प्राकृतिक खेती पर हो जोर.. लागत कम करने की तकनीक विकसित कर लाभ दुगना..

 प्राकृतिक खेती पर हो जोर.. लागत कम करने की तकनीक विकसित कर लाभ दुगना..


समाज और किसान के बीच सेतु का काम करेगा विश्वविद्यालय..
10 अप्रैल, अयोध्या. गांव में अपार कौशल है, जरूरत उसे विकसित करने की है और डॉक्टर राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय यह बीड़ा उठाने को तैयार है. किसानों को उपज का दुगना लाभ तभी हो सकता है जब लागत कम करने की तकनीक विकसित की जाए.. 
डॉक्टर राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के प्रौढ़ सतत एवं प्रसार शिक्षा विभाग के द्वारा 15 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का उद्घाटन करते हुए आचार्य मनोज दीक्षित ने उक्त बातें कहीं. 
उन्होंने कहा कि जैविक और रासायनिक खादों का प्रयोग कर खेती करने के बजाय हमें प्राकृतिक खेती पर ध्यान देना होगा, तभी हम स्वस्थ रह सकते हैं.

      कुलपति ने कहा कि हमें डिटर्जेंट का प्रयोग बंद करना होगा, दुनिया के डेढ़ सौ से ज्यादा देशों में डिटर्जेंट प्रतिबंधित है यह हमारे पर्यावरण को बुरी तरह प्रदूषित कर रहा है. हम शौच के बाद अपना हाथ ठीक ढंग से साफ करें तो जीडीपी में आधा प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हैं 
कुलपति ने कहा की विश्वविद्यालय यह कोशिश करेगा गांव के कौशल का उपयोग गांव वासियों के अनुसार हो और उनके  उत्पाद को बाजार में विपणन करने का काम विश्वविद्यालय करे. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रशिक्षण शिविर में आए हुए विशेषज्ञ अपना विचार गांव पर ना थोपें बल्कि गांव के लोगों के अनुसार उनकी क्षमता को विकसित करने का प्रयास करें. 
विशिष्ट अतिथि राघवेश दास वेदांती ने देसी गाय के पालन पर जोर दिया और कहा खान पान रहन सहन पवित्र होगा तभी स्वस्थ समाज का निर्माण होगा. डॉ राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय कार्य परिषद सदस्य ओमप्रकाश सिंह ने हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया और कहा कि विश्वविद्यालय की गांव से जुड़ने की पहल अनुपम है..

     गांव के कौशल का उपयोग विश्वविद्यालय कर सकता है. कुलपति और अतिथियों का स्वागत निदेशक डॉ अनूप कुमार ने पुष्पगुच्छ भेंट करके किया. ग्राम प्रधान प्रतिनिधि कृष्ण देव वर्मा ने सभी अतिथियों को बुके और गांव में बने हुए गुड़ की टोकरी तथा झऊआ भेंट किया. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के इस कदम पर हम सब साथ हैं और निश्चित तौर से गांव इस प्रशिक्षण शिविर से लाभान्वित होगा और राष्ट्र के विकास में अपना योगदान देगा. कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित ने आंवला और फाइकस का वृक्षारोपण कर पर्यावरण को संरक्षित करने पर भी जोर दिया. कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर एसएस त्रिपाठी और धन्यवाद ज्ञापन डॉक्टर सुरेन्द्र मिश्रा ने किया.

    इस अवसर पर फैशन डिजाइनिंग की शालिनी पांडे सहित बड़ी संख्या में ग्राम वासी विद्यालय के बच्चे प्रौढ़ सतत एवं प्रसार शिक्षा विभाग के शिक्षार्थी मौजूद थे.

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