अवैध खनन के बिगड़ रहे जल संरक्षण के प्रमुख स्त्रोत

 अवैध खनन के बिगड़ रहे जल संरक्षण के प्रमुख स्त्रोत


अवैध खनन के बिगड़ रहे जल संरक्षण के प्रमुख स्त्रोत
सुनौरी, पिपरई और तरगुंवा में अवैध खनन के हब
तालबेहट।Sunil tripathi

प्रति वर्ष जल संकट को बिगड़ते हालातों के वावजूद खनन माफियाओं द्वारा जल संरक्षण के लिए बने नदी, नालों और पोखरों को नेस्ताबूद किया जा रहा है। प्रतिदिन खनन माफिया द्वारा ट्रेक्ट्रर संचालकों को बालू आनाधिकृत तरीके से बालू बेची जा रही है और यह खनन माफिया प्राकृतिक जल संरक्षित स्त्रोतों को नष्ट कर रहे है।
तालबेहट क्षेत्र के ग्राम सुनौरी, पिपरई, सरखड़ी, तरगुंवा, विजयपूरा आदि स्थानों से निकली नालों से बालू का अवैध खनन कर रहे है। इन क्षेत्रों में कारोबार करने बाले दबंग खनन माफिया नालों से निकाली गई बालू को एक जगह एकत्रित करते है और फिर बालू का कारोबार करने बाले खनन कारोबारियों की ट्रेक्टर ट्राली भरते है। प्रति ट्रेक्ट्रर ट्राली 100 फुट बालू 1 हजार से 1500 रूपए में बेच रहे है। इन खनन कारोबारियों पर उपजिलाधिकारी मु0 कमर ने शिंकचा कसने का प्रयास किया मगर कुछ दिन शांत रहने के बाद फिर खनन का कारोबार जबरदस्त तरीके से किया जाने लाग। सुनौरी के ग्रामीणों ने बताया कि उनके क्षेत्र में ग्राम सभा और किसानों की जमीनों को खोद कर लाल मिटटी की धुलाई कर बालू का निर्माण किया जा रहा है। ग्रामीणों ने कई शिकायतें भी मगर कोई सुनवाई नही हुई। यह अवैध खनन कारोबारी जल संरक्षण के प्रमुख स्त्रोतों को विकृत कर जहां प्राकृतिक स्वरूप को बिगाड़ रहे वहीं सरकार को प्रतिमाह राजस्व का लाखों रूपए का नुकसान कर रहे है। यदि खनन व राजस्व विभाग ने इन खनन कारोबारियों पर नकेल नही कसी तो क्षेत्र के अधिकांश जल स्त्रोत गर्मी में फिर जल संकट पैदा करेगें।

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