सोलर प्लांट से तीन बैटरी चोरी, स्ट्रीट लाइटे बनी शोपीस

  सोलर प्लांट से तीन बैटरी चोरी, स्ट्रीट लाइटे बनी शोपीस

कौशल किशोर विश्वकर्मा

तिन्दवारी(बाँदा)

एक पुरानी कहावत है कि "एक तो गाडर और ऊपर से लहसुन खाये हुए'' यही कहावत एक दम सटीक नगर पंचायत तिन्दवारी  के जिम्मदरो पर बैठती नजर आ रही है।

कस्बे में नगर पंचायत द्वारा एक करोड़ पच्चीस लाख रुपए ख़र्च करके दो सोलर प्लांट तो लगवा दिया और चालू भी कर दिया गया लेकिन दो माह बाद ही धड़ाम भी हो गया ।क्योंकि सोलर सिस्टम में कमीशन के चक्कर में सिर्फ खानापूर्ति करके दस वार्डो के बजाय कुछ वार्डो की सड़कों में ही सोलर लाइटे लगायी गयी ।

उन्ही प्रकास दे रही लाइटों के साथ  चोरो की नजर प्लांट में रखी बैटरियों पर लग गयी । क्योंकि सोलर प्लांट तो बन गया करोड़ो रुपये भी खर्च हो गए लेकिन  सिक्युरिटी गार्ड रखने  के लिए नगर पंचायत के पास धन ही नही बचा ,कि दो सिक्योरिटी गार्ड सोलर पावर प्लांट में  रात में सिस्टम की चोरो से सुरक्षा कर सके  ।

जिसका चोरो ने रात का फायदा उठाया और जन्माष्टमी की रात  प्लांट न0 2 का दरवाजा तोड़ कर उसमें रखी 40 बैटरियो में से तीन बैटरी चोर चुरा ले गए ।ये प्लांट न0 2 वही है प्लांट है ""जिसे स्वतंत्र प्रभात समाचार पत्र के मुहिम छेड़ने पर ही निर्माण कराया गया था"""।

नगर पंचायत ने थाने में सूचना भी दी । मगर होना भी क्या था और हुआ भी वही कि अभी तक चोर भी नही पकड़े गए । दो हफ्ते हो गए अभी तक नगर पंचायत ने तीन बैटरियों का इंतजाम भी नही कर पाई और न ही सिक्युरिटी गार्ड ,और तब से सड़कों में लगी लाइटे शोपीस बनकर धूल फांक रही  हैं और कस्बेवासी अंधेरे में भटक रहे है।और वही रात में चोरों के हौसले बुलंद हैं। 

मालूम हो कि  कस्बे के मुख्य -मुख्य चौराहे पर पूर्व कार्यकाल में  सोलर लाइट लगायी गयी थी जिनकी सभी पोलो से बैटरियां चोरी हो गयी जिनको आज तक चालू नही किया गया।और वह सभी लाइटे महज शोपीस बनी हुई है । 

कस्बे में नगर पंचायत द्वारा सरकारी धन को कैसे ठिकाने लगाया जा सकता है तो तिन्दवारी नगर पंचायत के जिम्मेदारों से सीखे ,कि कैसे सरकारी धन का बंदरबाट किया जा सकता है ।हां तब भी आपको यकीन न आये तो कस्बे की जनता से पूँछिये कि नगर पंचायत के जिम्मेदार कैसे सरकारी धनराशि का बंदरबांट करते हैं ,और किसी अधिकारी की क्या मझाल कि बन्दरबाँट करने वाले कर्मचारियों को पकड़ सके। क्योंकि सभी अपनी- अपनी कमीशन के मकड़जाल में फंसे हुए हैं।

जनता जाए तो जाए कंहा किससे शिकायत करें।जिले के मुखिया है जो कभी कुआं और तालाब जिया रहे ,कभी नब्बे प्रतिशत मतदान कराने की मुहिम चला रहे है तो कभी प्लास्टिक मुक्त जिला बनाने की मुहिम छेड़े हुए है कुछ नही हो रहा सब हवा में ख्याली पुलाव पकाये जा रहे हैं।

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