आरिफ खान केरल के राज्यपाल नियुक्त होने से अमुवि में खुशी की लहर

आरिफ खान केरल के राज्यपाल नियुक्त होने से अमुवि में खुशी की लहर

अलीगढ़,उ.प्र.। कांग्रेस से दो बार व जनता दल और बसपा से एक-एक बार लोकसभा का सदस्य रह चुके आरिफ मोहम्मद खान को रविवार को केरल का राज्यपालनियुक्त किया गया। राजनीतिक और सामाजिक मामले के जानकार और एक वक्त मेंभाजपा के सदस्य रहे आरिफ मोहम्मद खान ने 2004 में पार्टी का हाथ तो थामाथा, लेकिन तीन साल बाद ही साल 2007 में भाजपा के साथ-साथ उन्होंने संसदीयराजनीति से भी दूरी बनाने का फैसला ले लिया था।

केरल के नवनियुक्त राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के अलीगढ़ से बेहद पुराने औरमजबूत संबंध रहे हैं। छात्र जीवन में वे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालयछात्र संघ के सचिव और अध्यक्ष रह चुके हैं। वे 1972 - 73 मेंविश्वविद्यालय के छात्र संघ के सचिव चुने गए थे और अगले साल 1974 में
अध्यक्ष निर्वाचित हुए।राजनीति में पहचान के साथ-साथ उनके निजी जीवन में भी अलीगढ़ का बहुत बड़ायोगदान रहा है। उनकी पत्नी रेशमा भी एएमयू की छात्रा रह चुकी हैं। आरिफ मोहम्मद खान एएमयू के विधि विभाग के छात्र रहे हैं और उनकी पत्नी रेशमाभी इसी विभाग की छात्रा थीं।1972 में एक एक्ट के माध्यम से एएएमयू का अल्पसंख्यक स्वरूप खत्म कर दिया
गया था। इसके विरोध में आरिफ मोहम्मद खान के नेतृत्व में जबरदस्त आंदोलनहुआ था। एएमयू के इतिहास के बड़े आंदोलनों में से एक का नेतृत्व आरिफमोहम्मद खान ने किया था।


अब उन्हें केरल के राज्यपाल के तौर पर नियुक्ति किये जाने के बाद अलीगढ़मुस्लिम विश्वविद्यालय में भी खुशी का माहौल है। वहीं रविवार को हुए एलानके बाद आरिफ खान ने कहा, यह सेवा करने का बेहतरीन अवसर है। मुझे भारतजैसे देश में पैदा होने का सौभाग्य मिला जो इतना विशाल है और विविधताओंसे भरा हुआ है। यह मेरे लिए भारत के इस हिस्से को जानने का एक शानदारअवसर है। जो भारत की सीमा बनाता है और इसे भगवान का अपना देश कहा जाता है।
 

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