जब जब होई धरम की हानि, बाढहि असुर अधम अभिमानी

जब जब होई धरम की हानि, बाढहि असुर अधम अभिमानी

जब जब होई धरम की हानि, बाढहि असुर अधम अभिमानि

 

           स्वतंत्र प्रभात

रिपोर्ट अर्जुन शुक्ल सागर                 

अमेठी जिले के विकास खन्ड भेटुआ के सरूवांवा गाव में चल रही सात दिवसीय सगींत मय श्रीमद भागवत के चौथे दिन कथा वाचक आचार्य वीरेन्द्र त्रिपाठी ने ने भक्तो को कथा अमृत रसपान कराते हुये कहा की जब होई धरम की हानि बढ़हि असुर अधम अभिमानी। तब तब धर प्रभु विविध शरीरा हरहि दयानिधि सज्जन पीरा। उक्त बातें माल का भक्तो के समक्ष रखी।                         

                विकासखंड भेटुआ के सरूवावां ग्राम के माल का पुरवा में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास श्री त्रिपाठी ने भक्तो को बताया कि जब कंस के अत्याचार से मथुरा वासी पीड़ित हो गए थे तब भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का अंत करने के लिए जन्म लिया, और उसका वध करके वासुदेव जी को उसके बंधन से मुक्त कराया।

स्थिति कितनी भी विपरीत क्यो न हो लेकिन सत्य मार्ग का अनुसरण करने वाले कभी भी दुःखी नही होते। कथा समापन के बाद यजमान विश्वनाथ तिवारी व उनकी पत्नी गया देवी ने भगवान की आरती कर कथा सुनने आये श्रद्धालुओ का स्वागत किया।

इस मौके पर देवकांत तिवारी, जगतनारायण मिश्र,जवाहरलाल जायसवाल,श्रीकांत,पीयूष,संजय कुमार,ओमप्रकाश आदि के साथ सैकड़ो लोग मौजूद रहे।

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