जनपद बाराबंकी का एक अनोखा विद्यालय जहाँ चार सालों से छात्रों को नही मिला है यूनिफार्म

जनपद बाराबंकी का एक अनोखा विद्यालय जहाँ चार सालों से छात्रों को नही मिला है यूनिफार्म

जिला ब्यूरो चीफ प्रवीण तिवारी के साथ शिवशंकर तिवारी की रिपोर्ट

रामसनेहीघाट,बाराबंकी-

प्रदेश सरकार बच्चों की शिक्षा के लिए भले ही लाख प्रयास कर रही हो लेकिन बनीकोडर क्षेत्र के विभागीय अधिकारियों की उपेक्षा के चलते एक विद्यालय के सैकड़ों बच्चों को 4 साल से यूनिफॉर्म नसीब नहीं हो सकी है।

बनीकोडर शिक्षा क्षेत्र अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय सूपामऊ में 114 बच्चे पंजीकृत है जिन्हें पढ़ाने के लिए 2 अध्यापक व एक शिक्षामित्र की तैनाती भी की गई है।

लेकिन यहां पर गत ग्राम पंचायत चुनाव के बाद ग्राम प्रधान द्वारा गठित ग्राम शिक्षा समिति का कुछ लोगों ने विरोध किया था जिस पर भाकियू द्वारा अनशन करने के बाद तत्कालीन एसडीएम ने गठित समिति को भंग करते हुए नई शिक्षा समिति बनाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद ग्राम प्रधान ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और वहां से स्टे ले आए।

तभी से विद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्रों को ना तो यूनिफार्म मिल रही है और ना ही विद्यालय में किसी प्रकार का रंग रोगन या मरम्मत कार्य किया गया है ।

आश्चर्य तो इस बात का है कि शिक्षा विभाग ग्राम सभा में पूर्व में गठित की गई ग्राम शिक्षा समिति के खाते में प्रतिवर्ष बच्चों की यूनिफार्म, रंग रोगन तथा विद्यालय मरम्मत के नाम पर लगातार पैसे भेज रहा है

लेकिन विद्यालय के बच्चों को इसका कोई फायदा नहीं मिल पा रहा है।

मजे की बात तो यह है कि शिक्षा विभाग के अधिकारी एक ओर तो ग्राम शिक्षा समिति को विवादित बताकर बच्चों को उनका हक नहीं दिला रहे हैं दूसरी ओर उसी विवादित ग्राम शिक्षा समिति के खाते में प्रतिवर्ष पैसा भी भेज रहे है।

विद्यालय में तैनात प्रधानाध्यापक धीरज कुमार ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में कई बार खंड शिक्षा अधिकारी को मौखिक और लिखित रूप में सूचना दी है लेकिन अभी तक विभागीय स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

शासन के आदेशों और बच्चों के प्रति बरती जा रही उदासीनता लोगों की समझ से परे है।

विभाग से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक ग्राम शिक्षा समिति के विवादित होने पर विभागीय अधिकारियों द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था करके बच्चों को उनका हक दिलाया जाना चाहिए

इस संबंध में भाकियू के वरिष्ठ कार्यकर्ता प्रभाकर तिवारी ने जिला अधिकारी से हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए बच्चों को उनका हक दिलाए जाने की मांग की है।

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