बातों में है घुले बतासे,आंखों में मक्कारी है।

बातों में है घुले बतासे,आंखों में मक्कारी है।

काव्य गोष्ठी का किया गया आयोजन,तालियों की गड़गड़ाहट से गुंजा पंडाल

             संवाददाता - राजकुमार विश्वकर्मा

मसकनवा,गोण्डा- 

स्थानीय थाना क्षेत्र छपिया के भोपतपुर बाजार स्थित रॉयलसन पब्लिक इंटर कॉलेज  में रविवार को नवोदित साहित्य संस्थान के तत्वाधान में मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।

जिसकी अध्यक्षता वयोवृद्ध गुरु वासुदेव त्रिपाठी ने किया। संस्था के अध्यक्ष डॉक्टर बी एन शर्मा के संचालन में शत्रुघ्न सिंह कमलापुर ने सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का प्रारंभ किया।गोष्ठी में तमाम गणमान्य लोग श्रोता के रूप में उपस्थित रहे। 

सबसे पहले आरबी सरल ने अपनी पुरानी यादों को कुरेदा "तेरे ख्वाबों में मुझे नींद नहीं आती है,खता है।"

शत्रुघ्न कमलापुरी ने समसामयिक रचना पढ़ी "हमने मांगा फूल लेकिन आपने पत्थर दिया। एक सीधे प्रश्न का कितना कठिन उत्तर दिया।" सत्यनारायण शर्मा  ने वर्तमान सरकार के ऊपर कटाक्ष किया "आज वाणिज्य के क्षेत्र में फेल हुई मोदी सरकार।

बिना योजना बजट के दौड़ रही मोदी सरकार। " काशीराम 'कृष्न' ने सामाजिक परिवेश पर भावपूर्ण रचना पढ़ी "गांव में है कुछ अच्छा शहरों का हाल बुरा, बरसों से पड़ोसी हैं ना मेल किसी का है।" रघु भूषण तिवारी ने देश पर बहुत सामाजिक रचना पढ़ी

"ना मैंने जात देखा है ना मैंने पात देखा है। भारत की उन्नति को दिन और रात देखा है।। हिंदू हो या मुस्लिम हो दलित सामान्य हो कोई। राष्ट्रहित में मैंने सब को एक साथ देखा है।।" रामतेज शर्मा ने बदलते जुग पर कटाक्ष किया "बदले युग में सब बदले हैं कलयुग की माया कैसी है। कैसे समझें कुछ पगले हैं।" 

     अनंत शुक्ल ने इंसानों पर भावपूर्ण रचना पढ़ी "व्यापार बढ़ा है नफरत का इंसा इंसा को बांट रहा। ए देश तेरा अब क्या होगा यह सोच मेरा दिल कांप रहा। "राम सूरज वर्मा प्रकाश ने वीर रस की कविता पढ़ी "किस में साहस है जो सीने में मेरे खंजर भोंके।

साथ में चलने वाला ही पीछे से अस्त्र चलाएगा"  हनुमान दीन पांडे बेधड़क ने मानवता पर प्रहार किया "मानवता है धर्म हमारा यही हिंद की भाषा है।सुखी रहे सब जीव धरा पर यही मेरी अभिलाषा है।" 

मनोज तिवारी ने जिंदगी को एक पहेली की तरह बताया "जिंदगी मुझको हर पल पहेली लगे, शाम मिट्टी सुबह यह हवेली लगे।" अखिलेश पांडे ने समसामयिक बेटियों पर हो रहे अपराध के पक्ष में रचना पढ़ी "बेटियों को देख कर जनता रुंआसी हो रही।

क्यों होते अपराध उनकी न तलाशी हो रही। दिनदहाड़े बेटियों के साथ में दुष्कर्म होते, पापियों के पाप करने पर न फांसी हो रही। " डॉक्टर बी एन शर्मा ने स्वार्थ भाव से भरी रचना पढ़ी "बातों में है घुले बतासे आंखों में मक्कारी है।

हाथ खून से रंगे हुए हैं लीला कितनी न्यारी है। काव्य पाठ के अवसर पर सूरज, अनूप कुमार शर्मा, गौरी शंकर यादव, पूरन चंद्र गुप्ता राजकुमार विश्वकर्मा आदि सहित काफी संख्या में लोग  मौजूद रहे।

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