सत्तर सालों से तिरपाल में जीवन बिता रहा है गरीब परिवार

सत्तर सालों से तिरपाल में जीवन बिता रहा है गरीब परिवार

रिपोर्ट-अजय सिंह

दरियाबाद बाराबंकी
विकास खंड दरियाबाद के ग्राम पंचायत अकबरपुर के निवासी सैदूबाज का परिवार आर्थिक तंगी से जीवन जीने को मजबूर है।

एक तरफ जहाँ सरकार द्वारा गरीब, असहाय लोगों के उत्थान के लिए अनेकों कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं ।पर जिम्मेदारों की अनदेखी के कारण कई ऐसे असहाय गरीब परिवार हैं जो गरीबी का दंश झेलने को मजबूर हैं।

अमीरों को तो सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल जाता है किंतु गरीब अपने हक के लिए जिम्मेदारों की अनदेखी से लाचार रहता है।मजबूरन गरीब व पात्र व्यक्ति तमाम सरकारी योजनाओं का लाभ पाने से वंचित हो जाता है ।

सैदूबाज का परिवार तहसील सिरौलीगौसपुर विकास खंड दरियाबाद के ग्राम पंचायत अकबरपुर के निवासी हैं।सैदूबाज के अनुसार वह अकबरपुर में तिरपाल लगाकर लगभग 70 सालों से अपने परिवार के साथ जीवन यापन कर रहे हैं 70 सालों में अनेको सरकारें आयी और गई जनप्रतिनिधि आये वादे किये अनेको योजनाएँ बनी बंद हुई पर इनकी हालातों पर कोई फ़र्क़ नही पड़ा 11 सदस्यों का इनका परिवार हैं जिसमें 3 लड़के और उनके परिवार हैं सैदूबाज की एक बेटी भी है ।जिसका नाम उजाला है जो शादी योग्य हो चुकी है।

सैदूबाज के पास न अपना घर है न घर बनाने की जमीन है गाँव के मालिकराम,शिवपलन,दिव्या ने भी बताया जिस पर वह इस दौरान तिरपाल लगाकर रह रहें हैं वह जमीन इसी गांव के कुँवर सिंह की है ।सैदूबाज बताते हैं कि वो पहले पड़ोस के गाँवों मे जाकर अपनी अपनी कला दिखा कर सभी को मनोरंजन कराया करते थे,पर वक्त बदला मनोरंजन के साधन हो गए ।

और सैदूबाज की रोटी का भी प्रबंध ख़त्म हो गया घर परिवार की कोई पुश्तैनी ज़मीन भी नही जिससे ठीक तरीक़े से पूरे परिवार की रोटी और अन्य ज़रूरतें पूरी हो ।सकें सैदबाज़ू बताते हैं सरकार की तरफ़ से राशन तो मिलता है पर एक घर का और पेंशन का प्रबंध सरकार कर देती तो रहने की समस्या का समाधान हो जाता और कुछ महत्वपूर्ण दैनिक जरूरतें पेंशन से चल जाती।

ज़रूरतों के लिए पेंड के पत्ते तोड़ कर कस्बों की छोटी छोटी दुकानो पर बेंच कर भरणपोषण करता है ये परिवार बताते चलें सैदूबाज का परिवार अपनी छोटी छोटी जरूरत के लिए इस वक्त पेड़ से पत्ता तोड़ कर पड़ोस की मार्केट में बेंचने का काम करते हैं उसी से अपनी अन्य जरूरतों को पूरा करता है।

बेटी शादी लायक होने से ऐसे में रहने से डर लगता है

सैदूबाज कहते बेटी बड़ी हो गई है एक तरफ़ शादी की चिंता तो दूसरी तरफ़ बिना घर की वजह से डर ,की हमेशा चिंता बनी रहती है सैदूबाज की बेटी उजाला कहती न रहने के लिए घर है न शौचालय अब तक सिर्फ़ सभी ने आश्वासन दिया है सैदूबाज से बात करने के दौरान उनकी नम आँखें न कहते हुए भी व्यवस्था पर कई प्रश्न चिन्ह खड़ी करती हैं


इस सम्बंध में मौजूदा ग्राम प्रधान बृजेश से जब बात की गई तो उन्होंने कहा देखते हैं कोशिश करेंगे की सैदूबाज को आवास मिल जाये।

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