अलीग़ढ की टॉप खबरे

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एंटी रोमियो नदारद पहरा और पिकेट तक सीमित महिला सिपाही,नहीं पकड़ा कोई अपराधी 
अलीगढ़। महिला सशक्तीकरण की बात तो खूब की जाती हैं,लेकिन, उन्हें मजबूत बनाने के लिए काम धरातल पर नहीं होता दिख रहा है। यही वजह है कि वर्दी पहनने के बाद भी महिला सिपाहियों को शातिर अपराधी पकडऩे में नहीं साथ रखा जाता है। सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत यह जानकारी मिली है। 

एसपी ऑफिस से लेकर थानों तक सभी जगह महिला पुलिस कर्मियों की तैनाती है। थानों में महिला सिपाही ड्यूटी ही करती हैं।  आवश्यकता के अनुसार मेले और त्योहारों की ड्यूटी में बाहरी जिलों में भेज दिया जाता है। वीवीआइपी और वीआइपी ड्यूटी में भी उन्हें जाना होता है। दिन में पुलिस पिकेट की ड्यूटी ली जाने लगी है।  

थानों में आने वाली महिलाओं के मेडिकल कराने की जिम्मेदारी भी महिला सिपाहियों को ही दी जाती है। अपराध के नाम पर महिला सिपाही सिर्फ दहेज उत्पीडऩ और एंटी रोमियो स्क्वाड तक की ही समिति हैं। 
विभागीय सूत्रों ने बताया कि उनके यहां महिला पुलिस कर्मियों ने कोई शातिर अपराधी नहीं पकड़ा है।

वहीं महिलाओं एवं छात्राओं के साथ हो रहीं घटनाओं को रोकने हेतु सरकार के निर्देश पर पुलिस के आलाधिकारियों ने एंटी रोमियों टीम का गठन किया था,लेकिन सिर्फ दिखावे के लिये एंटी रोमियो टीम कागजों में ही बनकर रह गई है। जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है। किसी भी काॅलेज के बाहर या उसके दूर तक एंटी रोमियो टीम का नाम नहीं है।

जिसके चलते महिलाओं और छात्राओं का घर से निकलने से लेकर काॅलेज जाना तक दुश्वार हो गया है। जबकि जिले में दो दर्जन से अधिक कन्या महाविद्यालय और काॅलेज हैं। इन काॅलेजों के पास फिल्मी स्टाइल मे बालों की कटिगं कराकर आखों पर चश्मा लगा बाइकों पर आवारा किस्म के मनचलों को काॅलेज के शुरू होने के समय या फिर छात्राओं की छुट्टी के समय भंवरे की तरह आस-पास में मंडराते हुये  छीटाकशीं करते हुये देखा जा सकता है। ऐसे मनचलों और बिगड़े रहीसजादों को पकड़ने के लिये एंटी रोमियो टीम कहीं दूर तक दिखाई नहीं देती है।  

इनका कहना है.. 
इस सबंध में एसएसपी आकाश कुलहरि के प्रवक्ता ने बताया कि एंटी रोमियो टीम पूरे जिले में तैनात की गई है। महिलाओं व छात्राओं के साथ हो रही घटनाओं को रोकने के लिये अलीगढ़ पुलिस तत्पर तैयार है। 

 

जिले के इकलौते वृद्धाश्रम में अव्यवस्थाओं का बोलबाला,नहीं मिल रही चिकित्सा सुविधा
अलीगढ़। वृद्धाश्रमों को सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं मिल पा रहा है। हाल यह है कि किसी के बीमार होने पर जिम्मेदार सरकारी चिकित्सक भी भे देखने नहीं आते हैं। वृद्धाश्रमों को  मिलने वाली ग्रांट भी समय पर नहीं मिल पाती, जिसके चलते संचालकों को हर बात के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है। अब देखना होगा जांच के बाद सरकार व्यवस्थाओं को दुरुस्त कराने के लिए क्या कदम उठाती है। 

जिले के दोनों वृद्धाश्रमों में सुविधाओं का टोटा है।  छर्रा स्थित वृद्धाश्रम में फर्जीवाड़े की आशंका है। पूर्व में आश्रम की शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंची तो समाज कल्याण अधिकारी को जांच के निर्देश मिले। जांच पूरी हो चुकी है। जांच टीम को आश्रम में 70 बुजुर्ग मिले, जबकि रिकॉर्ड में 103 दर्ज हैं। सरकार से आश्रम के लिए हर तीन महीने में 15 लाख रुपये का बजट जारी होता है। डेढ़ साल में करीब 80 लाख रुपये जारी हो चुके हैं। 

आश्रम को सरकार से मिलने वाली ग्रांट की धनराशि डेढ़ वर्ष से उन्हें नहीं मिली है। इस कारण बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आश्रम में रहने वाले लोगों को प्रतिदिन राशन चाहिए। इसके लिए कुछ भी करके उन्हें राशन जुटाना पड़ता है। इस चक्कर में अब तक वह काफी उधार कर चुके हैं। उनका कहना है कि सरकार द्वारा सुविधाएं समय पर मिलती रहें तो कोई परेशानी न हो।

सबसे अधिक परेशानी चिकित्सा को लेकर आती है। आश्रम में कोई वृद्ध बीमार हो तो सूचना के बावजूद चिकित्सक नहीं आते हैं। चिकित्सक आ भी जाएं तो दवाएं हमसे ही मंगाई जाती हैं। बार-बार फोन करने के बाद काफी देर से एंबुलेंस भेजी जाती है। 

जिले में अकेला: प्रदेश सरकार ने दो साल पहले बुजुर्गो की देखरेख के लिए हर जिले में वृद्धाश्रम खोले थे। अलीगढ़ जिले में छर्रा में खोला गया। इसके संचालन की जिम्मेदारी अशर्फी ग्रामोद्योग संस्थान को दी गई।
150 बुजुर्गो की क्षमता: आश्रम में 150 बुजुर्ग रह सकते हैं। सरकार बजट भी इसी के हिसाब देती है। यहां बुजुर्गो को रहने-खाने के साथ बीमार होने पर इलाज की सुविधा भी मिलती है।

मुख्यमंत्री से शिकायत: 
नगला मोहन निवासी रनवीर सिंह यादव ने मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी शिकायत में आरोप लगाए कि वृद्धाश्रम में फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। बुजुर्गो की देखभाल में लापरवाही होती है। घटिया खाना दिया जाता है। बीमार होने पर इलाज नहीं कराया जाता। शासन से सप्ताह में हर दिन अलग-अलग सब्जियों का मानक तय है, आश्रम में अधिकांश दिन एक-सा खाना दिया जाता है।
देखरेख को 16 कर्मचारी
आश्रम में 70 बुजुर्गो की देखरेख के लिए 16 कर्मचारी रखे गए हैं। इनमें चार सफाई कर्मचारी, चार रसोइया, चार सेवाकर्ता, दो सुरक्षाकर्मी, लेखाकार व प्रबंधक शामिल हैं। 50 फीसद से ज्यादा रकम इन्हीं के वेतन पर खर्च होती है।

स्थानीय कर्मचारियों का कहना है कि वह कई बार सीएमओ को चिकित्सा सुविधा के लिये शिकायत की जा चुकी हैं लेकिन, सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने बताया कि यदि समाजसेवियों का अपेक्षा के अनुरूप सहयोग मिल जाए तो सारी समस्याओं का अंत हो जाए। 

इनका कहना है...
जिला समाज कल्याण अधिकारी नगेंद्रपाल सिंह का कहना है कि जांच में सामने आया कि आश्रम में 70 बुजुर्ग हैं, रिकॉर्ड में 103 दर्ज हैं। रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है। मैं खुद भी जल्द आश्रम का निरीक्षण करूंगा।

 

 निहत्थे किसानों पर लाठीचार्ज कर सरकार ने दिया किसान विरोधी मानसिकता का परिचयःअर्जुन ठाकुर
अलीगढ़। 17 नवम्बर को उन्नाव में अपनी जमीन का उचित मुआवजा मांग रहे किसानों पर लाठी चार्ज करके योगी सरकार ने अपना किसान विरोधी चरित्र सबको दिखा दिया है।इस सरकार में किसान त्राहि-त्राहि मचा रहा है।सरकार प्रशासन के बल पर किसानों की जमीनों को बलपूर्वक हथियाना चाहती है और अगर किसान अपने जमीनों का वाजिब मुआवजा चाहता है

तो किसान विरोधी सरकार निहत्थे किसानों पर लाठीचार्ज करवाती है।इस घटना से पूरा देश शर्मसार हो गया है।किसान इसका जवाब आने वाले 2022 के चुनाव में जरूर देगा।इस सरकार पर उपलब्धि के नाम पर सिर्फ नाकामियां और अत्याचार ही है।पिछले ढाई साल से यह पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के किए गए कार्यों का ही उद्घाटन कर रही है,जिनका पूर्व में भी उद्घाटन हो चुका है।

मैं सरकार से पूछना चाहता हूं कि अपनी जमीनों का उचित मुआवजा मांगना किस अपराध की श्रेणी में आता है।मैं मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड का निवर्तमान जिला अध्यक्ष होने के नाते इस घटना की तीव्र भत्र्सना करता हूं तथा सरकार से मांग करता हूं कि दोषी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर देना चाहिए।

किसानों की उचित मांग पर सुनवाई की जाए 
निवर्तमान महानगर महासचिव, जिला मीडिया प्रभारी, इंजी आगा युनुस ने कहा कि किसानों पर उन्नाव मे लाठीचार्ज पुलिस द्वारा मात्र अपनी बेशकीमती जमीन का उचित मुआवजा व न्याय की मांग करने पर अतिनिंदनीय है।

संवेदनहीनता ऐसी कि जमीन पर गिरे देश के अन्नदाता को पुलिस लाठी मार रही है। किसानो के मुताबिक यूपीएसडीआईसी बिना नए उचित दर के साथ मुआवजे को भुगतान किए बिना ही जमीन का अधिग्रहण कर रही है।किसान काफी समय से आंदोलन व धरना दे रहे है । उन्नाव के बाद गोंडा मे भी किसान जमीन का उचित मुआवजा पाए बिना ही सरकारी अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन पर आ गया है।

सरकार से मांग है कि किसानों की उचित मांग पर सुनवाई की जाए और तनाव खत्म किया जाए ।

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