बस्ती की पर्यटन योजनाएं अधर में लटकी

बस्ती की पर्यटन योजनाएं अधर में लटकी

उत्तर प्रदेश के बस्ती में पर्यटन बढ़ाने के लिए शुरु की गई सारी योजनाएं अधर में लटकी पड़ी हैं. वहीं कई योजनाएं तो ऐसी हैं, जिनका शिलान्यास तो दो साल पहले हो गया था. लेकिन उसके बाद से सारी योजनाएं जस की तस पड़ी हुई हैं.

बस्ती: किसी शहर में कैसा पर्यटन होना चाहिए, जहां अतीत से जुड़ी शानदार और भव्य इमारतें हों. लोगों के श्रद्धा-विश्वास से जुड़े धार्मिक स्थल हों. साथ ही वहां पहुंचने के लिए बेहतर ट्रांसपोर्ट प्रणाली हो और यह सब चीजें मौजूद हैं बस्ती जिले में, जो एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने के लिए पर्याप्त हैं.

लेकिन जनपद के पर्यटन स्थलों को विकसित करने की प्रक्रिया की रफ्तार काफी धीमी है. जिसकी वजह से पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही लोगों को रोजगार की समस्या भी सामने आ रही है.सरकार बस्ती मंडल के सभी पर्यटक स्थलों को विकसित कर रही है. इसमें संतकबीर नगर और सिद्धार्थ नगर भी शामिल हैं. बस्ती जनपद के पर्यटन स्थलों को ग्रामीण क्षेत्र के पर्यटकों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. इस बात का ध्यान रखा जा रहा है कि पर्यटक स्थलों पर चल रहे काम जल्द पूरे किए जाएं.

 सबसे अधिक धन मखौड़ा के लिए 6 करोड़ 33 लाख रुपए स्वीकृत किया गया था. श्रृंगीनारी के लिए 42 लाख, छावनी के लिए 34 लाख और अमोढ़ा के लिए एक करोड़ 31 लाख रुपये स्वीकृत किया गया था. श्रीराम सर्किट की 100 करोड़ की परियोजना का यह भी एक हिस्सा है.पर्यटकों के लिए नहीं हैं खास इंतजामइस पूरी प्रक्रिया को पूरा हुए 2 साल बीत गए. शिलान्यास के बाद भी आज तक इन जगहों पर बहुत कुछ नहीं बदला. हालांकि मखौड़ा तो राज्य सरकार के बजट से कुछ सुधरा जरूर दिखता है.

धार्मिक स्थल होने की वजह से श्रृंगीनारी में सफाई तो है, लेकिन पर्यटकों के लिए खास इंतजाम नहीं है. हालत यह है कि पर्यटन स्थलों के आधे अधूरे निर्माण और कोई सुविधा न मिलने के कारण यहां पर्यटकों की आवक भी काफी कम है.

जुड़ी है भगवान राम के जन्म की कहानी

बस्ती जनपद की बात करें तो यहां लगभग 20 छोटे-बड़े पर्यटन स्थल हैं, जो ज्यादातर लोगों की आस्था से जुड़े हैं. इसमें सबसे महत्वपूर्ण मखौड़ा धाम है. यह महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि इसका संबंध भगवान राम के जन्म से है. मान्यता है कि राजा दशरथ के निवेदन पर श्रृंगी ऋषि ने यहां मनोरमा नदी के तट पर पुत्रेष्ठि यज्ञ किया था. इसके बाद भगवान राम समेत लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न का जन्म हुआ.

 

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