कालीदह पोखर पर भू-मािफयाओं के आगे बौना साबित हो रहा नगर निगम

कालीदह पोखर पर भू-मािफयाओं के आगे बौना साबित हो रहा नगर निगम

अलीगढ़।

नगर निगम द्वारा पोखरों और तालाबों को बचाने की मुहिम छेड़ी गई है,वह एकमात्र मीडिया की सुर्खियों में छाने और जनता को गुमराह करने का अच्छा फार्मूला निकाला है।  लेकिन भू-मािफयाओं के आगे नगर निगम बौना साबित हो रहा है, और भू-माफिया दिन-रात कालीदह पर अपना अवैध कब्जा जमाते हुये रातांे-रात दीवारें खड़ी कराकर ऐसा डेन्ट-पेन्ट कर देते हैं

जैसे कि काफी पुरानी दीवार लगी हुई है। नगर निगम की उदासीनता के चलते भू-माफियाओं की बल्ले-बल्ले हो रही है। जानकारों के अनुसार कालीदह पोखर 190 बीघा जमीन में बनी हुई थी,जबकि वर्तमान में भू-माफियाओं ने कालीदह को 50 बीघा के दायरे में भी नहीं छोड़ा है। जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स￙ाा में आते ही सरकारी संप￙िायों पर कब्जा किए बैठे लोगों के खिलाफ पूरे ￧देश में कार्रवाई व भूमि को कब्जामु¦ करने के निर्देश दिए थे। ये निर्देश हवा हवाई साबित होते जा रहे हैं। या ये कहें कि स￙ाा में काबिज होने के नशे में लिया गया निर्णय।

हालांकि शुरूआती दौर में एंटी भूमाफियों के के खिलाफ अभियान जोरों शोरों से चलाया गया था। हैरानी की बात तो यह है कि करीब चार माह हो गए हैं, अभी तक भू माफिया नगर निगम के इस चाबुक से बचे नजर आ रहे हैं।

भूमाफिया कालीदह पोखर पर रात में मि↑ी भराव कर अवैध कब्जा कर रहे हैं, लेकिन नगर निगम अधिकारियों को इसकी खबर तक नहीं लगी।कालातीत नगर पालिका परिषद से लेकर नगर निगम तक संप￙िा के मामले में अलीगढ़ का ￧देश में पहला स्थान था, लेकिन अपनों के आशीर्वाद के चलते पोखरों पर कब्जे होते चले गए और आज पोखरों में मोहल्ले एवं कツलोनियां बनी खड़ी हैं। इसके कारण नगर निगम से जहां पोखरों की जमीन निकल गई, वहीं जलभराव की समस्या भी उत्पन्न हो गई।

कालीदह पोखर पर काका बिल्ड़िगं मैटेरियल के बराबर में हरियोम ने 40 वर्गगज जमीन खरीदकर 4 सौ वर्गगज पर कर लिया अवैध कब्जा।विगत दिनों कालीदह का सिकुड़ता जा रहा दायरा समाचार प्रकाशित होने के बाद नगर निगम अधिकारियों की नींद खुली तो कालीदह पोखर की ओर दौड़ पड़े औश्र जहां पोखर पर कोई अनाधिकृत कब्जा नहीं हुआ है,

उस स्थान पर पोखर की सफाई नगर निगम करा रहा है, और पिकनिक पाइंट की तैयारी करने में लगा हुआ है, जबकि पला रेलवे फाटक पर रातों-रात भू-माफियाओं ने नगर निगम के अधिकारियों को ठेंगा दिखाते हुये एक मकान की अवैध रूप से बाउण्डᆰीवाल कराकर मकान तैयार करा दिया।

दर्जनों मकान कालीदह पोखर की जमीन पर निर्माण करा दिये गये हैं, जिसमें भू-माफियाओं ने नगर निगम के कुछ अधिकारी व कर्मचरियों से सांठ-गांठ कर अपना अधिपत्य जमा लिया है। भू-माफियाओं के अवैध निर्माणों की कोई जानकारी नगर निगम प्रशासन को नहीं हैं, जानेते हुये भी कुम्भकर्णीय नींद में सो रहा है।

नगर निगम के अधिकारी जनता के बीच अपनी साफ-सुथरी छवि को एकमात्र दिखावा करने में लगे हुये हैं। जबकि भू-माफियाओं  की पौ बारह हो रही है। एक प्लाॅट बेचकर रातों-रात भ-माफिया लखपति बन जाते हैं। वहीं नगर निगम द्वारा पोखरों में जलसंचय बढ़ाने की बात की जा रही है, लेकिन भू-माफिया जलसंचय कहां से बढ़ जाने देगें जब पोखरों का दायरा ही सिकुड़ जाएगा तो जलसंचय कहां से होगा। 

नगर निगम सो रहा कुम्भकर्णीय नींद कालीदह पोखर पर भू-माफिया कर रहे कब्जा,सिकुड़ रहा कालीदह का दायरासु￧ीम कोर्ट के आदेश हैं कि महानगरों में जिस स्थान पर जलजमाव होता है, उस पोखर या तालाब का स्वरूप न बदला जाए, भले ही वह संप￙िा निजी क्यों न हो। कालीदह पोखर अवैध कब्जों के चलते लगातार सिकुड़ती जा रही है। हद तो यह हो गई कि पोखर में रात में लगातार मि↑ी का भराव हो रहा है। लगभग 2000 मीटर पोखर पर मि↑ी का भराव हो गया। मगर नगर निगम के अफसरों को इसकी भनक तक नहीं लगी।

नगर निगम की जमीनों को कब्जामु¦ करने को तीन माह पूर्व चलाए गए अभियान की हवा निकल पड़ी है। सीएम योगी के आदेशों के बावजूद भी सरकारी भूमि पर कब्जा करने वालों के खिलाफ चाबुक शांत पड़ा है। इसे चाहे 2019 लोकसभा चुनाव की नजरों से देखें या फिर नगर निगम के अधिकारियों की लापरवाही। नगर निगम के 126 तालाबों में से 71 तालाब विवादित हैं, जिन पर अवैध कब्जा काबिज है।

जबकि 55 तालाब ऐसे हैं, जिन पर कोई विवाद नहीं है। लेकिन आज तक भी इनका न तो सौंदर्यकरण हो सका है और न ही रखरखाव ठीक ￧कार से हो पा रहा है। कब्जाधारियों से सरकारी संप￙िा को छुड़ाने का अभियान सुस्त पड़ गया है। सूत्रों की माने तो छोटी सरकार यानि निगम के मेयर वोट बचाने व भाजपा के मिशन 2019 को ध्यान में रखते हुए कार्य कर रहे हैं।

नगर निगम लापरवाह बना हुआ है और शहर में तालाबों व पोखरों की संख्या तेजी से घट रही है। पूर्व में शासन ने तालाबों और पोखरों के संरक्षण के लिए ￧देश के सभी मंडलायु¦ व जिलाधिकारियों को अवैध कब्जे हटाने और चारगाहों पर अवैध कब्जे की ￧ारंभिक रिपोर्ट मांगी थी। लेकिन ￧शासन आज तक किसी भी तालाब व पोखर पर कब्जा नहीं हटा पाया है।

तालाबों की संख्या लगातार घट रही है और ये आबादी में तब्दील हो जा रहे हैं। जिनमें से कुछ पर न्यायालय में विवाद चल रहा है और खाली पडे तालाबों का ￧शासन न तो सौंदर्यकरण करा पा रहा है और न ही इनका रख रखाव हो रहा है।

बता दें कि नगर निगम द्वारा जारी किए गए तालाबों की सूची में सबसे ज्यादा तादाद अवैध कब्जाधारियों की है। कब्जाधारियों पर किस ￧कार हथौड़ा चलाता है ओर राजस्व में किस ￧कार की बढो￙ारी होती है। यह साफ नजर नहीं आ रहा है।

अवैध निर्माण हो या फिर सरकारी भूमि पर कार्रवाई के लिए शासन ￧शासन को सख्त होना पड़ता है, लेकिन जनपद में किसी भी विभाग की स्थिति देख ले तो सभी जगह ढाक के तीन पात ही नजर आएंगे। सूत्र बताते हैं कि विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे काबिज हैं।

चाहे जो भी हो, वह ￧शासन शासन के हिसाब से कार्य नहीं कर पा रहा है। ऐसे में सवालिया निशान उठना लाजिमी है। भाजपा की छोटी सरकार यानि नगर निगम के मेयर को अपना वोट बैंक बचाकर व 2019 का ध्यान में रखते हुए कार्य करना पड़ रहा है। ऐसे में भू माफियाओं के हौंसलें भी बुलंद हो गए हैं। सरकारी भूमि को कब्जामु¦ करने को अभियान न चला तो धीरे धीरे सरकारी संप￙िायों पर कब्जा हो जाएगा।

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