बच्चों का गूगल से भी तेज चलता है दिमाग, देखकर रह जाएंगे हैरान

बच्चों का गूगल से भी तेज चलता है दिमाग, देखकर रह जाएंगे हैरान

 


बहराइच।

गूगल के जमाने में प्राइमरी स्कूल के बच्चे विश्व भर के देशों और उनकी राजधानी का नाम चंद सेकेंड में बताने का काम कर रहे हैं।

ये बदलाव फखरपुर क्षेत्र में स्थित मनेहरा प्राथमिक विद्यालय के दो अध्यापकों पंकज श्रीवास्तव और सुधाकर चतुर्वेदी के अनूठे प्रयास की बदौलत सार्थक हुआ है।

कल तक जहां इस प्राइमरी स्कूल के बच्चे A, B, C, D और क, ख, ग, घ का कहकरा ठीक से नहीं जानते थे, आज विश्व भर का नक्शा इनके जुबान पर रटा हुआ है।

 

बदल जाएगी सोच

इंडो-नेपाल सीमा से लगे यूपी के बहराइच जिले में एक ऐसा ही प्राईमरी स्कूल है। जहां के नन्हे-मुन्हे बच्चों का जर्नल नॉलेज इतना स्ट्रांग है कि कॉन्वेंट स्कूल के बच्चों को शायद ही इनके जितना ज्ञान हो। अगर यकीं न हो तो आप इनके तर्क ज्ञान को स्वयं देख सकते हैं कि यहां के नौनिहाल बच्चे किस तरह पहाड़े की तरह फर्राटे में पूरे विश्व के मानचित्र से लेकर ग्रहों,

उपग्रहों और सागर के नाम को सुना और दिखा रहे हैं। यकीन मानिए इस नजारे को देख लोगों की यह सोच बदल जाएगी कि प्राथमिक स्कूलों में बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं दी जाती।

 

कान्वेंट के बच्चों पर भारी यहां के बच्चे

ये नजारा है बहराइच जिले के थाना फखरपुर क्षेत्र के मनेहरा प्राथमिक विद्यालय का। जहां के प्राईमरी स्कूल में बच्चों को भारत सहित विश्व के तमाम देशों के नाम, उनकी राजधानी, अक्षांश, देशान्तर, ग्रहों के नाम जैसी तमाम जर्नल नॉलेज पहाड़े की तरह रटी हुई है।

प्राथमिक विद्यालय के इन बच्चों को इतना होनहार बनाने के पीछे स्कूल के दो अध्यापकों पंकज श्रीवास्तव और सुधाकर चतुर्वेदी की अनोखी मेहनत है। आज इन बच्चों का ज्ञान कान्वेंट के बच्चों पर भारी पड़ रहा है।

 

बच्चों को पढ़ाने का नया तरीका

आपको बता दें कि मनेहरा प्राथमिक स्कूल के दो अध्यापकों पंकज श्रीवास्तव और सुधाकर चतुर्वेदी ने बच्चों को पढ़ाने का एक नया तरीका इजाद किया है।

जो विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को समझाने के लिये ब्लैक बोर्ड के बजाए जमीन पर विश्व का नक्शा बनाकर बच्चों को पढ़ाने का काम कर रहे हैं। इस विधा से जहां बच्चों का सामान्य ज्ञान बड़ी तेजी से बढ़ रहा है,

वहीं खेल खेल में बच्चों की पढ़ाई और मनोरंजन दोनों एक साथ हो रहा है। स्कूल के अध्यापकों का कहना है कि आज हमारे विद्यालय के बच्चों का जर्नल नालेज कान्वेंट स्कूल के बच्चों को मात देने के लिये काफी है।

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