लंका दहन होते ही दर्शकों ने लगाए जय श्रीराम के जयकारे

लंका दहन होते ही दर्शकों ने लगाए जय श्रीराम के जयकारे

तिन्दवारी (बांदा)-

कस्बे में चल रही 13 दिवसीय श्री रामलीला मंचन अंतर्गत रविवार रात्रि में बाली वध, लंका दहन तथा रामेश्वर स्थापना की लीला का मंचन किया गया जहां लंका दहन की लीला मुख्य आकर्षण का केंद्र रही।

कस्बे की पुरातन परंपरा के निर्वाह में "राम काज किन्हें बिनु मोहि कहां विश्राम" के मंत्र को लेकर राम काज में लगी श्री रामलीला समिति के राम सेवकों द्वारा प्रतिवर्ष सोने की लंका बनाई जाती है। रामचरितमानस में सुंदरकांड से प्रस्तुत उक्त प्रसंग को देखने यहां कस्बे के अलावा आसपास के गांव के लोग जुटते हैं।

आज की ऐतिहासिक रामलीला में पाछे पवन तनय सिर नावा । जान कार्य प्रभु निकट बुलावा। श्री राम जी ने हनुमान जी को बुलाकर अपने हाथ की मुद्रिका देते हुए कहा इसे ले जाकर सीता जी को दे देना और भली-भांति समझा कर वापस आना ।

सभी वानर सीता जी को खोजते हुए वन में भटक जाते हैं "लाग तृषा अतिशय अकुलाने, मिलै न जल घन गहन भुलाने" सभी वानर भालू प्यास से व्याकुल होकर जल की खोज करते हुए एक गुफा में प्रवेश कर जाते हैं । वहां एक तपस्विनी के द्वारा सरोवर बताए जाने पर सभी जलपान करते हुए समुद्र किनारे पहुंच जाते हैं ।

आगे कोई मार्ग ना पाकर सभी आपस में विचार करते हैं " इहां विचारहिं कपि मन माही, बीती अवधि कार्य कछु नाही " सभी आपस में मंत्रणा करते हैं , इन सबकी बातें दूर बैठा हुआ संपाती गीध सुनता है और इन सब को खाने का मन बनाता गिद्ध की बातें सुनकर सभी बानर डर जाते हैं ।"

डरपे गीध बचन सुनि काना, अब भा मरण सत्य हम जाना" अंगद के द्वारा जटायु का नाम लेने पर "धन्य जटायु सम कोउ नाहीं" संपाती गिद्ध सभी बंदरों को अपने पास बुलाता है और जटायु की मृत्यु सुनकर बड़ा दुखी होते हुए अपने भाई को जल तर्पण करने के बाद वानरों को सीता जी का पता बताते हुए कहता है जो सत योजन सागर को लाघेगा वही माता जानकी तक पहुंच सकता है लेकिन सभी वानर समुद्र पार करने में अपनी असमर्थता जताते हैं ।

जामवंत जी के द्वारा श्री हनुमान जी को उनके बल की याद दिलाई जाती है ,हनुमान जी समुद्र पार करके लंका पहुंचते हैं वहां बड़े-बड़े राक्षस देखकर छोटा सा रूप धारण करके लंका में प्रवेश कर जाते हैं। लंकिनी राक्षसी के देख लिए जाने पर उसे एक मुक्का मार कर धराशाई करते हुए आगे बढ़ जाते हैं।

विभीषण जी से मिलते हुए अशोक वाटिका में पहुंचकर माता जानकी से मिलते हुए अशोक वाटिका उजाड़ते हैं । इस दौरान वहां अक्षय कुमार का वध कर देते हैं । ऐसा होने पर मेघनाथ आकर हनुमान जी को नागपाश में बांध कर रावण के पास ले जाता है ।

रावण के द्वारा हनुमान जी की पूंछ में आग लगवा कर छोड़ देने से वह लंका को जलाते हुए वापस लौट जाते हैं । आज की ऐतिहासिक रामलीला में दर्शक दीर्घा खचाखच भरी रहे लंका दहन के दौरान जय श्रीराम के जयघोष गुंजायमान रहे ।

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