आरटीओ कार्यालय को दलाल मुक्त नहीं कर सके परिवहन मंत्री दावे हवा-हवाई

आरटीओ कार्यालय को दलाल मुक्त नहीं कर सके परिवहन मंत्री दावे हवा-हवाई

                रिपोर्टर - धर्मेन्द्र राघव

अलीगढ़,उ.प्र. -

लाख कोशिश के बावजूद परिवहन विभाग की ऑनलाइन व्यवस्था दलालों के मकड़जाल को ध्वस्त नहीं कर सकी। यही वजह है कि आरटीओ कार्यालय से लेकर प्रदेश के हर कार्यालय में दलाल सक्रिय है।

 जिला प्रशासन की लगातार होने कई कार्रवाइयों के बाद भी एआरटीओ कार्यालय के नजदीक दलालों की दुकानों का दायरा भी बढ़ता जा रहा है। गाड़ियों के  रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस व रेडियम का कार्य सब कुछ दलालों द्वारा किया जा रहा है।

दलालों के अलावा कार्यालय में तैनात सुरक्षा कर्मियों द्वारा लाभ कमाया जा रहा है। सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय हमेशा किसी न किसी कारण से सुर्खियों में बना रहता है।

एआरटीओ विभाग हमेशा ही किसी न किसी वजह से सुर्खियों में बना रहता है। यहां कोई  भी कार्य दलालों के दखल के बिना आसानी से पूरा नहीं हो सकता है। दलालों का एआरटीओ कार्यालय से पुराना नाता रहा है।

 एक ओर जहां गली में दुकानें खोलने को जगह की होड़ मची हुई है, वहीं अब एआरटीओ कार्यालय की गली के बाहर नहर किनारे वाली सड़क तक दलालों की दुकानों का संचालन शुरू हो गया है।

विभिन्न प्रकार के वाहनों के रजिस्ट्रेशन के साथ ही लाइसेंस आदि का कार्य दलालों द्वारा कराया जाता है। यहां तक कि रजिस्ट्रेेशन, लाइसेंस व बीमा आदि के लिए यहां दलालों द्वारा धनराशि भी निर्धारित कर रखी है। कई बार तो उक्त कार्यों में एक दूसरे के दखल पर बवाल तक खड़ा हो जाता है।

पूर्व में कई बार जिलाधिकारी के निर्देश पर आरटीओ कार्यालय में छापेमारी की गई और दलालों के खिलाफ कार्रवाई की गई। यहां तक कि मुकदमा तक लिखा गया है। लेकिन इसके बाद भी आरटीओ कार्यालय में दलालों की भूमिका लगातार बढ़ती ही जा रही है।

यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी खिलाफत भी करता है तो कई बार उन अधिकारियों व बाबुओं के खिलाफ भी घेराबंदी कर दी जाती है और षड़यंत्र तक किया जाता है। 

सौ रुपए में मिल रहा लिफाफा
एआरटीओ कार्यालय में दलालों की भूमिका के अलावा यहां सुरक्षा में तैनात कुछ कर्मियों द्वारा भी लाभ कमाया जा रहा है।

यहां विभाग द्वारा वाहन संबंधी कार्यों के लिए लिफाफा का इंतजाम नहीं किया जाता है। जिसके चलते वाहनों के रजिस्ट्रेशन व अन्य कार्यों के लिए वाहन स्वामियों से सुरक्षा कर्मियों व अन्य लोगों द्वारा पांच रुपए का लिफाफा सौ रुपए तक में बेचा जा रहा है।

कार्यालय शहर से दूर होने के चलते वाहन स्वामियों के साथ यहां खूब ठगी की जा रही है। कार्यालय परिसर में दलालों के प्रवेश पर रोक के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। हालांकि परिसर के बाहर दुकानें संचालित करने पर जिला प्रशासन व पुलिस का हस्तक्षेप होता है।

वहीं सुरक्षा कर्मियों द्वारा लिफाफा बेचने का मामला संज्ञान में आने पर कार्रवाई की जाएगी। इनकी सक्रियता का आलम यह है कि हर काम के लिए आवेदक आज भी दलालों के आगे पीछे घूमते नजर आ रहे है। जिस काम के लिए ऑनलाइन आवेदन शुल्क 500 रुपए है वहीं काम को कराने के लिए दलाल कार्यालय के सामने बने साइबर कैफे से ऑनलाइन प्रक्रिया कराकर एक से डेढ़ हजार रुपए वसूल रहे है।

परिवहन विभाग के अधिकारी बतातें है कि ऑनलाइन व्यवस्था की आधी अधूरी जानकारी होने पर आवेदक दलालों के संपर्क में आ जाते है। जबकि कार्यालय के अंदर ऑनलाइन व्यवस्था के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। इस आधार पर आवेदक चाहे तो घर बैठे अपना काम आसानी से निपटा सकते हैऑनलाइन व्यवस्था के तहत असफल ट्रांजेक्शन अथवा आवेदन शुल्क ज्यादा जमा होने पर रिफंड की सुविधा नहीं है। जबकि रेलवे में ऑनलाइन व्यवस्था के तहत एक सप्ताह में रिफंड खाते में आ जाता है। ऐसे में परिवहन विभाग से पैसा वापस लेने के लिए ट्रेजरी से धनराशि की रिफंड कराने में काफी वक्त लगता है इससे आवेदक परेशान होते है।आम जनता को आरटीओ कार्यालय की दौड़ न लगाने पड़े। इसके लिए परिवहन विभाग ई सुविधा केंद्र खोलने की तैयारी में है। विभाग की ओर से शासन भेजे गए प्रस्ताव में कहा गया है कि प्रदेश भर में 73 हजार कॉमन सर्विस सेंटर है इन सेंटरों के माध्यम से विभाग कामकाम हो सकते है। ई सुविधा अथवा कॉमन सर्विस सेंटर जैसी दो तरह के प्रस्ताव शासन भेजे गए है जिसमें किसी एक पर मंजूरी मिलते ही आवेदकों के कामकाज घर के आसपास बने ई केंद्रों पर आसानी से जाएगे।

विभाग के लिए मजबूरी है दलाल
कार्यालय के कर्मचारी बतातें है कि दलाल विभाग के लिए मजबूरी बन चुके हैं। वजह साफ है कार्यालय में आवेदकों की भीड़ बढ़ रही है और कर्मचारी सेवानिवृत होकर कम होते जा रहे है। दो दशकों से कर्मचारियों की भर्ती हुई नहीं है। ऐसे में कार्यालय के अधिकांश काम दलालों पर ही निर्भर है।
डीएल संबंधी नौ सेवाएं ऑनलाइन
परिवहन विभाग के ऑनलाइन सेवाओं में सारथी फोर साफ्टवेयर के जरिए ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े नौ तरह की सुविधाएं आवेदकों को दी जा रही है। इनमें लर्निंग डीएल, परमानेंट डीएल, डुब्लीकेट डीएल, नवीनीकरण डीएल, डीएल पर दर्ज पता बदलवाना, दो पहिया डीएल को चार पहिया में बदलवाना, डीएल खराब होने पर बदलवाना, इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस की अनुमति लेना, परिचालक लाइसेंस बनवाना शामिल हैं।
वाहन संबंधी नौ सेवाएं ऑनलाइन
परिवहन विभाग के ऑनलाइन सेवाओं में वाहन फोर साफ्टवेयर के जरिए वाहन संबंधी नौ प्रकार की सेवाएं आवेदकों को दी जा रही है। इनमें डुब्लीकेट रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र, वाहन का ट्रांसफर, रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र में पता बदलवाना, एनओसी के लिए आवेदन करना, आरसी पर बैंक लोन दर्ज कराना, आरसी पर बैंक लोन हटवाना, आरसी पर बैंक लोन जारी रखना, आरसी नवीनीकरण कराना, वाहनों के अस्थाई परमिट लेना शामिल हैं।
गली में दुकान खोलने की लगी होड़
एक ओर जहां गली में दुकानें खोलने को जगह की होड़ मची हुई है, वहीं अब एआरटीओ कार्यालय की गली के बाहर नहर किनारे वाली सड़क तक दलालों की दुकानों का संचालन शुरू हो गया है। विभिन्न प्रकार के वाहनों के रजिस्ट्रेशन के साथ ही लाइसेंस आदि का कार्य दलालों द्वारा कराया जाता है। यहां तक कि रजिस्ट्रेेशन, लाइसेंस व बीमा आदि के लिए यहां दलालों द्वारा धनराशि भी निर्धारित कर रखी है। कई बार तो उक्त कार्यों में एक दूसरे के दखल पर बवाल तक खड़ा हो जाता है। पूर्व में कई बार जिलाधिकारी द्वारा भी एआरटीओ कार्यालय में छापेमारी की गई और दलालों के खिलाफ कार्रवाई की गई। यहां तक कि मुकदमा तक लिखा गया है। लेकिन इसके बाद भी आरटीओ कार्यालय में दलालों की भूमिका लगातार बढ़ती ही जा रही है। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी खिलाफत भी करता है तो कई बार उन अधिकारियों व बाबुओं के खिलाफ भी घेराबंदी कर दी जाती है और षणयंत्र तक किया जाता है। 
इनका कहना है....
इस सबंध में एआरटीओ रंजीत सिंह का कहना है कि कार्यालय परिसर में दलालों के प्रवेश पर रोक के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। हालांकि परिसर के बाहर दुकानें संचालित करने पर जिला प्रशासन व पुलिस का हस्तक्षेप होता है। वहीं सुरक्षा कर्मियों द्वारा लिफाफा बेचने का मामला संज्ञान में आने पर कार्रवाई की जाएगी। 

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