बहुआरा से जयछपरा जाने वाली सड़क अपने अस्तित्व की, लड़ रही है लड़ाई

बहुआरा से जयछपरा जाने वाली सड़क अपने अस्तित्व की, लड़ रही है लड़ाई
  • संबंधित अधिकारी से लेकर ग्राम प्रधान तक नहीं दे रहे हैं ध्यान

बहुआरा बैरिया

स्वतंत्रता सेनानीयो का गांव आज अपने रास्ते के लिए मोहताज है एक गांव को दूसरे गांव से जोड़ने वाली सड़क आज भी अपने खड़ंजा और वजूद बचाने के लिए कई दशकों से लड़ाई लड़ रहा हैै. हम बात कर रहेे हैं मुरली छपरा ब्लाक अंतर्गत बहुआरा ग्राम पंचायत के बहुआरा से जयछपरा जाने वाले सड़क की जो अपनी लड़ाााई कई दशकों से गांव के ही दबंगोंं से लड़ने को विवश है. 

बरसात के 4 महीने लोग अपने लूंगी धोती फुलपैंट को घुटने से ऊपर उठाकर चलने को मजबूर हो जाते हैं वहीं बुजुर्गों से मिली जानकारी और सूत्रों के हवाले से प्राप्त जानकारी बताते हैं कि जब से गांवों का अस्तित्व है तब से ही रास्ता चलता आ रहा है

लेकिन कई स्वतंत्रता सेनानी और दिग्गज विधायक और सांसदों को जन्म देने वाला बैरिया बलिया की धरती और यहां के स्थानीय निवासी आज भी कई दिक्कतों और मुसीबतों को सहते आ रहे है. बहुआरा ग्राम पंचायत की बात करें तो ज्यादातर घरों के नौजवान आज भी प्रवासी हैं साल में एक दो बार ही उनका आना-जाना होता है और शायद यही वह कारण है जिसकी वजह से आवाज उठाने के लिए भी हर एक परिवार सोचता है.

राजनीतिक लाभ का भार सहता बहुआरा जयछपरा रास्ता

कई बार की प्रधानी एक दो घरों में ही सिमटने की वजह से रास्ते का वजूद शायद बरकरार है बहुआरा और जयछपरा की कुल आबादी का 70 से 80 प्रतिशत लोगों का आना जाना इस रास्ते से होता रहा है किंतु राजनीतिक कारणों का पूरा भार यह रास्ता निरंतर सहता आ रहा है

गांव के ही दबंगों के द्वारा यह रास्ता आज तक अपने वजूद में नहीं आने दिया जा सका है जबकि इस रास्ते के डेवलपमेंट होने के बाद गांव के विकास में चार चांद लग जाएगा कुछ ग्रामीणों का नाम ना बताने की शर्त पर यह भी कहना है

कि विधायक सांसद ग्राम प्रधान सभी इस ज्वलंत मुद्दे को मुद्दा ही बनाए रखना चाहते हैं ताकि गांव को आपस में लड़ा कर राजनीतिक लाभ लिया जा सके. सैकड़ों हजारों की आबादी वाला दोनों गांव पिछले कई दशकों से यातायात की असुविधाओं को झेलते आ रहा है. ना ही कभी रास्ते की पैमाइश कराई जा रही है

और ना ही अगल-बगल के किसानों को बुवाई के समय ही रास्ते का मिट्टी ना काटने की सलाह दी जा रही है. रास्ते के विकास होने से बहुत सारे घरों को बरसात में आने जाने दुख पीड़ा में होनेवाले कष्टों से निजात मिल सकता है दबंगों का शह सीधा ही इस रास्ते के विवाद को बनाए रखने के लिए दिया जाता है

जिस वजह से यहां प्रधानी लड़ने वाले या क्षेत्र विकास कार्य करने वाले अधिकारी भी आंख बंद कर और कान में तेल डालकर दशकों से सोते आ रहे हैं. वर्तमान ग्राम प्रधान सेक्रेटरी एडीओ पंचायत वीडियो जैसे तमाम लोग इस रास्ते के बारे में कुछ भी बोलने से पीछे हटते हैं अब देखना यह होगा कि इस गांव के विकास के लिए संबंधित अधिकारी और जनप्रतिनिधियों की नींद कब खुलती है या यूं ही सालों साल रोड रास्ते की दिक्कतों को ग्रामीण झेलते रहेंगे. 

 

 

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