अटरिया नयागांव ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान व सचिव पर आवास, के नाम पर सुविधा शुल्क लेने और विकाश कार्यो मे भ्रष्टाचार का लागाया आरोप

अटरिया नयागांव ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान व सचिव पर आवास, के नाम पर सुविधा शुल्क लेने और विकाश कार्यो मे भ्रष्टाचार का लागाया आरोप

अटरिया नयागांव ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान व सचिव पर आवास, के नाम पर सुविधा शुल्क लेने और विकाश कार्यो मे भ्रष्टाचार का लागाया आरोप


 : कई हफ्तों पहले  ग्राम पंचायत की एडीओ बिसवां एडीओ सिधौली की अध्यक्षता में हुई थी जांच नतीजा अभी भी शून्य

: ब्लाक स्तरीय हुई जांच ग्रामीण कर रहे न्याय का इंतजार

: कही संबंधित अधिकारी कर तो नही रहे मामले को दबाने का प्रयास

 संवाददाता नरेश गुप्ता


अटरिया सिधौली (सीतापुर)।एक तरफ जहाँ देश व प्रदेश की सरकार गरीब आवाम को प्रधानमंत्री आवास के नाम पर पक्का आशियाना मुहैया कराकर उन्हें हर सम्भव लाभ देने की बात करती है वही दूसरी तरफ इस योजना को अमलीजामा पहनाने में लगे अधिकारी व कर्मचारियों की लापरवाही से इसपर ग्रहण लगता दिखाई दे रहा।क्योकि मुफ्त में मिलने वाली आवास व शौचालय के लिए भोली भाली जनता से जमकर धन उगाही की जा रही है।
मामला यूपी के  सीतापुर जिले के विकास खण्ड सिधौली के क्षेत्र ग्राम पंचायत  नयागांव का है।जहाँ पर प्रधानमंत्री आवास व शौचालय चयन में जमकर धन उगाही करने की बात सामने आ रही है।इस गाँव के निवासी  ग्रामीडो ने ग्राम प्रधान व ग्राम सचिव पर आरोप लगाते हुए  ऑनलाइन शिकायत देकर जाँच की माँग  शिकायत के निस्तारण हेतु ग्राम पंचायत में एडीओ बिसवां के साथ एडीओ सिधौली की टीम ग्राम पंचायत के शौचालय एवं आवासों की मौखिक पड़ताल की बहुत ही कम मात्रा में शौचालय इस्तेमाल लायक पाए गए वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना में ग्राम प्रधान पर प्रति आवास ₹10000 धन उगाही का आरोप लगाया। 
ग्रामीणों ने दिए प्रार्थना पत्र के माध्यम से बताया कि गाँव मे जितने भी आवास व शौचालय चयनित है उनमें अधिकांश लाभार्थियो से प्रधान व सचिव ने 2 हजार से लेकर 10 हजार रुपये तक सुविधा शुल्क वसूल किये है।इनकी(प्रधान और सचिव) मनमानी का अंदाज़ा आप इसी से लगा सकते है कि जिनका सुविधा शुल्क मिलता है उन्ही का नाम आवास और शौचालय की सूची में अंकित किया जाता है।और जो रुपये नही दे पाता है उसका नाम सूची की वेटिंग लिस्ट में है कहकर टाल दिया जाता है।इस गाँव के आवास की सूची में पात्रता की सत्यता इसी से लगा सकते है कि गरीब भोली भाली जनता को बिना सुविधा शुल्क आवास न देते हुए अधिकारियों सहित खुद की जेबें गर्म करते रहे हैं
इस सम्बंध में ग्राम प्रधान  रामसरन यादव से बात करने की कोशिस की गई तो वह मीडिया के सवालों के जवाब देने से बचते नजर आए।जबकि ग्राम पंचायत अधिकारी ने कहा कि यह आरोप पूरी तरह बेबुनियाद है।किसी से कोई शुल्क नही लिया गया
फिलहाल ग्रामीणों ने न्याय की आस में सक्षम  विभागीय अधिकारी को ऑनलाइन प्रार्थनापत्र देकर जांच की माँग की है अब देखना यह है कि उचित जाँचकर ठोस कार्यवाही होती है या फिर खानापूर्ति करके ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।

नयागांव  ग्रामीणों ने लगाया प्रधान पर शौचालय निर्माण में  भ्रष्टाचार का आरोप

 

शौचालय बनवाने में मानक कों रखा गया ताक पर विकास खंड सिधौली के ग्राम पंचायत नयागांव   का है मामला ग्राम प्रधान द्वारा बनाए गए स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय का है उच्चाधिकारियों को गुमराह करते हुए  । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की महत्वाकांक्षी योजना ‘स्वच्छ भारत मिशन( शौचालय)’ योजना में भ्रष्टाचार की सीतापुर सिधौली मे खूब रंग दिखाया है और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानों की जेब भरने का शायद एक अच्छा माध्यम  शौचालय योजना’ बनती दिख रही है। इस योजना के तहत बनाये गए शौचालयों में मानकों के साथ पूरी निर्भीकता के साथ खूब खिलवाड़ किया गया है और इसमें ग्राम विकास अधिकारी ने भी पूरी सहभागिता करते हुए ऐसे शौचालयों को तैयार करवा कर उपयोग के लिए छोड़ दिए जो भविष्य में देश की जनता को उसी स्थान पर लाकर छोड़ देंगे जिससे बचाने के लिए प्रधानमंत्री  मोदी जी,जी-जान से जुटे हैं। कहने का मतलब यह है कि
एक तो ग्राम पंचायतों में 90 फ़ीसदी शौचालय उपयोग नहीं किए जा रहे हैं कारण योजना के तहत बनाए गए शौचालय पूर्ण रूप से बने ही नहीं है कहीं दरवाजे लगे हैं छत नहीं हैं तो किसी में छत है किंतु टैंक नहीं बनाए गए हैं कहीं टैंक बने हैं तो शौचालय की सीट नहीं रखी गई है इतना ही नहीं किसी किसी शौचालय की दीवारें भी गिर चुकी हैं किंतु योजना के तहत शौचालय सरकारी कागजों पर तैयार हो चुके हैं और उपयोग भी किए जा रहे हैं 10 फ़ीसदी बने शौचालयों की भविष्य की हकीकत शायद कुछ इस प्रकार होगी जो शौचालय ग्रामीण क्षेत्र की जनता उपयोग कर रही है उनके दोनों टैंकों  में मल प्रवाहित हो रहा है। कुछ वर्षों बाद जब दोनों टैंक एक साथ भर जायेंगे तो ऐसे में या तो शौचालयों का उपयोग बन्द करना पड़ेगा या टैंकों में एकत्र हुए मैले को बिना जैविक खाद के बने ही फेंकने की मजबूरी होगी। जबकि स्वच्छ शौचालय में दो टैंक इस लिए बनाये गए हैं कि पहले एक टैंक का उपयोग हो जब वह भर जाये तो दूसरा टैंक खोल दिया जाये और जब पहले वाले टैंक में एकत्र हुआ मल जैविक खाद का रूप ले ले तो उसे खेतिहर भूमि को उपजाऊ बनाने के काम में लाया जाये। लेकिन जागरूकता की कमी व ग्राम प्रधान की लापरवाही के चलते ग्रामीणों को शौचालय उपयोग की सही जानकारी नहीं दी गई है जनपद सीतापुर के विकास खण्ड सिधौली के ग्राम पंचायत नयागांव व उसके अन्तर्गत आने वाले  कई गांवों में ग्राम प्रधान ने  खूब मनमानी की जो पात्र नहीं है शौचालय बनवाए लेकिन उनका उपयोग करने की तरीके किसी को नहीं बताये साथ ही शौचालय निर्माण में ग्राम प्रधान रामसरन  यादव ने खूब धांधली करवाई। मानकों के साथ जमकर खिलवाड़ किया गया
 जानकारी के लिए आपको बता दें शौचालयों के नजारा ग्राम गढ़ी गांव  से पता चलता है कि बहुत से लोगों को मिला ही नही है जिनको मिला भी है तो उनका उपयोग ही नहीं करते हैं। गाँव में रहते ही नही है ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता लाने की जरूरत है। और गरीब को ही मिले जो पात्र हो जिस के पास चार पहिया वाहन य  टेैक्कटर बंदूक पक्के मकान में तीन कमरें  हो उनको इस का लाभ  मिलना चाहिए ऐसे में सवाल यह उठता है कि ऐसे भ्रष्टाचार ग्राम प्रधान के खिलाफ प्रशासन कार्रवाई करने में क्यों हिचकिचाहट महसूस करती है इससे साफ दिखता है की जो ग्राम प्रधान गांव में धन उगाही करता है उसमें ब्लॉक संबंधी समस्त अधिकारियों का हिस्सा लगता है अगर ऐसा ही चलता रहा तो देश को भ्रष्टाचार मे लिप्त ब्लॉक कर्मचारी 
बेच खाएंगे

नयागांव ग्राम पंचायत  में सिर्फ कागजों पर बन रही सड़क, नाली और खड़ंजा, जमीन पर कुछ नहीं


''पेपर में सब बना है, जमीन पर कुछ नहीं।'' यह बात कहकर छोटेलाल ठहाके लगाकर हंस देते हैं। उनकी इस बात पर उनके साथ बैठे करीब 20 गांव वाले भी हंसने लगते हैं
 छोटेलाल अपने गांव के बाहर पीपल के पेड़ के  बने चबूतरे पर बैठे हैं। क्‍योंकि यह सर्दी  का मौसम है ऐसे में दोपहर का वक्‍त काटने के लिए गांव के दूसरे लोग भी आग के पास जमावड़ा लगाए हैं। कोई आग के समक्ष हाथ  किए हैं तो कोई जलने के लिए लकड़ियों के टुकड़े कर रहा है तो कोई खैनी पीट रहा है। स्वतंत्र प्रभात की टीम जब इनके बीच पहुंची तो यह लोग जरा सचेत हुए। आपस में कुछ बात करने के बाद टीम से परिचय लिया।

परिचय अदान प्रदान के बाद जब स्वतंत्र प्रभात  टीम की ओर से उनसे पूछा जाता है कि आपके गांव में ' दिनेश सिंह के घर से लालजी के घर तक  नाली मरम्मत कार्य हुआ है न?' इसी सवाल के जवाब मे छोटे लाल कहते हैं- ''पेपर में सब बना है, जमीन पर कुछ नहीं।'' और इसी के साथ माहौल में हंसी गूंज उठती है।

यह कहानी है उत्‍तर प्रदेश के सीतापुर जिले की नयागांव ग्राम पंचायत की। हाल के दिनों में गांव वालों की ओर से उनकी पंचायत में घोटाले को लेकर आवाज उठाई गई है। । शिकायत के आधार पर  सक्षम अधिकारी  ने मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं जिसकी ब्लॉक स्तर पर जांच की गई जांच में आए एडीओ बिसवां एवं सिधौली एडीओ की टीम द्वारा की गई। चर्चा में रही यह खबर तमाम स्‍थानीय अखबारों में छपी होगी, ज‍िसके बाद स्वतंत्र प्रभात की टीम इस गांव पहुंची। 

ऐसा नहीं है कि नयागांव एकलौती ग्राम पंचायत है जहां भ्रष्‍टाचार का मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत में भ्रष्‍टाचार के मामले अक्‍सर सामने आते रहते हैं। गूगल पर 'ग्राम पंचायत' लिखते ही भ्रष्‍टाचार की खबरें देखने को मिलती हैं। अखबारों में भी एक-दो कॉलम में ऐसी खबरें छपा ही करती हैं। ऐसे में देश भर की ग्राम पंचायतों से आ रही इन खबरों से भष्‍टाचार का आंकलन लगाने से पहले यह जान लेना चाहिए कि देश में कितनी पंचायतें हैं।

मिली जानकारी के अनुसार पंचायतों का सशक्तिकरण 90 के दशक में हुआ था। पंचायती राज व्यवस्था का निर्माण स्थानीय विकास को बल दिलाने के लिए किया गया था। भारत में 2.51 लाख पंचायतें हैं, जिनमें 2.39 लाख ग्राम पंचायतें हैं। इसमें 6904 ब्लॉक पंचायतें और 589 जिला पंचायतें शामिल हैं। देश में 29 लाख से अधिक पंचायत प्रतिनिधि हैं। यह आंकड़े इस बात को सोचने पर मजबूर करते हैं कि ग्राम पंचायत में हो रहे भ्रष्‍टाचार की खबरों में अगर जरा भी सत्‍यता है तो यह कितना बड़ा घालमेल हो सकता है।

जानकारों के अनुसार अगर पंचायतों को दिए जाने वाले फंड की बात करें तो 2015 में 14वीं वित्त आयोग की सिफारिश के अनुसार अगले पांच वर्षो तक पंचायतों को तीन गुना अधिक फंड दिया जाना था। यानि पंचायतों को मिलने वाली राशि 63,051 करोड़ रुपए (13.3 बिलियन डॉलर) से बढ़ कर 200,292 करोड़ (31.2 बिलियन डॉलर) हो गई होगी। इस आंकड़े से साफ होता है कि जहां एक ओर इस हिसाब का पैसा ग्रामीण भारत के लिए फ्लो हो रहा है, वहीं अब भी गांव बदहाल ही पड़े हैं। इसके पीछे की एक वजह ग्राम पंचायतों में फैला भ्रष्‍टाचार ही है।

फिलहाल बात करते हैं सिधौली की नयागांव ग्राम पंचायत की। यहां के रहने वाले ग्रामीण बताते हैं, ''गांव के ही कुमार के घर से रमेश के घर नाली मरम्मत कार्य दिखाया गया है। इसके लिए अलग अलग मदों में पैसे भी निकाले गए हैं। आप खुद चलकर देखें आपको कहीं मरम्मत कार्य नहीं मिलेगा। मेरा घर भी इस बीच में पड़ता है। मेरे घर तो नाली भी नहीं है। न जाने कहां मरम्मत कार्य कराया गया। छोटेलाल आगे कहते हैं, ''कागजों का पेट भरा है, लेकिन लोगों का नहीं भरा। कागजों में काम हुए हैं, लेकिन जमीन पर काम नहीं हुए। कई रोड, नाली, खड़ंजा तो पेपर में बन गए हैं, असल में कहां हैं हमें पता ही नहीं। इन्‍हीं सब शिकायतों को लेकर गांव वालों ने संबंधित विभाग के पास शिकायत की है।''
कागजों में हुए काम की बात करें तो गांव के ही ,,,,,,, मुन्ना के घर से पुत्ती लाल के घर तक नाली  निर्माण का कार्य होना दिखाया गया है। जब स्वतंत्र प्रभात की टीम छोटेलाल से मिली तो उन्‍हें इस बात की जानकारी ही नहीं थी। छोटेलाल घर के बाहर बनी कच्‍ची नाली को दिखाकर कहते हैं, ''यह मैंने अपने हाथों से बनाई है। आप आए हैं तो पता चला कि ऐसा कोई काम भी हुआ है।''

कुछ ऐसा ही हाल ,,,,,,,, चंद्र का पुत्र प्रसादी का भी है। रघुनाथ पुत्र रघुराई भी अपने घर के बाहर खुले में बहते पानी को दिखाकर कहते हैं, ''आप बता रहे हैं कागज में नाली बनना बताया गया है, कहां है नाली? हमारे घर का सारा पानी सड़क पर बह रहा है। कई बार प्रधान से बता भी चुके हैं, लेकिन कोई सुने तब तो।''

इस बारे में जब ग्राम प्रधान से फोन पर बात की गई तो उन्होंने कहा, ''गांव में कहां-कहां काम हुआ है इस बारे में पंचायत सेक्रेट्री ज्‍यादा अच्‍छे से बता पाएंगे। उनके पास लिख‍ित में सारी चीजें है। मैं क्‍या बताऊं की कहां काम हुआ है या कहां नहीं।'' जब पंचायत सेक्रेट्री से फोन पर बात करने की कोश‍िश की गई तो उनका नंबर स्‍विचऑफ बता रहा था।

ग्राम पंचायत और प्रधान के 20 काम पता हैं... अगर नहीं तो पढ़ लीजिए

यानि ग्राम पंचायतों में भ्रष्‍टाचार का मामला व्‍यापक है और इसे भी देश में फैले अन्‍य भ्रष्‍टाचार की तरह गंभीरता से लेनी की जरूरत है। क्‍योंकि जनगणना के मुताबिक भारत में कुल 597,464 गांव हैं। इनमें रहने वाले बहुत से लोगों को जीवन इस भ्रष्‍टाचार से सीधे तौर पर प्रभावित हो रहा है। करीब 69 फीसदी भारत अब भी ग्रामिण इलाकों में बसता है।

ऐसा नहीं है कि देश भर में हर जगह पंचायतें खराब काम ही कर रही हैं। देश भर के पंचायतों की बात करें तो केरल के ग्रामीण संस्थानों की स्थिति सबसे बेहतर है। पंचायती राज मंत्रालय द्वारा किए गए एक अध्ययन के मुताबिक- ''वित्त मामले में केरल पहले स्थान पर है, दायित्व एवं कार्यकर्ताओं के मामले में दूसरे स्थान पर और संरचना और कार्य बेहतर तरीके से करने में तीसरे स्थान पर है। केरल में पंचायतों के काम बेहद पारदर्शी हैं।'' हाल यह है कि राज्य ने अधिकतम कार्य पंचायत को सौंप रखा है। पंचायती राज मंत्रालय द्वारा किए गए अध्ययन के मुताबिक केरल के बाद, ग्रामीण संस्थानों की बेहतर स्थिति कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु की हैं।

अब तक तो जिला व प्रदेश स्तर पर बड़ी लूट के मामले सामने आया करते थे लेकिन अब सबसे निचले स्तर पर स्थित  ग्राम पंचायत विकास कार्यों के होटलों में क्या मौजूदा सरकार भी नोच घसओट कर रही है। अब तक कई गांवो  के ऐसे मामले सामने आ चुके हैं जिनमें शौचालय घोटाला, आवास घोटाला मुख्य रूप से होते थे  लेकिन इस बार ऐसा मामला सामने आया है जिसमें खड़न्जा, नाली निर्माण समेत अन्य योजनाओं में भी सरकारी धन की बड़े पैमाने पर लूट की गई है। घोटाले की शिकायत पर जांच करने गये एडीओ बिसवां एवं एडीओ सिधौली की संयुक्त टीम  के बुलाने पर  ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत अधिकारी मौके पर  पंहुचे।
मामला सिधौली विकास खण्ड के अन्तर्गत आने वाले ग्राम पंचायत नयागांव का है। इस गांव पंचायत वित्तीय वर्ष 2016-17 और 2017-18 से 2018-19 में ग्राम प्रधान रामसरन  यादव व ग्राम पंचायत अधिकारी  की मिली भगत से लाखों रूपये की लूट की गई। गांव के विकास के लिए चलाई जा रही लगभग हर योजना से लाखों रूपये निकाले गये लेकिन उनसे कोई कार्य नही कराया गया। सबसे ज्यादा लूट खड़न्जा लगवाने, नाली बनवाने तथा इंटर लांकिंग करवाने व अन्य कार्यां में की गई है। अरोप है कि पूर्व प्रधान द्वारा कराये गये कार्यां को दर्शा कर वर्तमान ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत अधिकारी ने पूरी धनराशि हजम कर ली। जांच अधिकारी  ने स्वीकार किया है कि बड़े पैमाने पर सरकारी धन का दुरूपयोग किया गया है। दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही की जा रही है।

अटरिया नयागांव ग्राम पंचायत  में अधूरे शौचालय खोल रहे स्वच्छ भारत अभियान की पोल


सिधौली विकास क्षेत्र के  नयागांव  ग्राम पंचायत में गांवों को खुले में शौच मुक्त करने के दावे हवाई साबित हो रहे हैं। क्षेत्र के  ग्राम गढ़ी गांव ग्राम पंचायत नयागांव में शौचालयों की स्थिति बहुत खराब है। अव्वल शौचालय आधे अधूरे पड़े हैं। एक-एक वर्ष हो चुके शौचालयों का निर्माण पूरा नहीं है। लाभार्थीयो को पैसा न देकर स्वयं ही शौचालय की दीवारें खड़ी कर शौचालय की मंजूर धनराशि गमन करने का आरोप लगाते हुए बताया के स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्राम में शौचालय निर्माण कार्य कराया गया जिसमें लाभार्थियों को योजना में मिलने वाली धनराशि ना देकर स्वयं ग्राम प्रधान रामसरन यादव द्वारा  ना ही टैंक बनाए गए ना तो सीट  रखी गई  और ना ही  छत  रखी गई  महज चार दीवार  खड़ी कर  दिखावे के लिए दरवाजे को  रखकर  योजना की धनराशि को  निकाल लिया गया  लाभार्थियों से जानकारी ली गई तो बताया  कि उन्हें  यह मालूम ही नहीं है  के  उनके शौचालय  कैसे  और कितने रूपों में बनवाए गए ग्राम प्रधान रामसरन यादव  ने  स्वयं आकर के बिना न्यू के दीवारें खड़ी करवाई और फोटो खींच  कर  चले गए  शौचालय के लिए  खड़ी दीवाने करीब एक से डेढ़ साल  पहले से  अभी तक  निर्माण कार्य के लिए तरस रही हैं आधे से ज्यादा शौचालय तो ध्वस्त हो चुके हैं जिन की दीवारें भी गिर चुकी हैं। ऐसे में खुले में शौच पर रोक के दावे कागजी ही लगते हैं। किसी शौचालय में दरवाजा नहीं तो किसी में छत नहीं है। कोई बनकर तैयार है तो टैंक नहीं बन सका। लोगों ने बताया कि प्रधान ने स्वयं शौचालय बनवाए। पूरा पैसा भी नहीं दिया गया। जिससे शौचालयों की यह स्थिति है। ब्लॉक में शिकायतें की गई लेकिन अधिकारी कभी देखने तक नहीं आए। नया गांव के पप्पू पुत्र  बाबू का शौचालय एक वर्ष से अधूरा है। निर्मला पत्नी विनोद का भी एक वर्ष से शौचालय अधूरा पड़ा है। टैंक तक नहीं बन पाया है। चंद्रिका पुत्र प्रसादी, जगत नारायन पुत्र विकान का भी अधूरा कार्य पड़ा है छोटेलाल पुत्र भगवानदीन विजय पाल पुत्र पुत्ती लाल लालता पुत्र गयादीन बिटाना पत्नी बाबू राम सागर पुत्र बाबू संजय पुत्र लालू संतोष पुत्र रामपाल   ने बताया कि शौचालय की एक भी किस्त नहीं दी गई। जिससे शौचालय पूरे नहीं बन सके। मजबूरी में खुले में शौच जाना पड़ रहा है।

जहां प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्र में स्वच्छता को बढ़ावा देने देश और प्रदेश सरकार ने शौचालय बनवाने की प्रक्रिया शुरू की, फिर भी ग्राम पंचायतों में शौचालयों पूरी तरह आकार नहीं ले पा रहे हैं। ग्राम पंचायतों में एक तरफ सरपंच-सचिवों की मनमानी से शौचालय समय पर नहीं बन पाए वहीं दूसरी  तरफ  योजना की धन राशि लाभार्थियों को नहीं मिल सकी। इसी वजह से ग्राम पंचायतों में गरीब परिवारों के घर शौचालय नहीं बन सके। ग्रामीणों की सुब आंख खुलते ही खुले मैदान की तरफ दौड़ लगती है और सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को झेलनी पड़ रही है। खुले में शौच की प्रवृत्ति के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादातर बीमारियों का प्रकोप ज्यादा रहता है। गुना जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाली ऐसी कई पंचायतें हैं जहां शौचालय अधूरे पड़े हैं

(अधूरे पड़े शौचालय कागजों में हो गए पूर्ण)

 अटरिया थाना क्षेत्र  के अंतर्गत ग्राम पंचायत नयागांव मे, स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों में बन रहे शौचालय अभी भी अधूरे पड़े हुए हैं, जबकि अफसरों ने अधूरे शौचालय को भी कागजों में पूर्ण दिखा दिया।वहीं जिला ओडीएफ घोषित कर दिया, लेकिन हकीकत में लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं।जब हमारी टीम ग्राम पंचायत बरगदवा माफी कें राजस्व गांव पखवापार में पहुंची तों वहां अधूरे पड़े शौचालय का पड़ताल में करीब आधा दर्जन से अधिक शौचालय अधूरे पड़े पाए गए जिसमें कई शौचालय कोठरी बन के तैयार हो गई तो सीट नहीं लगी छत नहीं बड़ी टंकी नहीं रखी गई।
वही ग्रामीणो का कहना है कि अधिकारियों की लापरवाही के चलते स्वच्छ भारत अभियान भ्रष्टाचार की भेंट चल रहा है। अब तक के स्वच्छ भारत अभियान के तहत अपनी जेब भरने वाले अनेकों ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारियों पर जहां कार्रवाई की जा चुकी है वहीं जिम्मेदार इन सभी को अनदेखी कर अभियान को पलीता लगाते दिख रहे हैं। ताजा मामला सिधौली ब्लॉक के नयागांव ग्राम पंचायत का है। नयागांव गढ़ी गांव में शौचालय का निर्माण ग्राम प्रधान द्वारा लगभग 18 माह पूर्व कराया गया था किंतु शौचालय निर्माण अधूरा होने के कारण ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।
ग्रामीणों का कहना है कि अधूरा शौचालय का निर्माण ग्राम प्रधान द्वारा कराया गया। शौचालय के लाभार्थियों को उम्मीद थी कि शौचालय बन जाएगा तो उनका गांव शौच मुक्त होगा आशा लगाए बैठे शौचालय के लाभार्थियों का सपना अधूरा तो रहा लेकिन अब तक शौचालय का निर्माण पूरा नहीं हुआ जिससे ग्रामीणों को शौच करने में बेहद समस्याओं सामना करना पड़ रहा है। सरकार स्वच्छता के प्रति जहां सशक्त है लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते ग्रामीण खुले में शौच करने के लिए मजबूर हैं। ग्रामीणों ने दबी जुबान से बताया कि शौचालय का भुगतान ग्राम प्रधान द्वारा पूर्व में ही करवा लिया गया है और अभी तक शौचालय का निर्माण पूरा नहीं हो सका।
जिससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्वच्छ भारत अभियान के नाम पर जिम्मेदारों ने जमकर जेब भरी और अभियान भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ा दिया। ऐसे में सवाल उठता है कि जब ब्लॉक स्तरीय अधिकारी और समय-समय पर सोशल ऑडिट टीम गांव में सर्वेक्षण और जांच की जा रही है तो भला इन अधूरे शौचालय पर टीम और अधिकारियों की निगाहें क्यों नहीं पड़ती..? साफ है कि अधिकारियों की मिलीभगत के चलते अब तक जहां शौचालय अधूरे हैं वहीं लाभार्थियों के नाम पर अधिकारी और प्रधान ने अपनी जेबे गरम की और लाभार्थियों का शौच मुक्त का सपना अधूरा रह गया। फिलहाल अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकारी महकमे की नींद कब खुलेगी और ग्रामीण शौच मुक्त होंगे या फिर इन लाभार्थियों के नाम पर कागजों में लकीरे खींचकर जिम्मेदार अपनी जेब भरते रहेंगे।अटरिया नयागांव ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान व सचिव पर आवास, के नाम पर सुविधा शुल्क लेने और विकाश कार्यो मे भ्रष्टाचार का लागाया आरोप


 : कई हफ्तों पहले  ग्राम पंचायत की एडीओ बिसवां एडीओ सिधौली की अध्यक्षता में हुई थी जांच नतीजा अभी भी शून्य

: ब्लाक स्तरीय हुई जांच ग्रामीण कर रहे न्याय का इंतजार

: कही संबंधित अधिकारी कर तो नही रहे मामले को दबाने का प्रयास


अटरिया सिधौली (सीतापुर)।एक तरफ जहाँ देश व प्रदेश की सरकार गरीब आवाम को प्रधानमंत्री आवास के नाम पर पक्का आशियाना मुहैया कराकर उन्हें हर सम्भव लाभ देने की बात करती है वही दूसरी तरफ इस योजना को अमलीजामा पहनाने में लगे अधिकारी व कर्मचारियों की लापरवाही से इसपर ग्रहण लगता दिखाई दे रहा।क्योकि मुफ्त में मिलने वाली आवास व शौचालय के लिए भोली भाली जनता से जमकर धन उगाही की जा रही है।
मामला यूपी के  सीतापुर जिले के विकास खण्ड सिधौली के क्षेत्र ग्राम पंचायत  नयागांव का है।जहाँ पर प्रधानमंत्री आवास व शौचालय चयन में जमकर धन उगाही करने की बात सामने आ रही है।इस गाँव के निवासी  ग्रामीडो ने ग्राम प्रधान व ग्राम सचिव पर आरोप लगाते हुए  ऑनलाइन शिकायत देकर जाँच की माँग  शिकायत के निस्तारण हेतु ग्राम पंचायत में एडीओ बिसवां के साथ एडीओ सिधौली की टीम ग्राम पंचायत के शौचालय एवं आवासों की मौखिक पड़ताल की बहुत ही कम मात्रा में शौचालय इस्तेमाल लायक पाए गए वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना में ग्राम प्रधान पर प्रति आवास ₹10000 धन उगाही का आरोप लगाया। 
ग्रामीणों ने दिए प्रार्थना पत्र के माध्यम से बताया कि गाँव मे जितने भी आवास व शौचालय चयनित है उनमें अधिकांश लाभार्थियो से प्रधान व सचिव ने 2 हजार से लेकर 10 हजार रुपये तक सुविधा शुल्क वसूल किये है।इनकी(प्रधान और सचिव) मनमानी का अंदाज़ा आप इसी से लगा सकते है कि जिनका सुविधा शुल्क मिलता है उन्ही का नाम आवास और शौचालय की सूची में अंकित किया जाता है।और जो रुपये नही दे पाता है उसका नाम सूची की वेटिंग लिस्ट में है कहकर टाल दिया जाता है।इस गाँव के आवास की सूची में पात्रता की सत्यता इसी से लगा सकते है कि गरीब भोली भाली जनता को बिना सुविधा शुल्क आवास न देते हुए अधिकारियों सहित खुद की जेबें गर्म करते रहे हैं
इस सम्बंध में ग्राम प्रधान  रामसरन यादव से बात करने की कोशिस की गई तो वह मीडिया के सवालों के जवाब देने से बचते नजर आए।जबकि ग्राम पंचायत अधिकारी ने कहा कि यह आरोप पूरी तरह बेबुनियाद है।किसी से कोई शुल्क नही लिया गया
फिलहाल ग्रामीणों ने न्याय की आस में सक्षम  विभागीय अधिकारी को ऑनलाइन प्रार्थनापत्र देकर जांच की माँग की है अब देखना यह है कि उचित जाँचकर ठोस कार्यवाही होती है या फिर खानापूर्ति करके ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।

नयागांव  ग्रामीणों ने लगाया प्रधान पर शौचालय निर्माण में  भ्रष्टाचार का आरोप

 

शौचालय बनवाने में मानक कों रखा गया ताक पर विकास खंड सिधौली के ग्राम पंचायत नयागांव   का है मामला ग्राम प्रधान द्वारा बनाए गए स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय का है उच्चाधिकारियों को गुमराह करते हुए  । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की महत्वाकांक्षी योजना ‘स्वच्छ भारत मिशन( शौचालय)’ योजना में भ्रष्टाचार की सीतापुर सिधौली मे खूब रंग दिखाया है और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानों की जेब भरने का शायद एक अच्छा माध्यम  शौचालय योजना’ बनती दिख रही है। इस योजना के तहत बनाये गए शौचालयों में मानकों के साथ पूरी निर्भीकता के साथ खूब खिलवाड़ किया गया है और इसमें ग्राम विकास अधिकारी ने भी पूरी सहभागिता करते हुए ऐसे शौचालयों को तैयार करवा कर उपयोग के लिए छोड़ दिए जो भविष्य में देश की जनता को उसी स्थान पर लाकर छोड़ देंगे जिससे बचाने के लिए प्रधानमंत्री  मोदी जी,जी-जान से जुटे हैं। कहने का मतलब यह है कि
एक तो ग्राम पंचायतों में 90 फ़ीसदी शौचालय उपयोग नहीं किए जा रहे हैं कारण योजना के तहत बनाए गए शौचालय पूर्ण रूप से बने ही नहीं है कहीं दरवाजे लगे हैं छत नहीं हैं तो किसी में छत है किंतु टैंक नहीं बनाए गए हैं कहीं टैंक बने हैं तो शौचालय की सीट नहीं रखी गई है इतना ही नहीं किसी किसी शौचालय की दीवारें भी गिर चुकी हैं किंतु योजना के तहत शौचालय सरकारी कागजों पर तैयार हो चुके हैं और उपयोग भी किए जा रहे हैं 10 फ़ीसदी बने शौचालयों की भविष्य की हकीकत शायद कुछ इस प्रकार होगी जो शौचालय ग्रामीण क्षेत्र की जनता उपयोग कर रही है उनके दोनों टैंकों  में मल प्रवाहित हो रहा है। कुछ वर्षों बाद जब दोनों टैंक एक साथ भर जायेंगे तो ऐसे में या तो शौचालयों का उपयोग बन्द करना पड़ेगा या टैंकों में एकत्र हुए मैले को बिना जैविक खाद के बने ही फेंकने की मजबूरी होगी। जबकि स्वच्छ शौचालय में दो टैंक इस लिए बनाये गए हैं कि पहले एक टैंक का उपयोग हो जब वह भर जाये तो दूसरा टैंक खोल दिया जाये और जब पहले वाले टैंक में एकत्र हुआ मल जैविक खाद का रूप ले ले तो उसे खेतिहर भूमि को उपजाऊ बनाने के काम में लाया जाये। लेकिन जागरूकता की कमी व ग्राम प्रधान की लापरवाही के चलते ग्रामीणों को शौचालय उपयोग की सही जानकारी नहीं दी गई है जनपद सीतापुर के विकास खण्ड सिधौली के ग्राम पंचायत नयागांव व उसके अन्तर्गत आने वाले  कई गांवों में ग्राम प्रधान ने  खूब मनमानी की जो पात्र नहीं है शौचालय बनवाए लेकिन उनका उपयोग करने की तरीके किसी को नहीं बताये साथ ही शौचालय निर्माण में ग्राम प्रधान रामसरन  यादव ने खूब धांधली करवाई। मानकों के साथ जमकर खिलवाड़ किया गया
 जानकारी के लिए आपको बता दें शौचालयों के नजारा ग्राम गढ़ी गांव  से पता चलता है कि बहुत से लोगों को मिला ही नही है जिनको मिला भी है तो उनका उपयोग ही नहीं करते हैं। गाँव में रहते ही नही है ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता लाने की जरूरत है। और गरीब को ही मिले जो पात्र हो जिस के पास चार पहिया वाहन य  टेैक्कटर बंदूक पक्के मकान में तीन कमरें  हो उनको इस का लाभ  मिलना चाहिए ऐसे में सवाल यह उठता है कि ऐसे भ्रष्टाचार ग्राम प्रधान के खिलाफ प्रशासन कार्रवाई करने में क्यों हिचकिचाहट महसूस करती है इससे साफ दिखता है की जो ग्राम प्रधान गांव में धन उगाही करता है उसमें ब्लॉक संबंधी समस्त अधिकारियों का हिस्सा लगता है अगर ऐसा ही चलता रहा तो देश को भ्रष्टाचार मे लिप्त ब्लॉक कर्मचारी 
बेच खाएंगे

नयागांव ग्राम पंचायत  में सिर्फ कागजों पर बन रही सड़क, नाली और खड़ंजा, जमीन पर कुछ नहीं


''पेपर में सब बना है, जमीन पर कुछ नहीं।'' यह बात कहकर छोटेलाल ठहाके लगाकर हंस देते हैं। उनकी इस बात पर उनके साथ बैठे करीब 20 गांव वाले भी हंसने लगते हैं
 छोटेलाल अपने गांव के बाहर पीपल के पेड़ के  बने चबूतरे पर बैठे हैं। क्‍योंकि यह सर्दी  का मौसम है ऐसे में दोपहर का वक्‍त काटने के लिए गांव के दूसरे लोग भी आग के पास जमावड़ा लगाए हैं। कोई आग के समक्ष हाथ  किए हैं तो कोई जलने के लिए लकड़ियों के टुकड़े कर रहा है तो कोई खैनी पीट रहा है। स्वतंत्र प्रभात की टीम जब इनके बीच पहुंची तो यह लोग जरा सचेत हुए। आपस में कुछ बात करने के बाद टीम से परिचय लिया।

परिचय अदान प्रदान के बाद जब स्वतंत्र प्रभात  टीम की ओर से उनसे पूछा जाता है कि आपके गांव में ' दिनेश सिंह के घर से लालजी के घर तक  नाली मरम्मत कार्य हुआ है न?' इसी सवाल के जवाब मे छोटे लाल कहते हैं- ''पेपर में सब बना है, जमीन पर कुछ नहीं।'' और इसी के साथ माहौल में हंसी गूंज उठती है।

यह कहानी है उत्‍तर प्रदेश के सीतापुर जिले की नयागांव ग्राम पंचायत की। हाल के दिनों में गांव वालों की ओर से उनकी पंचायत में घोटाले को लेकर आवाज उठाई गई है। । शिकायत के आधार पर  सक्षम अधिकारी  ने मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं जिसकी ब्लॉक स्तर पर जांच की गई जांच में आए एडीओ बिसवां एवं सिधौली एडीओ की टीम द्वारा की गई। चर्चा में रही यह खबर तमाम स्‍थानीय अखबारों में छपी होगी, ज‍िसके बाद स्वतंत्र प्रभात की टीम इस गांव पहुंची। 

ऐसा नहीं है कि नयागांव एकलौती ग्राम पंचायत है जहां भ्रष्‍टाचार का मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत में भ्रष्‍टाचार के मामले अक्‍सर सामने आते रहते हैं। गूगल पर 'ग्राम पंचायत' लिखते ही भ्रष्‍टाचार की खबरें देखने को मिलती हैं। अखबारों में भी एक-दो कॉलम में ऐसी खबरें छपा ही करती हैं। ऐसे में देश भर की ग्राम पंचायतों से आ रही इन खबरों से भष्‍टाचार का आंकलन लगाने से पहले यह जान लेना चाहिए कि देश में कितनी पंचायतें हैं।

मिली जानकारी के अनुसार पंचायतों का सशक्तिकरण 90 के दशक में हुआ था। पंचायती राज व्यवस्था का निर्माण स्थानीय विकास को बल दिलाने के लिए किया गया था। भारत में 2.51 लाख पंचायतें हैं, जिनमें 2.39 लाख ग्राम पंचायतें हैं। इसमें 6904 ब्लॉक पंचायतें और 589 जिला पंचायतें शामिल हैं। देश में 29 लाख से अधिक पंचायत प्रतिनिधि हैं। यह आंकड़े इस बात को सोचने पर मजबूर करते हैं कि ग्राम पंचायत में हो रहे भ्रष्‍टाचार की खबरों में अगर जरा भी सत्‍यता है तो यह कितना बड़ा घालमेल हो सकता है।

जानकारों के अनुसार अगर पंचायतों को दिए जाने वाले फंड की बात करें तो 2015 में 14वीं वित्त आयोग की सिफारिश के अनुसार अगले पांच वर्षो तक पंचायतों को तीन गुना अधिक फंड दिया जाना था। यानि पंचायतों को मिलने वाली राशि 63,051 करोड़ रुपए (13.3 बिलियन डॉलर) से बढ़ कर 200,292 करोड़ (31.2 बिलियन डॉलर) हो गई होगी। इस आंकड़े से साफ होता है कि जहां एक ओर इस हिसाब का पैसा ग्रामीण भारत के लिए फ्लो हो रहा है, वहीं अब भी गांव बदहाल ही पड़े हैं। इसके पीछे की एक वजह ग्राम पंचायतों में फैला भ्रष्‍टाचार ही है।

फिलहाल बात करते हैं सिधौली की नयागांव ग्राम पंचायत की। यहां के रहने वाले ग्रामीण बताते हैं, ''गांव के ही कुमार के घर से रमेश के घर नाली मरम्मत कार्य दिखाया गया है। इसके लिए अलग अलग मदों में पैसे भी निकाले गए हैं। आप खुद चलकर देखें आपको कहीं मरम्मत कार्य नहीं मिलेगा। मेरा घर भी इस बीच में पड़ता है। मेरे घर तो नाली भी नहीं है। न जाने कहां मरम्मत कार्य कराया गया। छोटेलाल आगे कहते हैं, ''कागजों का पेट भरा है, लेकिन लोगों का नहीं भरा। कागजों में काम हुए हैं, लेकिन जमीन पर काम नहीं हुए। कई रोड, नाली, खड़ंजा तो पेपर में बन गए हैं, असल में कहां हैं हमें पता ही नहीं। इन्‍हीं सब शिकायतों को लेकर गांव वालों ने संबंधित विभाग के पास शिकायत की है।''
कागजों में हुए काम की बात करें तो गांव के ही ,,,,,,, मुन्ना के घर से पुत्ती लाल के घर तक नाली  निर्माण का कार्य होना दिखाया गया है। जब स्वतंत्र प्रभात की टीम छोटेलाल से मिली तो उन्‍हें इस बात की जानकारी ही नहीं थी। छोटेलाल घर के बाहर बनी कच्‍ची नाली को दिखाकर कहते हैं, ''यह मैंने अपने हाथों से बनाई है। आप आए हैं तो पता चला कि ऐसा कोई काम भी हुआ है।''

कुछ ऐसा ही हाल ,,,,,,,, चंद्र का पुत्र प्रसादी का भी है। रघुनाथ पुत्र रघुराई भी अपने घर के बाहर खुले में बहते पानी को दिखाकर कहते हैं, ''आप बता रहे हैं कागज में नाली बनना बताया गया है, कहां है नाली? हमारे घर का सारा पानी सड़क पर बह रहा है। कई बार प्रधान से बता भी चुके हैं, लेकिन कोई सुने तब तो।''

इस बारे में जब ग्राम प्रधान से फोन पर बात की गई तो उन्होंने कहा, ''गांव में कहां-कहां काम हुआ है इस बारे में पंचायत सेक्रेट्री ज्‍यादा अच्‍छे से बता पाएंगे। उनके पास लिख‍ित में सारी चीजें है। मैं क्‍या बताऊं की कहां काम हुआ है या कहां नहीं।'' जब पंचायत सेक्रेट्री से फोन पर बात करने की कोश‍िश की गई तो उनका नंबर स्‍विचऑफ बता रहा था।

ग्राम पंचायत और प्रधान के 20 काम पता हैं... अगर नहीं तो पढ़ लीजिए

यानि ग्राम पंचायतों में भ्रष्‍टाचार का मामला व्‍यापक है और इसे भी देश में फैले अन्‍य भ्रष्‍टाचार की तरह गंभीरता से लेनी की जरूरत है। क्‍योंकि जनगणना के मुताबिक भारत में कुल 597,464 गांव हैं। इनमें रहने वाले बहुत से लोगों को जीवन इस भ्रष्‍टाचार से सीधे तौर पर प्रभावित हो रहा है। करीब 69 फीसदी भारत अब भी ग्रामिण इलाकों में बसता है।

ऐसा नहीं है कि देश भर में हर जगह पंचायतें खराब काम ही कर रही हैं। देश भर के पंचायतों की बात करें तो केरल के ग्रामीण संस्थानों की स्थिति सबसे बेहतर है। पंचायती राज मंत्रालय द्वारा किए गए एक अध्ययन के मुताबिक- ''वित्त मामले में केरल पहले स्थान पर है, दायित्व एवं कार्यकर्ताओं के मामले में दूसरे स्थान पर और संरचना और कार्य बेहतर तरीके से करने में तीसरे स्थान पर है। केरल में पंचायतों के काम बेहद पारदर्शी हैं।'' हाल यह है कि राज्य ने अधिकतम कार्य पंचायत को सौंप रखा है। पंचायती राज मंत्रालय द्वारा किए गए अध्ययन के मुताबिक केरल के बाद, ग्रामीण संस्थानों की बेहतर स्थिति कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु की हैं।

अब तक तो जिला व प्रदेश स्तर पर बड़ी लूट के मामले सामने आया करते थे लेकिन अब सबसे निचले स्तर पर स्थित  ग्राम पंचायत विकास कार्यों के होटलों में क्या मौजूदा सरकार भी नोच घसओट कर रही है। अब तक कई गांवो  के ऐसे मामले सामने आ चुके हैं जिनमें शौचालय घोटाला, आवास घोटाला मुख्य रूप से होते थे  लेकिन इस बार ऐसा मामला सामने आया है जिसमें खड़न्जा, नाली निर्माण समेत अन्य योजनाओं में भी सरकारी धन की बड़े पैमाने पर लूट की गई है। घोटाले की शिकायत पर जांच करने गये एडीओ बिसवां एवं एडीओ सिधौली की संयुक्त टीम  के बुलाने पर  ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत अधिकारी मौके पर  पंहुचे।
मामला सिधौली विकास खण्ड के अन्तर्गत आने वाले ग्राम पंचायत नयागांव का है। इस गांव पंचायत वित्तीय वर्ष 2016-17 और 2017-18 से 2018-19 में ग्राम प्रधान रामसरन  यादव व ग्राम पंचायत अधिकारी  की मिली भगत से लाखों रूपये की लूट की गई। गांव के विकास के लिए चलाई जा रही लगभग हर योजना से लाखों रूपये निकाले गये लेकिन उनसे कोई कार्य नही कराया गया। सबसे ज्यादा लूट खड़न्जा लगवाने, नाली बनवाने तथा इंटर लांकिंग करवाने व अन्य कार्यां में की गई है। अरोप है कि पूर्व प्रधान द्वारा कराये गये कार्यां को दर्शा कर वर्तमान ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत अधिकारी ने पूरी धनराशि हजम कर ली। जांच अधिकारी  ने स्वीकार किया है कि बड़े पैमाने पर सरकारी धन का दुरूपयोग किया गया है। दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही की जा रही है।

अटरिया नयागांव ग्राम पंचायत  में अधूरे शौचालय खोल रहे स्वच्छ भारत अभियान की पोल


सिधौली विकास क्षेत्र के  नयागांव  ग्राम पंचायत में गांवों को खुले में शौच मुक्त करने के दावे हवाई साबित हो रहे हैं। क्षेत्र के  ग्राम गढ़ी गांव ग्राम पंचायत नयागांव में शौचालयों की स्थिति बहुत खराब है। अव्वल शौचालय आधे अधूरे पड़े हैं। एक-एक वर्ष हो चुके शौचालयों का निर्माण पूरा नहीं है। लाभार्थीयो को पैसा न देकर स्वयं ही शौचालय की दीवारें खड़ी कर शौचालय की मंजूर धनराशि गमन करने का आरोप लगाते हुए बताया के स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्राम में शौचालय निर्माण कार्य कराया गया जिसमें लाभार्थियों को योजना में मिलने वाली धनराशि ना देकर स्वयं ग्राम प्रधान रामसरन यादव द्वारा  ना ही टैंक बनाए गए ना तो सीट  रखी गई  और ना ही  छत  रखी गई  महज चार दीवार  खड़ी कर  दिखावे के लिए दरवाजे को  रखकर  योजना की धनराशि को  निकाल लिया गया  लाभार्थियों से जानकारी ली गई तो बताया  कि उन्हें  यह मालूम ही नहीं है  के  उनके शौचालय  कैसे  और कितने रूपों में बनवाए गए ग्राम प्रधान रामसरन यादव  ने  स्वयं आकर के बिना न्यू के दीवारें खड़ी करवाई और फोटो खींच  कर  चले गए  शौचालय के लिए  खड़ी दीवाने करीब एक से डेढ़ साल  पहले से  अभी तक  निर्माण कार्य के लिए तरस रही हैं आधे से ज्यादा शौचालय तो ध्वस्त हो चुके हैं जिन की दीवारें भी गिर चुकी हैं। ऐसे में खुले में शौच पर रोक के दावे कागजी ही लगते हैं। किसी शौचालय में दरवाजा नहीं तो किसी में छत नहीं है। कोई बनकर तैयार है तो टैंक नहीं बन सका। लोगों ने बताया कि प्रधान ने स्वयं शौचालय बनवाए। पूरा पैसा भी नहीं दिया गया। जिससे शौचालयों की यह स्थिति है। ब्लॉक में शिकायतें की गई लेकिन अधिकारी कभी देखने तक नहीं आए। नया गांव के पप्पू पुत्र  बाबू का शौचालय एक वर्ष से अधूरा है। निर्मला पत्नी विनोद का भी एक वर्ष से शौचालय अधूरा पड़ा है। टैंक तक नहीं बन पाया है। चंद्रिका पुत्र प्रसादी, जगत नारायन पुत्र विकान का भी अधूरा कार्य पड़ा है छोटेलाल पुत्र भगवानदीन विजय पाल पुत्र पुत्ती लाल लालता पुत्र गयादीन बिटाना पत्नी बाबू राम सागर पुत्र बाबू संजय पुत्र लालू संतोष पुत्र रामपाल   ने बताया कि शौचालय की एक भी किस्त नहीं दी गई। जिससे शौचालय पूरे नहीं बन सके। मजबूरी में खुले में शौच जाना पड़ रहा है।

जहां प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्र में स्वच्छता को बढ़ावा देने देश और प्रदेश सरकार ने शौचालय बनवाने की प्रक्रिया शुरू की, फिर भी ग्राम पंचायतों में शौचालयों पूरी तरह आकार नहीं ले पा रहे हैं। ग्राम पंचायतों में एक तरफ सरपंच-सचिवों की मनमानी से शौचालय समय पर नहीं बन पाए वहीं दूसरी  तरफ  योजना की धन राशि लाभार्थियों को नहीं मिल सकी। इसी वजह से ग्राम पंचायतों में गरीब परिवारों के घर शौचालय नहीं बन सके। ग्रामीणों की सुब आंख खुलते ही खुले मैदान की तरफ दौड़ लगती है और सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को झेलनी पड़ रही है। खुले में शौच की प्रवृत्ति के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादातर बीमारियों का प्रकोप ज्यादा रहता है। गुना जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाली ऐसी कई पंचायतें हैं जहां शौचालय अधूरे पड़े हैं

(अधूरे पड़े शौचालय कागजों में हो गए पूर्ण)

 अटरिया थाना क्षेत्र  के अंतर्गत ग्राम पंचायत नयागांव मे, स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों में बन रहे शौचालय अभी भी अधूरे पड़े हुए हैं, जबकि अफसरों ने अधूरे शौचालय को भी कागजों में पूर्ण दिखा दिया।वहीं जिला ओडीएफ घोषित कर दिया, लेकिन हकीकत में लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं।जब हमारी टीम ग्राम पंचायत बरगदवा माफी कें राजस्व गांव पखवापार में पहुंची तों वहां अधूरे पड़े शौचालय का पड़ताल में करीब आधा दर्जन से अधिक शौचालय अधूरे पड़े पाए गए जिसमें कई शौचालय कोठरी बन के तैयार हो गई तो सीट नहीं लगी छत नहीं बड़ी टंकी नहीं रखी गई।
वही ग्रामीणो का कहना है कि अधिकारियों की लापरवाही के चलते स्वच्छ भारत अभियान भ्रष्टाचार की भेंट चल रहा है। अब तक के स्वच्छ भारत अभियान के तहत अपनी जेब भरने वाले अनेकों ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारियों पर जहां कार्रवाई की जा चुकी है वहीं जिम्मेदार इन सभी को अनदेखी कर अभियान को पलीता लगाते दिख रहे हैं। ताजा मामला सिधौली ब्लॉक के नयागांव ग्राम पंचायत का है। नयागांव गढ़ी गांव में शौचालय का निर्माण ग्राम प्रधान द्वारा लगभग 18 माह पूर्व कराया गया था किंतु शौचालय निर्माण अधूरा होने के कारण ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।
ग्रामीणों का कहना है कि अधूरा शौचालय का निर्माण ग्राम प्रधान द्वारा कराया गया। शौचालय के लाभार्थियों को उम्मीद थी कि शौचालय बन जाएगा तो उनका गांव शौच मुक्त होगा आशा लगाए बैठे शौचालय के लाभार्थियों का सपना अधूरा तो रहा लेकिन अब तक शौचालय का निर्माण पूरा नहीं हुआ जिससे ग्रामीणों को शौच करने में बेहद समस्याओं सामना करना पड़ रहा है। सरकार स्वच्छता के प्रति जहां सशक्त है लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते ग्रामीण खुले में शौच करने के लिए मजबूर हैं। ग्रामीणों ने दबी जुबान से बताया कि शौचालय का भुगतान ग्राम प्रधान द्वारा पूर्व में ही करवा लिया गया है और अभी तक शौचालय का निर्माण पूरा नहीं हो सका।
जिससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्वच्छ भारत अभियान के नाम पर जिम्मेदारों ने जमकर जेब भरी और अभियान भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ा दिया। ऐसे में सवाल उठता है कि जब ब्लॉक स्तरीय अधिकारी और समय-समय पर सोशल ऑडिट टीम गांव में सर्वेक्षण और जांच की जा रही है तो भला इन अधूरे शौचालय पर टीम और अधिकारियों की निगाहें क्यों नहीं पड़ती..? साफ है कि अधिकारियों की मिलीभगत के चलते अब तक जहां शौचालय अधूरे हैं वहीं लाभार्थियों के नाम पर अधिकारी और प्रधान ने अपनी जेबे गरम की और लाभार्थियों का शौच मुक्त का सपना अधूरा रह गया। फिलहाल अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकारी महकमे की नींद कब खुलेगी और ग्रामीण शौच मुक्त होंगे या फिर इन लाभार्थियों के नाम पर कागजों में लकीरे खींचकर जिम्मेदार अपनी जेब भरते रहेंगे।

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