खाद्य विभाग की लगातार लापरवाही से ग्रामीण क्षेत्रों में कोटेदार कर रहे हैं मनमानी के साथ दबंगई

खाद्य विभाग की लगातार लापरवाही से ग्रामीण क्षेत्रों में कोटेदार कर रहे हैं मनमानी के साथ दबंगई

 

  • गरीब लाचार बुजुर्ग विधवा और निराश्रित परिवारों को कोटेदार लगवा रहे हैं चक्कर

बैरिया बलिया/

राशन कार्ड को आधार से लिंक कराने के लिए लगातार नोटिफिकेशन सरकार जारी करते आ रही है जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में ईपास मशीन सही ढंग से काम नहीं कर रही है. जिसका नाजायज फायदा उठाते हुए बलिया बैरिया क्षेत्र के राशन कोटेदार दो दर्जन गांवों के लोगों को पिछले कई महीनों से राशन कोटे की दुकान पर हर महीने चक्कर लगवा रहे तब जाकर राशन बांट रहे हैं. 

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार बैरिया विधानसभा क्षेत्र में ग्रामीणों का अंगूठा और उंगली लगा तो लगा नहीं तो कोई बात नहीं डरा धमका कर जबरदस्ती राशन की धांधली की जा रही है. बोलने वाले ग्रामीणों को और भी दौड़ाया जा रहा है ताकि आवाजें दवाई जा सके. ग्रामीण राशन दुकान पर चक्कर लगाने के लिए मजबूर है

लेकिन कोटेदारों की मनमानी ने गांव की गरीब परेशान जनता को और भी तंग कर रखा है. बैरिया क्षेत्र के मुरारपट्टी बहुआरा भूसाहुल्ला गडरिया लालगंज गोपालपुर श्रीपालपुर लुटाईपुर किशनपुरा दलकी सुरभानपुर चांदपुर जगदेवा जैसे तमाम गांव के ग्रामीण कोटेदारों की दबंगई से ग्रामीण त्रस्त हो चुके हैं

फिर भी इलाके में खाद्य विभाग चुप्पी साधे है कई पूर्व कोटेदार नाम ना बताने के एवज में बताया कि खाद्य विभाग को हर कोटे से एक मोटी मुश्त रकम दी जाती है तो उन लोगों पर क्यों कार्रवाई होगी और शायद कहीं ना कहीं यही वजह है जिसकी वजह से कोटेदार अपनी दबंगई ग्रामीणों को दिखाने के लिए अपनी तत्परता दिखा रहे हैं.

राशन वितरण के समय अगर ग्रामीणों ने शिकायत की, बात की तो कोटेदार गाली गलौज के साथ अगली बार ना आने की धमकी देने लग रहे हैं. अब खाद्य विभाग बताएं कि राशनदुकान पर ग्रामीण ना जाए तो घर का खर्च या पापी पेट को कैसे समझाएं या तो कोटेदारों की दबंगई सहते रहे और सरकारी राशन कोटेदार मजा मारते रहे. 

गांव में सर्वप्रथम दबंगों की दी जाती है राशन ले जाने की सूचना

गरीब लाचार विधवा बुजुर्ग जैसे निराश्रित परिवारों की संख्या गांव में अत्याधिक है लेकिन कोटेदार राशन की सूचना सर्वप्रथम अपने गांव के दबंगों और बड़े पहुंच वाले के पास पहुंचाते हैं ताकि गरीब लाचार विधवा बुजुर्ग तो कोटेदार का क्या कर लेंगे उनको तो डरा धमकाकर चक्कर लगवा कर 5 दिन बाद भी राशन दिया जाएगा

तो कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन दबंग और बड़े पहुंच वाले तो बहुत कुछ कर सकते हैं. इसी तरह ज्यादातर गांव में अशिक्षित लोग हैं जिनको ना तो अपने अधिकार और ना ही न्याय संगत बातों का ही पता होता है और शायद इसी का नाजायज फायदा राशन कोटेदार उठा रहे हैं ईपास मशीन पर भी ज्यादातर विधवा लाचार गरीब को गुमराह किया जाता है ताकि 20 से ₹50 अधिक वसूला जा सके.

आखिर जांच कौन करें

गांव में गरीबी रेखा के नीचे या समकक्ष जीवन यापन करने वाले ग्रामीणों को समय के साथ राशन ना मिलना और गरीबी रेखा के ऊपर जीवन यापन करने वाले को बीपीएल कार्ड की व्यवस्था ग्राम प्रधान सेक्रेटरी एडीओ पंचायत जैसे तमाम सरकारी नौकरशाहों पर सवाल खड़े कर रहे हैं ? लेकिन जांच कौन करें जब खाद्य विभाग  की पॉकेट की भरपाई हो ही जा रही है तो. 

जो नहीं है राशन को भोग करने के हकदार वे सभी कोटेदारों के साथ मिलकर राशन को ब्लैक करने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं प्रति यूनिट राशन तेल चीनी जैसी सभी व्यवस्थाएं ताक पर रखकर कार्य को अंजाम दिया जा रहा है. आवाज उठाने वाले ग्रामीण एक दो बार तो आवाज जरूर उठाएं लेकिन उनको कोटेदारों द्वारा डराया धमकाया गया

और राशन के लिए निरंतर दौड़ाया जाने लगा और शायद इसी वजह से कोई भी कोटेदारों के खिलाफ बोलने के लिए तैयार नहीं हो रहा है. अब देखना यह होगा कि जिले के खाद्य विभाग इन अ सामाजिक व्यवस्थाओं पर कार्रवाई करती है या अपनी मनमानी लगातार चलाती रहेगी. 

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