बांका जिला में अतुलनीय है आदित्य सुपर-50:पंकज कुमार त्रिभुवन

बांका जिला में अतुलनीय है आदित्य सुपर-50:पंकज कुमार त्रिभुवन

बांका:एक कहावतें आपने सुना ही होगा कि खुशी के लिए काम करोगे तो खुशी कभी नहीं मिलेगी लेकिन खुश होकर काम करोगे तो खुशी और सफलता दोनों मिलेगी।इस पंक्ति के साथ ही हम बात कर रहे शिक्षा के क्षेत्र में अपना अलग पहचान बना चुके लखीसराय जिला के +2 एसआरएस उच्च विद्यालय सह  राजनीतिक विभाग के वरीय शिक्षक पंकज कुमार त्रिभुवन।

जो सम्पूर्ण जिला में किसी परिचय का मोहताज नहीं है गरीब, कमजोर,पीड़ित,असहाय तथा जरूरतमंद बच्चों को विद्यालय से जोड़ने तथा अन्य सामाजिक सरोकार कार्यों में हमेशा बढ़ चढ़कर भाग लेना इनके जिन्दगी के अंतिम लक्ष्य है।इसी लक्ष्य को बढ़ाते हुए दो दिवसीय दौरे पर बिहार के बांका जिला में संचालित आदित्य सुपर-50 नि:शुल्क कोचिंग शिक्षा केन्द्र में अध्यनरत वर्ग नवम् और मैट्रिक के बच्चों को पढ़ाने के लिए आए।गरीब तथा जरूरतमंद बच्चों को दो दिन आगें बढ़ने के लिए प्रेरित किया

तो वही राजनीति विज्ञान से संबंधित तथ्यों के बारे में जानकारी दी।मीडिया से बातचीत के दौरान पंकज कुमार त्रिभुवन ने कहा कि युवा समाजसेवी ललित किशोर कुमार के द्वारा संचालित आदित्य सुपर-50 नि:शुल्क कोचिंग शिक्षा केन्द्र सम्पूर्ण जिला सहित बिहार में अतुलनीय है।ललित जी के द्वारा चलाई जा रही नि:शुल्क कोचिंग शिक्षा केन्द्र वाकई में गरीब तथा जरूरतमंद बच्चों के वरदान से कम नहीं है।

उन्होंने आदित्य सुपर-50 के संचालक ललित किशोर कुमार की जमकर तारीफ की और उज्जवल भविष्य के कामना की।तो वही आदित्य सुपर-50 नि:शुल्क कोचिंग शिक्षा केन्द्र के संचालक ललित किशोर कुमार ने पंकज कुमार त्रिभुवन को डिक्शनरी पेन तथा अन्य सामग्री देकर सम्मानित किया।मालूम हो कि पंकज कुमार त्रिभुवन  विगत कई वर्षों से लगातार घूम-घूमकर शिक्षा के प्रति अलख जगाने का काम कर रहे हैं।अपनी सरकारी नौकरी करते हुए भी गरीब तथा जरूरतमंद लोगों को मदद करना इनका पूण्य का काम हो गया है। जिसे अपनी परिवार के भरण-पोषण करनें के बाद उसमें से कुछ बचाकर गरीब तथा जरूरतमंद बच्चों और लोगों को हमेशा मदद करतें हैं। वे बेहद ही सरल स्वाभाव के हैं।

इनके इस प्रयास से बहुत ही ज्यादा गरीब परिवार के बच्चों को विद्यालय से जोड़ने का भी काम किया गया हैं।पंकज बताते हैं कि पढ़ाने का शौक बचपन से ही था। इस भावना के साथ कि समाज के लोग भी शिक्षित हो और अंधविश्वास आदि से दूर रहें। उनका कहना है सभी शिक्षकों को जरूरतमंद व प्रतिभावान बच्चों को मुफ्त में पढ़ाना चाहिए। इससे ना केवल खुशी मिलती है, बल्कि आत्म संतुष्टि भी प्राप्त होती है। शिक्षा केवल ज्ञान ही नहीं परोपकार की भाषा की भी सिख देती है।पंकज कुमार त्रिभुवन कई साल से गरीब जरूरतमंद छात्रों के बीच शिक्षा का दीप जला रहे हैं। आज जहां शिक्षा का बाजारीकरण हो राह है इस दौर में प्रदीप  छात्रों को नि:शुल्क पढ़ने का सलाह के साथ मदद भी करते हैं।

उनका कहना है कि यह तो एक सोच है जिसे जमीन पर उतारने का प्रयास कर रहा हैं। इस इलाके के छात्रों में बेसिक शिक्षा के गुणवत्ता में कमी है। इसके के लिए अविभावकों को शुरू से ही अपने बच्चों के पढ़ाई पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

बातचीत के क्रम में पंकज ने बताया की जब तक समाज शिक्षित नहीं होगा। देश का विकास नहीं हो सकता है।अपने मिशन के बारे में कहते हैं कि अभी सम्पूर्ण जिला के सभी गांव में शिक्षा का माहौल बना रहे हैं लेकिन इसे अधिक से अधिक गांवों तक ले जाने की तमन्ना है। इस काम में और लोगों के आने की आवश्यकता है।उनका कहना है कि बच्चों को नि:शुल्क तथा जरूरतमंद बच्चों को मदद करनें में एक अलग ही आनंद मिलता है। जिसका अंदाजा हम और आप लगा भी नहीं सकते। वह चाहता है कि जो प्रयास वह कर रहा है, उसमें सरकार भी भागीदार बने और पढ़े लिखे युवाओं को एक अभियान के माध्यम से जोड़कर देश के कोने-कोने, हर गांव हर पाठशाला तक पहुंचे। अधिकतर युवा कहते हैं कि मुझे कोई जिम्मेदार पद मिलेगा, तब मैं परिवर्तन लाउंगा।

पर उसे लगता है पद, प्रतिष्ठा और स्थापित होने का इंतजार करने में काफी समय बीत जाता है। अगर कोई युवा चाहे कुछ करना तो उसकी इच्छाशक्ति ही उसे समाज कल्याण करने  में मदद कर सकती है।पिछले कई वर्षों में पंकज कुमार त्रिभुवन ने कई गाँवों में घूम-घूमकर शिक्षा के प्रति अलख जगाने का काम कर रहे हैं। इसके माध्यम से हजारों बच्चों को स्कूल जाने के लिए प्रेरित कर चूकें है। बच्चों को पढ़ाने के अलावा उनकी मनोदशा और माहौल के बारे में भी जानने का प्रयास करते हैं और फिर अपने माता-पिता के सहयोग से वे इन बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरुक करते हैं।

 

Support to Swatantra Prabhat Media

T & C Privacy

Comments