बस्ती स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही

  बस्ती स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही

बस्ती स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही

  • गन्दगी व दूषित जल से दर्जनों गांव संक्रमण की चपेट में

विकासखंड क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांव प्रदूषित पानी व गंदगी के चलते  संक्रामक रोगों की चपेट में है।जिसके कारण सैकड़ों की संख्या मे  डायरिया, फीवर, उल्टी, जुखाम, दस्त से परेशान सैकड़ों मरीज प्रतिदिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र विक्रमजोत व आसपास के निजि चिकित्सकों के पास पहुंच रहे हैं।

संक्रमण और बैक्टीरियल रोगियो की संख्या अचानक बढने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है। विकास खंड क्षेत्र के पूरे हेमराज गावं  निवासी 12 वर्षीय विनयकुमार पुत्र राजकुमार को 24 अगस्त को डेगू के लक्षण मिलने पर इलाज हेतु बस्ती जिलाचिकित्सालय से लखनऊ मेडिकल कॉलेज भेजा गया।तब जाकर हालत काबू मे आया।इसके बावजूद पूरेहेमराज गावं मे अभीतक न तो कोई स्वास्थ्य टीम गयी न हि कोई फागिंग व दवा छिडकाव हुआ।

 विभागीय जानकारी के अनुसार अभी तक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र द्वारा अस्सी फीसद गावं मे मच्छरों भगाने, एंटीलार्वा फागिंग, जलजनित रोगो से बचाव के लिए दवाओं का छिडकाव एवं क्लोरीन की गोली तक नही बांटी गयी।इलाज कराने  सीएचसी पहुचे बिमार रामकुमार, रामजनक, सत्यदेव मौर्य, राजकिशोर, द्वारिकाप्रसाद, हेमंत पाण्डे सहित कई का कहना है कि अस्पताल पर लापरवाही बरती जाती हैं। एमबीबीएस चिकित्सकों की नामौजूदगी मे दंत चिकित्सक हि सबको देखते है।उनकी समझ मे नही आता तो तुरंत रेफर कर देते है।

 

संक्रामक रोग के मूल कारण दूषित जल और गंदगी

इस सम्बंध मे विक्रमजोत के निजी चिकित्सक डा.राघवेंद्र शुक्ल ने बताया कि  सीजनल वायरल फीबर, डायरिया, उल्टी, दस्त, जुकाम, खांसी के मरीज सर्वाधिक आ रहे है। इलाज सभी को दिया जा रहा है। कारण पूछे जाने पर बताया कि इस संक्रमण जनित रोग के पीछे गावं मे फैली गंदगी और दूषित पानी है।जिससे इस तरह की समस्या बरसात के बाद तेजी से फैलती है।और तेजी से गावं के बच्चे ,महिलाएं बुजुर्ग सभी को अपनी चपेट मे ले लेती है।

 

ग्रामपंचायतो मे सफाई और फांगिग के नाम पर लूट

 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सेवा क्षेत्र मे 321सेवाप्रदायी गावं है।प्रत्येक ग्रामपंचायत मे तैनात आशाबहू  प्रधान की मदद से गांव मे साफ सफाई, फागिंग, दवाओं के छिडकाव कराया जाता है।लेकिन वास्तविक धरातल पर कुछ नही हुआ है।सफाई,दवा छिडकाव और आवश्यक स्वास्थ्य सुविधा नाम पर प्रतिवर्ष भातिं वर्तमान वित्तीय वर्ष मे भी दस हजार रूपया प्रत्येक ग्राम स्वास्थ्य समितियों को भेजा जा चुका है।यहाँ तैनात एएनएम व आशा कार्यकत्रियों द्वारा अधिंकाश गावं मेएंटीलार्वा फागिंग, ब्लीचिंग पाउडर और साफ सफाई के नाम पर कागजी कोरम पूरा  कर धन का बंदर बाटं कर लिया गया है।अब जब गावं मे तरह तरह के रोग फैलने लगे है तो मुहं छिपाये भाग रहे है।

 सीएचसी विक्रमजोत क्षेत्र के इन गांवों मे बढी समस्याए
ये गावं सर्वाधिक संक्रमण की चपेट मे
 विक्रमजोत शंकरपुर, खतमसराय, केशवपुर, इमिलिया, रानीपुरछत्तर,तालागांव, बसेवा, करमिया,केनौना,फूलडीह, कल्याण पुर,भरथापुर, बाघानाला, गौरियानैन, नियामतपुर,धुसैनिया, रामगढ,सेवरालाला और सरयू नदी से सटे माझा क्षेत्रके गावं चंद्रपलिया रैदासपुर संदलपुर,बेतावा,पूरे लकडी आदि गावं मे डायरिया, सीजनल बुखार, उल्टीदस्त,जुकाम, टाइडफाइड के रोगियों की संख्या मे अचानक इजाफा हो रहा है।लेकिन इन गावं मे पडताल किया गया तो पता चलि कि अभी तक यहा किसी भी प्रकार कि दवाओं का छिडकाव या किसी स्वास्थ्य टीम ने दौरा तक नही किया है।
सीएचसी पर है अव्यवस्था का अंम्बार
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र विक्रमजोत मे यू तो चार एमबीबीएस चिकित्सक है लेकिन ओपीडी मे दंत सहायक उवेदुर रहमान अब्बासी व आरबीएसके के चिकित्सक भगवान स्वरूप वेत्ता व फार्मासिस्ट राजकुमार सिहं के भरोसे चलता है। सैकड़ों की संख्या मे प्रतिदिन आनेवाले मरीजो को पीनेका पानी और शौचालय जैसी दिक्कतों का सामना करना पडता है।
कस्बे के अरूणकुमार, रामजनक यादव, सुनील मौर्य, झाऊलाल, चंद्रशेखर ने बयाया कि अस्पताल दस बजे के बाद सुरू होता है और दो बजे के बाद कोई काम कराना असंम्भव है।अस्पताल से मिली दवाओ से जल्दी आराम नही मिलता।बाहरी दवाये मंहगी होती है और विशेष मेडिकल स्टोर पर हि मिल पाती है। अधिकांस मरीजो को दंत चिकित्सक और बच्चो के डाक्टर द्वारा हि ओपीडी मे देखा जाता है। दवा बितरण कक्ष मे ऐक्सरे के डार्करूम सहायक जीतेंद्र यादव, स्वीपर राजकुमार गुप्ता की ड्यूटी देते  है।

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