भाजपा सरकार के सहारे पार लगेगी राजकुमार सहयोगी की नैया

भाजपा सरकार के सहारे पार लगेगी राजकुमार सहयोगी की नैया

अलीगढ़,उ.प्र.।

एक साल से जमीन तैयार कर रहे बंटी ने गांव-गांव फहरा रखा परचम पिता की तैयार जमीन और संगठन के सहारे मैदान में डटे हुए हैं उमेश लोकदल के वोट और चै.सुनील सिंह के प्रभाव का सहारा मुकेश को मिनी छपरौली के नाम से विख्यात इगलास विधानसभा सीट के चुनावी इतिहास में यह पहला मौका है, जब किसान नेता स्व.चै.चरण सिंह की पार्टी या उनका परिवार चुनाव से अलग है। ऐसे में चै.चरण सिंह परिवार और राष्ट्रीय लोकदल का परंपरागत वोटर नाराज है।

वह अभी तक तय नहीं कर पा रहा कि वोट कहां देना है। इसी नाराज वोटर को साधने के प्रयास में प्रमुख चारों प्रत्याशी और उनकी पार्टियों के नेता चुनाव प्रचार में एड़ी चोटी का जोर लगाए रहे हैं। सर्वाधिक ताकत व प्रतिष्ठा भाजपा संगठन व सरकार ने इस सीट पर जीत की वापसी के लिए झोंकी है।

खुद मुख्यमंत्री का दो बार इगलास में आना और पश्चिमी यूपी के तमाम जाट नेताओं का यहां डेरा डाले रहना इस बात की गवाही दे रहा है। कमोबेश यही हालात बसपा, कांग्रेस व लोकदल संगठन ने बनाए रखे। मगर अब परिणाम का समय नजदीक आ गया है। नाराज वोटर चुप्पी साधे हुए है। दो दिन बाद यानि मतदान के दिन जब यह चुप्पी टूटेगी, उसी दिन तस्वीर साफ होगी।
 

भाजपा

 केंद्र व प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी के निवर्तमान विधायक के सांसद बनने के बाद खाली हुई इस सीट पर पार्टी ने लंबे समय से जिला संगठन व आरएसएस से जुड़े कार्यकर्ता राजकुमार सहयोगी को टिकट दिया है। हालांकि इगलास से सहयोगी का सीधा सीधा कोई नाता नहीं। मगर वह लंबे समय से टिकट के लिए प्रयासरत थे। टिकट मिलने के बाद से वह संगठन और सरकार के दम पर चुनाव मैदान में हैं। जनता के बीच सरकारी की योजनाओं, भाजपा के राष्ट्र प्रेम से जुड़े मुद्दे आदि को लेकर जा रहे हैं।

मगर खुद प्रत्याशी से लेकर पूरे संगठन को यह डर सताया हुआ है कि इस सीट पर सबसे बड़ा वोटर तबका चैधरी रालोद प्रत्याशी का परचा निरस्त होने से खफा है। इसलिए चैधरियों को मनाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाया जा रहा है। हालात यह हैं कि चुनाव से पहले सीएम योगी इगलास में आए और अंतिम दौर में गोंडा में आए। दोनों जगहों पर जाट नेता राजा महेंद्र प्रताप के नाम पर जाटों को रिझाने का प्रयास किया।

इसके अलावा प्रदेश के दूसरे बड़े जाट मंत्री सुरेश राणा, चै.लक्ष्मीनारायण, चै.उदयभान सिंह सहित पश्चिमी यूपी के तमाम जाट व अन्य बिरादरियों के नेता डेरा डाले रहे। अन्य बिरादरियों के नेता अपनी-अपनी बिरादरी के वोटरों में पैंठ बनाने का प्रयास करके गए हैं। सत्ता के आत्मविश्वास के बावजूद पार्टी नेताओं की गतिविधियां उनके भय की गवाही दे रही हैं और डर यही है कि रालोद का जाट वोट कहीं खेल न बिगाड़ दे।
 

बसपा
इस सीट पर अब तक सिर्फ एक बार उप चुनाव जीतने वाली पार्टी ने सबसे पहले अभय कुमार बंटी को टिकट दिया। वह पिछले लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय हैं और गांव-गांव में पैंठ बनाए हुए हैं। पार्टी के परंपरागत वोट के अलावा मुस्लिम व रालोद के वोट पर सैंधमारी के प्रयास में प्रत्याशी व पूरी पार्टी लगी हुई है। अंदरखाने देखा भी जा रहा है कि रालोद के स्थानीय नेता इनके साथ घूम रहे हैं। रालोद के नाराज वोट को खुद के पक्ष में साधने के लिए आगरा-अलीगढ़ मंडल के संगठन के समस्त नेता व पूर्व जनप्रतिनिधि यहां डेरा डाले रहे हैं। साथ में प्रदेशाध्यक्ष मुनकाद अली ने मुस्लिम वोटों के बीच रहकर पार्टी के लिए प्रचार किया है। पार्टी का मानना है कि रालोद का नाराज वोट जितना अधिक से अधिक हमें मिल जाएगा, उतना ही हमें लाभ मिलेगा।
 

कांग्रेस
पूर्व में रालोद से विधायक रहे त्रिलोकीराम दिवाकर के बेटे उमेश दिवाकर को यहां से टिकट दिया गया है। वह अपने पिता के पांच साल के वोटर से संबंधों, खुद की बिरादरी, पार्टी के परंपरागत वोट के सहारे मैदान में हैं। उनकी पार्टी के स्थानीय नेता के अलावा पश्चिमी यूपी के जाट नेता पंकज मलिक आदि ने यहां डेरा डालकर पूरे समय रालोद के नाराज वोट को मनाने का प्रयास किया है। पार्टी के स्थानीय बड़े नेता पूर्व सांसद चै.बिजेंद्र सिंह की यह परंपरागत सीट रही है। उनका इस चुनाव से दूर रहना भी तरह-तरह की चर्चाएं हैं। चुनाव प्रचार के आखिरी दिन पार्टी प्रदेशाध्यक्ष अजय सिंह लल्लू ने भी यहां मुस्लिम बाहुल्य इलाके में जनसभा कर मुस्लिम वोटरों को साधने का प्रयास किया है।
 

लोकदल
किसी जमाने में जिले की राजनीति के केंद्र रहे स्व.चै.राजेंद्र सिंह के वंशज चै.सुनील सिंह की यह कर्मस्थली है। उनके पिता यहां से लंबे समय विधायक रहे। इस क्षेत्र में उनका खासा महत्व माना जाता है। उन्होंने अपनी पार्टी से मुकेश खटीक को प्रत्याशी बनाया है। मुकेश खटीक के भाई गुरविंदर पिछला चुनाव सपा-कांग्रेस गठबंधन से इसी सीट पर लड़े थे। इनकी पार्टी भी रालोद प्रत्याशी के न होने का फायदा खुद को मानकर काम कर रही है। सुनील सिंह ने एड़ी चोटी का जोर रालोद के नाराज वोट को अपना बनाने में लगाया है।
 

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