अयोध्या तपस्वी छावनी के संत परमहंस दास का आज एक और ड्रामा देखने को मिला

अयोध्या तपस्वी छावनी के संत परमहंस दास का आज एक और ड्रामा देखने को मिला।

राम मंदिर निर्माण मुद्दे पर सस्ती लोकप्रयिता हासिल करने के लिए परमहंस ने अयोध्या से प्रयागराज कुंभ में जाने के लिए बैलगाड़ी का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि बैलगाड़ी हमारी पुरानी परंपरा है और वह कुंभ बैलगाड़ी से जाएंगे और वहां पर राम मंदिर निर्माण के लिए गंगा जल पीकर तपस्या करेंगे।

इस तरह का नाटक परमहंस पहले भी कर चुके हैं आमरण अनशन करना फिर पुलिस द्वारा जबरन उठाकर लखनऊ पीजीआई में भर्ती कराना। आत्मदाह की धमकी देना अपनी चिता सजाना जिसके बाद पुलिस ने गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर परमहंस को जेल भेज दिया था। 20 दिन जेल में रहकर परमहंस अयोध्या वापस लौटे तो फिर एक ड्रामा उनके दिमाग में उपजा और प्रयागराज कुंभ जाकर राम मंदिर निर्माण के लिए तपस्या करने की ठानी।

ऐलान किया कि वह गंगाजल पीकर राम मंदिर निर्माण के लिए कुंभ में तपस्या करेंगे। यह सब कुछ तो ठीक था लेकिन जब वह अपने मंदिर से प्रयागराज के लिए निकले तो बैलगाड़ी पर सवार होकर।अब सवाल यह उठता है कि एक बैलगाड़ी प्रयागराज तक जाएगी या फिर रास्ते में ही छोड़कर किसी दूसरे साधन से यह प्रयागराज पहुंचेंगे।

फिलहाल रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि एक साधु सन्यासी को इस तरह की हरकत नहीं करनी चाहिए इसी हरकत में वे जेल भी जा चुके हैं।

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