रेप की घटना नारी अस्मिता के विपरीत -शबीहा खातून 

रेप की घटना नारी अस्मिता के विपरीत -शबीहा खातून 
  • समाज को करना होगा आत्ममंथन

आलापुर , अम्बेडकर नगर।   हैदराबाद और उन्नाव की दर्दनाक घटना से पूरे देश में जहाँ उबाल है और देश में ऐसी  पैशाचिक व हैवानियत देखने को मिल रही है जो कम देशों में मिलती है।रेप की घटना पूरे विश्व में होती है जो नारी अस्मिता के विपरीत है लेकिन उसके बाद की बर्बरता झकझोर देती है।  

उक्त बातें सामाजिक संस्था ए वी पी संस्थान की उप निदेशक डॉ सबीहा खातून ने एक भेंटवार्ता में कहीं।उन्होंने ने कहा कि समाज को आत्ममंथन करना चाहिए कि क्यों ऐसी घटनाएं बीते एक दशक में ज्यादा होनी शुरू हुई जिसमें किशोरों का प्रतिशत ज्यादा है ।  गौर किया जाय तो पता चलता है

कि आज का हमारा परिवेश, पश्चयात संस्कृति, मोबाइल क्रांति और स्कूली शिक्षा में गिरावट समेत तमाम कारण सामने आते हैं ।स्कूलों में संस्कार परक शिक्षा के स्थान पर महज रोजगारपरक शिक्षा को महत्व देना है।स्मार्टफोन बच्चों से लेकर बुजुर्गों के हाथों में जहां तमाम अच्छी बुरी चीजें बड़ी आसानी से देखने सुनने को मिल जा रही हैं।

साथ ही हमारा सामाजिक और पारिवारिक परिवेश जिसमे हम बच्चों को संस्कार, नैतिक शिक्षा, महिलाओं व बुजुर्गों का सम्मान करना सिखाना भूल गए हैं जिसके लिए सामाजिक माहौल ज्यादा जिम्मेदार है जरूरत है कि देश में सद्भाव और अच्छे संस्कार को पैदा करने की जो आज के युवा पीढ़ी को मटमैला कर रहा है  ।

 श्रीमती खातून ने कहा कि हैदराबाद की घटना के चारों आरोपियों को न्याय व्यवस्था से इतर सजा ठीक नहीं है, तमाम लोग खुश हैं लेकिन चिंता की बात यह तो तालीबानी तरीका है, भीड़ तंत्र हावी होगा तो लोकतंत्र और संविधान पर खतरा बढ़ेगा ऐसी संस्कृति का चलन नहीं होना चाहिए।

इस विषय पर नीति नियंता और न्यायपालिका को विमर्श करना पड़ेगा ताकि पीड़ित पीड़िता को त्वरित न्याय मिल सके। एक बात और जनता समझे कि बदला न्याय का विकल्प नहीं हो सकता और सिस्टम समझे अभी क्यों  निर्भया कांड के दोषी फाँसी के फंदे पर लटके नहीं।
 

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