सूफी सन्तों की दुवाओं की बदौलत ही आज संसार चल रहा है

सूफी सन्तों की दुवाओं की बदौलत ही आज संसार चल रहा है

मसौली, बाराबंकी  

सूफी सन्तों की दुवाओं की बदौलत ही आज संसार चल रहा है।

हम सभी लोगों को सूफी-सन्तों के बताये हुए रास्ते पर चलना चाहिए और आपसी भेदभाव भुलाकर आपस में एकता पैदा करनी चाहिए ताकि हम लोगों को जो अवसर वादी ताकते लड़ाने का काम कर रही है उनको करारा जवाब मिल सके।

उक्त विचार कस्बा बाँसा शरीफ मे हजरत सैय्यद शाह अब्दुल रज्जाक बाबा की याद में चल रहे आठ दिन से मेले के समापन के अवसर पर मेला कमेटी के अध्यक्ष मो0 रिजवान संजय ने व्यक्त किये।

आगे कहा कि सूफी सन्तो की शिक्षा सामप्रदायिक अलगाव की अग्नि में जल रहे संसार के पथ प्रदर्शन करने में प्रासंगिक है। कुछ अवसरवादी शक्तियों ने धर्म के नाम पर लोगों को बाटने में अपनी कोशिश जारी रखी है। परन्तु वे कभी अपने मकसद में कामियाब नहीें हो पायेगें क्योकि देश के ज्यादा से ज्यादा नागरिक सभी धर्मों की एकता के सिद्धान्त को तरजीह देते हैं।

समापन के अवसर पर मेला कमेटी के सभी पदाधिकारियों तथा सज्जादानसीन के साथ कमेटी अध्यक्ष ने मजार पर चादर चढ़ाई तथा मेला कमेटी के सभी पदाधिकारियो का मेले के दौरान पूर्ण सहयोग के लिए सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।  

उक्त अवसर पर सज्जादानसीन मोहम्मद उमर अहमद जिलानी, मुमताज जिलानी, पीरजादा सिबली रज्जकी, मेला कमेटी के उपाध्यक्ष कामिल अली, मो0 सलमान खादिम, खादिम, नासिर हुसैन, फाज़िल अली, मो0 आमीन, मो0 गुफरान, मो0 नसीम, अच्छे मियां,

मो0 नियाज, मो0 सलमान, राजू खादिम, समाजसेवी डॉ0 अनिल कुमार वर्मा, हाजी वाहिद अली खादिम, डॉ0 सुरेश यादव, सुमिरन यादव, मो0 आजम, मेराजुद्दीन, मो0 अकील, मो0 इरशाद, मो0 नदीम, मो0 इमरान, मो0 इकराम, मोहम्मद आदिल, मो0 आजम खादिम, राशिद अली, शाकिब अली आदि लोग उपस्थित थे।

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