नयागांव वाह री योगी सरकार जमकर हुआ भ्रष्टाचार अधिकारियों ने किया बंदरबांट

नयागांव वाह री योगी सरकार जमकर हुआ भ्रष्टाचार अधिकारियों ने किया बंदरबांट

नयागांव वाह री योगी सरकार जमकर हुआ भ्रष्टाचार अधिकारियों ने किया बंदरबांट

धृतराष्ट्र बनी मोदी और योगी सरकार फिर भी आइना दिखा रहे पत्रकार

 संवादाता- नरेश गुप्ता

नयागांव अटरिया (सीतापुर)


उत्तर प्रदेश के जनपद  सीतापुर के विकासखंड सिधौली  के  नयागांव ग्राम पंचायत के विकास के लिए भेजे गए धन का सही उपयोग प्रधानों व सचिवों ने नहीं किया। गांव के लोगों ने इनकी शिकायत की तो जांच कराई गई। आरोप सही पाए जाने के बाद भी अब तक इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।

गांव का विकास हो, गांव के लोगों को छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर परेशान न होना पड़े। इसके लिए ग्राम पंचायतों को धन दिया गया और तमाम सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है, लेकिन गांव के लोगों को इन योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। प्रधान व सचिव ऐसे लोगों को लाभ दे रहे हैं, जो उनके करीबी है। इसको लेकर  शिकायत हुई। कई मामलों की जांच अधिकारियों ने की और आरोप सही पाया। इसके बाद भी प्रधान के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है।

उच्च अधिकारियों की गुपचुप बातों में चर्चा है कि गांव में प्रधान को बचाते हुए केवल सचिव के खिलाफ ही कार्रवाई कर दी गई। जबकि योजनाओं से वंचित रह गए लोगों ने और  प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास के नाम पर  सुविधा शुल्क लिए जाने  की   शिकायत की तो ब्लॉक स्तरीय जांच में एडीओ बिसवां एवं ऑडियो सिधौली की संयुक्त टीम ने उक्त भ्रष्टाचार के प्रकरण की संयुक्त जांच की गई

जांच में संबंधित अधिकारियों ने लगाए गए भ्रष्टाचार के सभी आरोपों को सही पाया फिर  भी कोई कार्रवाई ही नहीं हुई। डीपीआरओ ने बताया कि जो भी प्रधान दोषी है। उन सब के खिलाफ कार्रवाई होगी। व्यस्तता के कारण पत्रावली लंबित हो रही है।


यूपी के सीतापुर के सिधौली ब्लॉक क्षेत्र की नयागांव ग्राम पंचायत के प्रधान पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। गांव के लोगों ने अफसरों से मिलकर गांव में हुए घोटालों की लंबी फेहरिश्त सौंपी। वहीं, धांधली के आरोपों से घिरे ग्राम प्रधान चुप्पी साधे बैठे हैं।

गांव के लोगो ने प्रधानमंत्री पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत करते हुए विकास कार्यों और आवाज योजना में धन उगाही का आरोप लगाते हुए एक शिकायती पत्र दिया। इसमें ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी पर धांधली के आरोप लगाए। कहा कि वर्ष 2015 से लेकर 2018 तक विकास के नाम पर लाखों रुपये डकार लिए गए। स्वच्छ भारत मिशन में भी जमकर धांधली हुई।। ग्रामीणों ने ऐसे भी नाम अफसरों के सामने रखे हैं, जिन्हें शौचालय बनवाने के के लिए धनराशि स्वीकृत की गई

किंतु लाभार्थियों को इसकी भनक तक नहीं कुछ लाभार्थियों का तो कागज पर शौचालय पूर्ण दिखाया गया जबकि जमीनी स्तर पर लाभार्थी को उसका लाभ तो छोड़िए इसकी जानकारी ही नहीं थी कि उसे शौचालय सुविधा का लाभ भी दिया गया है जो कि पूरी तरह से नियमों के विरुद्ध है। लोगों ने इन मामलों की जांच कराने की मांग की गई थी

शिकायत पत्र के आधार पर ब्लॉक स्तरीय टीम गठित कर विकास कार्यों की जांच की गई जिसमें जांचकर्ता टीम ने ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार और धन उगाही के मामले को सत्य पाया किंतु फिर भी विभागीय उदासीनता के चलते भ्रष्टाचार के शिकार हुए ग्रामीण अभी भी न्याय से वंचित हैं

गुणवत्ता विहीन शौचालयों का निर्माण करा रहे हैं ठेकेदार

प्रधान बने  है ठेकेदार , फिर भी मौन बने जिम्मेदार


 विकास क्षेत्र सिधौली के ग्राम पंचायत नयागांव  के गढ़ी गांव में शौचालय ना जाने किस चीनी मिट्टी के बड़े  से टुकड़ों से किया गया  साथ ही  शौचालय के टैंको के निर्माण में पीले ईटों का प्रयोग किया जा रहा है बालू और डस्ट का प्रयोग किया जा रहा है। मानक विहीन शौचालय निर्माण कार्य ग्राम प्रधान की ओर से कराया जा रहा है। ग्राम प्रधान खुद ठेकेदार बनकर शौचालयों का निर्माण करा रहे हैं। लाभार्थियों की शिकायतों पर अफसर मौन बने हैं। यही नहीं  कई लाभार्थियों को शौचालय मिलना था, लेकिन कुछ लोगों को ही निर्माण के लिए चेक दिया गया है। शौचालय निर्माण का आलम यह है कि किसी भी लाभार्थी ने शौचालय अपने आप नहीं बनवाया  हैं  सारे शौचालयो का निर्माण कार्य प्रधान करवा रहे हैं।

सिधौली ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत नयागांव के मजरा गढ़ी गांव में शौचालय निर्माण में व्यापक धांधली की जा रही है। निर्माण कार्य मानक विहीन कराया जा रहा है। शौचालय के लाभार्थी लाभार्थी बताते हैं कि ग्राम प्रधान ने कहा था कि काम अच्छा होगा, इसलिए उन्होंने पैसा निकाल कर उन्हें दे दिया। अब पीले ईटों से शौचालयो के टैंको का निर्माण कराया जा रहा है।

लाभार्थियों ने  यह भी  बताया कि ठेके पर शौचालय निर्माण का काम कराया जा रहा है। लाभार्थियों की पीड़ा है कि जब मिस्त्री से मानक विहीन निर्माण कार्य की शिकायत की जाती है तो राजगीर कहते हैं कि ग्राम प्रधान से बात करो। इस संबंध में अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं है। जांच कराई जाएगी। रिपोर्ट आने पर कार्रवाई की जाएगी। बस इसके अलावा अधिकारियों के पास कोई उत्तर नहीं है।

(मानक दरकिनार, शौचालय में दरार)

स्वच्छ भारत मिशन का सपना दिखाने वाली सरकार की मंशा पर पानी फिर रहा है। प्रधान और सचिव लाभार्थियों को प्रोत्साहन राशि देकर स्वयं शौचालय निर्माण कराने की बजाय ठेकेदारों से करवा रहे हैं, जिसकी वजह से कार्य दोयम दर्जे का हो रहा है। निर्माण के साथ ही दीवार में दरार आ गई है, शौचालयों में दरवाजा लगने के साथ ही उखड़ना शुरू हो गया है। नयागांव ग्राम पंचायत ही नहीं  अधिकांश सभी  ग्राम पंचायतों की स्थिति हर विकास खंड में इसी तरह की है।

योजना के तहत जिले में करोडो रुपये खर्च करके शौचालयों का निर्माण कराया जा रहा है। शौचालयों के निर्माण के लिए प्रति शौचालय 12 हजार रुपये के हिसाब से ग्राम पंचायतों में खाते में भेज दी है, लेकिन प्रधान और सचिव लाभार्थियों से शौचालय का निर्माण न कराकर ठेकेदारी पर करा रहे हैं। ताकि निर्माण मानक के विपरीत कराकर पैसा  बचा सके। विकास खंड सिधौली की ग्राम पंचायत नयागांव में  शौचालय आवंटित किया गया है, जिसकी लाखो रुपये की धनराशि  ग्राम पंचायत के खाते में भेज दिया गया है।

सचिव और प्रधान शौचालयों का निर्माण लाभार्थियों के द्वारा नहीं करा रहे हैं। इसको अपने मनपसंद ठेकेदार को ठेका देकर करा रहे है, जिसकी वजह से ठेकेदार पैसा बचाने के चक्कर में मानक के विपरीत निर्माण कराया जा रहा है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदार द्वारा शौचालय का निर्माण कराया जा रहा है, जिसकी वजह से मानक के अनुसार निर्माण नहीं हो पा रहा है। सिधौली विकास खंड के क्षेत्र की अधिकांस ग्राम पंचायतो मे  कुछ शौचालय आवंटित किए गए थे, जिसमें कुछो का निर्माण हुआ और कुछ शौचालय शेष रह गए, जो शौचालय का निर्माण हुआ है वह भी मानक विहीन है।

सरकार द्वारा चल रही योजना स्वच्छता भारत मिशन की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता मिशन को लेकर गांवों को ओडीएफ करने के लिए खर्च की जा रही करोड़ों की धनराशि में बड़ा घपला किया जा रहा है।
तहसील क्षेत्र की तीनों ब्लाको में चलाये जा रहे स्वच्छता मिशन में सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर प्रचार प्रसार करके लोगो को जागरूक करके शौचालय निर्माण के लिए बारह हजार रुपये लाभार्थी को दे रही है इतने पैसे से सिर्फ काम चलाऊ शौचालयों का निर्माण ही सम्भव है किंतु ग्राम प्रधान व सचिव सहित अधिकारी भी इस पैसे में कमीसन खोरी से बाज नही आ रहे ।

प्रति शौचालय कमीशन तय करने के बाद मोदी के मिशन ओडीएफ को ठेकेदारों को सौंप दिया गया है। गांवों में हो रहे शौचालयों के निर्माण में ठेकेदार जमकर अनियमितता बरत रहे हैं। लेकिन अधिकारी घटिया शौचालयों के निर्माण को लेकर फिक्रमंद नहीं है। आलम यह है कि घटिया सामग्री से निर्मित हो रहे शौचालय अफसरों के संज्ञान में है, बावजूद इसके कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
गांवों को खुले में शौंच मुक्त करने के लिए गांव- गांव शौचालय बनाने के लिए सरकार करोड़ो धनराशि दे रही है। लेकिन इस धनराशि में भी खेल हो रहा है।


अधिकांश जगहों पर स्वच्छता मिशन के तहत बन रहे शौचालय को ठेकेदार व ग्राम प्रधान स्वयं बनवा रहे हैं। ऐसे में ठेकेदार व प्रधान अपना मुनाफा निकालने से लेकर अधिकारियों को तय कमीशन देकर घटिया निर्माण करवा रहे हैं। ठेकेदार 12 हजार रुपये की लागत का शौचालय 8 से 9 हजार रुपये में बनाता है। घटिया शौचालयों की लगातार शिकायतों के बावजूद भी कोई अफसर गंभीरता से नहीं ले रहा है।


सिधौली के नयागांव, गढ़ी गांव, डेवरीडी सहित  ग्राम पंचायत कुंवरपुर  ग्राम पंचायते शामिल है इसके अतिरिक्त अन्य तमाम गांवों में ठेकेदार शौचालय का निर्माण करा रहे हैं। इन गांवों में ठेकेदारी प्रथा पर शौचालय बनाएं जाने की शिकायत ब्लाक से लेकर डीएम तक हुई ,तथा आये दिन समाचारों की शुर्खिया भी बनी लेकिन जांच को पहुंचने वाले अधिकारी घटिया पीली ईंट मिलने पर केवल जांच के नाम का पिटारा थमा देते हैं।


लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की। नया गांव ग्राम पंचायत सहित कई गांवों में मानक विहीन शौचालय बनवाये जा रहे हैं।  विकास क्षेत्र के अधिकांश ग्राम पंचायतों में  घटिया सामग्री शौचालय के लिए पहुंची है। परंतु कोई भी प्रधानमंत्री के ओडीएफ मिशन में चल रही कमीशनखोरी को लेकर गम्भीर नहीं है। ब्लॉक स्तर पर बैठे अधिकारी व कर्मचारी मात्र कमीशन बाजी में रहकर सरकार की अति महत्वपूर्ण योजनाओं को धराशाही करने में लगे है ।

प्रति शौचालय एक हजार कमीशन : 

सूत्रों की माने तो ब्लाक से लेकर गांव तक शौचालय में तीन स्तर पर कमीशन है। यहां पर प्रति शौचालय एक हजार कमीशन निकाला जाता है। इसके बाद ठेकेदार शौचालय बनाकर खुद का मुनाफा निकालते हैं। जिससे प्रति शौचालय की धनराशि में दो से तीन हजार रुपए का खेल किया जा रहा है।


यही नहीं जिन गांवों में शौचालयों की संख्या सैकड़ों में हैं, वहां उच्चाधिकारियों को कमीशन पहुंचाने की बात कहकर ठेकेदार से नकद कमीशन भी लिया जा रहा है। क्या ऐसे ही मोदी व योगी का सपना साकार हो सकेगा जब उन्हीं के अधिकारी व कर्मचारी महत्वपूर्ण योजनाओ के प्रति भी गंभीर नजर नही आ रहे हैं ये अपने आप में एक प्रश्न बना हुआ है।।

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