अध्यात्म को व्यवसाय बनाने वाला जाता है जेल बेटियां होती है घर की इज्जत- श्री प्रेमभूषण महाराज जी

अध्यात्म को व्यवसाय बनाने वाला जाता है जेल बेटियां होती है घर की इज्जत- श्री प्रेमभूषण महाराज जी

गोन्डा

पवन कुमार द्विवेदी 


अध्यात्म को व्यवसाय बनाने वाला जाएगा जेल -प्रेम भूषण महराज , श्रीराम का जीवन समाज के लिए आदर्श 

मानस परिवार दौदापुर द्वारा आयोजित नौ दिवशीय संगीतमय श्रीराम कथा के दौरान छठवे दिन शुक्रवार को पूज्य संत प्रेमभूषण जी महाराज ने भगवान श्रीराम के जीवन से जुडी कथा और अनेक भजन सुनाते हुए कहा की बेटा बेटी में अंतर न करे। आज के समय में बेटियां इन बेटो से आगे है। बेटियों को बेटा समझे, किसी मामले में यह इनसे कम नही है। इनको बेटो की तरह अच्छी शिक्षा दिलवाये।

श्रोताओ को बताया की एक बेटी को जन्म देना 100 पीपल के बृक्ष लगाने के समान पूण्य प्राप्त होता है। बेटी के बिना पूरा घर सूना रहता है। यह घर का सारा काम प्रेम से करती है और माता पिता सहित सभी का ख्याल भी रखती है। बेटिया ऐसी पौध है जहाँ लगा दो उसी वातावरण में स्वयं को ढाल लेती है।

ये बेटी तू ससुरे में रहिइया चाँद बनके....


नारी शिक्षा से घर परिवार सुसज्जित रहता है। नारी शिक्षा के प्रति हम उदासीन रहे है इसलिए अब सरकारी अभियान भी इसको लेकर चलाये जा रहे है। बेटियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि बेटियां अपनी सम्पति है इनमें परायेपन का एहसास न करायें।

बेटियों को पढाओ आगे बढाओ ये पराई सम्पत्ति है ऐसा विचार त्यागिये। आज सारी मर्यादा बेटियों के लिए है बेटों के लिए क्यों नहीं। जिस दिन हम बेटों की तरह बेटियो को भी सांस्कारित कर देगें उस दिन भारत की धरती स्वर्ग हो जायेगी। बेटी मां बाप की दौलत होती हैं।

 

महराज ने कहा कि मिथिला शहर प्रेम का प्रतीक है और अयोध्या त्याग का प्रतीक है। भगवान राम का जीवन ही त्याग का पर्याय है। निर्विकार भाव से कार्य करने पर भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए। आज के सामाजिक परिवेश का वर्णन करते हुए कहा कि आज संतो को संदेह की दृष्टि से देखा जा रहा है।

आज कथा वाचक और संत जेल जा रहे हैं। उन्होंने चारित्रिक विकास पर बल देते हुए कहा कि अध्यात्म कभी जेल नहीं जा सकता परन्तु जो अध्यात्म को ब्यवसाय बनायेगा वह अवश्य जेल जायेगा। अध्यात्म ब्यक्ति को श्रेष्ठ आचरण सिखाता है। अध्यात्मिक ब्यक्ति कभी गलत रास्ते पर नहीं जाता है। 


किसी भी व्यक्ति को स्वार्थी नही होना चाहिए। हमे धर्मशील होना चाहिए और धर्म के विरुद्ध कार्य नही करना चाहिए, जैसा की मिथिला है। कहा की आप और हम चाहे जितना भी करे किन्तु अंत में कुछ साथ में नही जाएगा। साथ में सिर्फ पूण्य और परमार्थ ही जावेंगे। साथ में रूपया, पैसा, धन, दौलत कुछ नही जाता है।

जो प्राप्ति है वह प्रभु की कृपा है। देना तो भगवान का स्वभाव और आदत है। बस एक बार प्रेम से उनको याद तो करे। कहा की भगवान सिर्फ प्रेम के भूखे है, प्रेम से बुलाये वे दौड़े चले आएंगे। प्रेम की व्याख्या करते हुए महराज जी ने भगवान राम और केवट के प्रथम मिलन के प्रसंग को सुनाते हुए प्रेम का अर्थ समझाया। कहा भगवान नीच, ऊँच और अमीर, गरीब या छोटा-बड़ा देखकर नही आते बल्कि प्रेम देखकर आते है।


कथा के दौरान कथा आयोजक पदुमनाथ तिवारी, कल्पना तिवारी, संतोष मणि तिवारी, रूचि तिवारी, हरीश तिवारी, विनय तिवारी, विश्वनाथ तिवारी, रीता तिवारी, काशी प्रसाद तिवारी, पारसनाथ तिवारी, बद्री प्रसाद तिवारी, शकुंतला तिवारी, कमलामणि तिवारी, कंचन तिवारी, रघुवंश मणि तिवारी, अम्बरीष मणि तिवारी, प्रीति तिवारी, पंकज तिवारी, अयोध्या धाम के राजकुमार दास जी महराज, मुख्य अभियंता बिजली आरके श्रीवास्तव, डा0 विवेक मिश्र, अशोक दुबे, डा0 सुमन, राहुल मणि तिवारी, प्रतिभा तिवारी, नीति तिवारी, विनय तिवारी, उमाशंकर शुक्ल, महेश नारायण तिवारी, रंजना तिवारी, प्रियंका तिवारी, दामोदर प्रसाद शुक्ल, पीताम्बर शुक्ल, राकेश शुक्ल, राम विलास मिश्र, अजय मिश्र, मनोज पाडे, कमलकांत शुक्ल, सुरेश नरायन पाडे, मनोज दुबे, कृष्णा पांडेय, डॉ0 सुमन मिश्रा, शीमा तिवारी, डॉ0 अमित पांडे,

कामेश्वर शुक्ल, शेषदत्त शुक्ल, रामउग्र तिवारी, आशीष पांडे, डॉ0 अजय तिवारी,  भगतजी, दुर्गेश मिश्रा, राजेश दुबे, मीरा दुबे , गंगाधर तिवारी, दिनेश शुक्ल, धीरेन्द्र तिवारी, ज्योतिसाचार्य राकेश तिवारी, पीडी मिश्र, विशाल तिवारी, राम बहोरे पाडे, पञ्च तिवारी, विवेक मणि तिवारी, सोनू मिश्र, सिधार्थमणि तिवारी, सतीश कुमार, सुनील तिवारी, राहुल मणि तिवारी, घनश्याम शुक्ल, हरीओम शुक्ल, गुड्डू पंडित, बदन्ने तिवारी, सहजराम तिवारी, पञ्च तिवारी, संजीव कुमार शुक्ल, दामोदर पाडे, अनुराग मिश्र, दुर्गेश मिस्र, प्रिंस तिवारी, राजेश ओझा, राजामुन्ना तिवारी, घनश्याम शुक्ल, नरेंद्र दुबे, अन्नु पांडेय, सचिव राकेश तिवारी, विकास मिश्रा, प्रभाकर शुक्ल आदि सहित हजारो लोग मौजूद रहे।

विशाल भंडारा 5 को

कथा का समापन पांच नवम्बर को विशाल भंडारे के साथ होगा। आयोजक संतोष तिवारी ने बताया की उस दिन की कथा दोपहर 11 बजे से 2 बजे तक होगी, उसके बाद भंडारा का कार्यक्रम होगा ।

 

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