत हजरत गुलजार शाह उर्फ टक्करी बाबा का वार्षिक उर्स मेला लगभग 70 वर्षों से परंपरागत माह अगहन में 13 तारीख से आयोजित होता रहा है। लगभग 1 माह तक चलने वाले इस मेले में प्रदेशिक स्तर के खेल कूद मुकाबले सांस्कृतिक तथा साहित्यिक कार्यक्रम संपन्न होते हैं। इस वर्ष मेला व उर्स का उद्घाटन की तिथि पहले 8 दिसंबर फिर उसके बाद 21 दिसंबर और उसके बाद 26 दिसंबर को घोषित की जा चुकी है। किंतु  मेले का शुभारंभ निश्चित तिथि पर होने के आसार अब भी नजर नहीं आ रहे हैं। क्योंकि मामला माननीय हाईकोर्ट में पहुंच चुका है अब देखना यह है कि उर्स व मेला आयोजन करने का अधिकार पुरानी कमेटी या वक्फ बोर्ड के द्वारा नामित की गई कमेटी या फिर बाबा हजरत गुलजार शाह के आखरी रसुमात(अन्तिमसंस्कार) अदा करने वाले वारिशों की मांग पर इस वर्ष प्रशासन द्वारा मेला किया जाएगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

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