खुटार रेंज के फतेहपुर  वीट   छापा बोझी क्षेत्र में बाघ की दहशत से जीना हुआ दुश्वार कृषकों के काम धंधे ठप

खुटार रेंज के फतेहपुर  वीट   छापा बोझी क्षेत्र में बाघ की दहशत से जीना हुआ दुश्वार कृषकों के काम धंधे ठप



महीनों से देखे जा रहे बाघ को वन विभाग टीम ने नहीं किया पकड़ने का प्रयास

खुटार/ शाहजहांपुर -

खुटार रेंज के फतेहपुर बीट और छापाबोझी बीट में ग्रामीणों  द्वारा खेतों में बाघ को देखे जाने और पगचिन्ह मिलने से  क्षेत्र में दहशत का माहौल है

जिसके कारण धान कटाई और गन्ना छिलाई की सीजन में कृषकों के काम धंधे ठप हो गए हैं बाघ करीब एक माह से खुटार क्षेत्र में अपना डेरा  जमाए हुआ है। जिससे ग्रामीण खेतों में काम करने के लिए नही पहुंच पाते है। जैसे तैसे ग्रामीण एक ग्रुप का झुंड बनाकर खेतों पर काम करने के लिए जाते भी है। लेकिन शाम होने से पहले घर को लौट आते है।

ऐसे में ग्रामीण खेतों में काम करने पर बेबस है। ग्रामीणों ने गांव रौतापुर कला,  छापाबोझी, रसवा कलां के मौजा  हिमांचलपुर, नरौठा देवीदास आदि गांव के खेतों में बाघ के पगचिन्ह मिलने और देखे जाने पर वनविभाग के कर्मचारियों को सूचना दी।

सूचना देने पर वनविभाग के कर्मचारी मौके पर जाकर पगचिन्ह के फिंगरप्रिंट लेकर सिर्फ खानापूर्ति कर ली लेकिन उन्हें  कृषकों की कोई परवाह नहीं है उन्होंने
एक माह में आज तक बाघ को पकड़ने की जरूरत नहीं समझी वन विभाग टीम आज भी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है ग्रामीणों में वनविभाग के कर्मचारियों के प्रति काफी रोष व्याप्त है।

इससे पहले भी बाघ बना चुका है आवारा पशुओं को निवाला

1- 13 सितंबर 19 को गांव रसवा कला के मौजा हिमाचलपुर में सरकारी नलकूप संख्या 17 पर बाघ ने घूम रही एक आवारा गाय को अपना निवाला बना लिया था। सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने खानापूर्ति कर वापस लौट गई थी।

2- 16 सितंबर 19 को रसवा कला के मौजा हिमाचलपुर में सरकारी नलकूप संख्या 17  के तीन सौ मीटर की दूर पर बाघ ने दूसरी गाय को अपना निवाला बना लिया था।

3- 29 सितंबर 19 को गांव छापाबोझी निवासी बहादुर कुमार की छह वर्षीय पुत्री मुस्कान, पांच वर्षीय पुत्री सोनम गांव के बाहर खेतों में बकरी चराने के लिए गई थी। जिसमे बाघ ने एक बकरी को अपना निवाला बना लिया था। शाम को बकरी चरा कर उसकी पुत्री घर पहुंची। तो एक बकरी गाय मिली। तलाश करने पर गांव सलनहा निवासी ओमप्रकाश, सरेली निवासी हरिराम के खेत की मेड़ पर मृत बकरी पड़ी मिली थी।

4- 23 अक्टूबर 19 को गांव सरेली निवासी अश्विनी वर्मा अपने श्रमिक चंद्रपाल को साथ लेकर ट्रैक्टर से इंजन लेकर गन्ने के खेत पर पानी लगाने जा रहा था। उसका छोटा भाई रूपेंद्र वर्मा साइकिल से ट्रैक्टर के पीछे चल रहा था। खेत के कुछ दूरी पर अशोक कुमार वर्मा के खेत से बाघ को निकलता देख होश उड़ गए और ट्रैक्टर को स्टार्ट छोड़कर गन्ने के खेत की ओर होते हुए गांव पहुंचकर अपनी जान बचाई थी।

 

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