50 लाख से बने सुडकुआ तालव की जांच कराने की मांग

50 लाख से बने सुडकुआ तालव की जांच कराने की मांग

तत्कालीन बसपा सरकार में आसाम हाईवे घुघचिहाई चैराहे पर स्थित वषोॅ पुराने सुडकुआ  तालव को  पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव  जिला योजना की बैठक में लिया गया था सुडकुआ  ताल के सौंदर्यीकरण के नाम पर ₹49 लाख 19हजार का बजट पास किया गया

जिसमें चाहर दिवारी पक्का तालाब सीढिया कुर्सियां आदि  का कलात्मक खूबसूरत निर्माण कराया जाना था लेकिन स्वीकृति राशि से उक्त तयशुदा निर्माण ना करा कर केवल निर्माण की औपचारिकताएं पूरी कर लाखों रुपए भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिए और पूर्व सुनियोजित ढंग से सौंदर्यकरण की राशि का बंदरबांट कर लिया गया  सुडकुआ ताल का दर्जा दिलाए जाने के लिए अधिकारियों ने पर्यटन विभाग से कराए गए सर्वे के बाद भी इसे पर्यटन का दर्जा नहीं दिला सके और सौंदर्यकरण  के नाम पर लाखों रुपए का बंदरबांट करके इस अध्याय को बंद कर दिया है

भ्रष्टाचार को सबसे बड़ी बात यह रही कि सुडकुआ तालव मूल रूप से सड़क के दक्षिण की तरफ स्थित  जगजाहिर है लेकिन अभिलेखों में छेड़खानी कर सुडकुआ तालव का उत्तर में कुछ अंश के नंबर में ही सौंदर्यकरण की औपचारिकताएं पूरी कर लीपापोती करने का प्रयास किया गया

इस जगह में चार  मीटर से ज्यादा जगह शमशान घाट को भी शामिल किया गया जबकि मूल सुडकुआ ताल की करोड़ों रुपए की जमीन को अधिकारियों की मिलीभगत से सांठगांठ से खुद किया गया है जिसकी कई बार उच्चाधिकारी गणो को शिकायत की गई लेकिन  अधिकारी गणो ने एक दूसरे अधिकारी से सम्बन्धित जांच बताकर पल्ला झाड़ लेते है यह जांच का विषय है की सुडकुआ ताल  के सौंदर्यीकरण के नाम पर 50 लाख के अलावा करोड़ों का घोटाला करने वाले अधिकारी कर्मचारी इंजीनियरों पर्यटन विभाग राजस्व विभाग आदि  के संतिप्त अधिकारियों के भ्रष्टाचार की जांच कर आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल में लाने की माँग पूरनपुर निवासीसंतराम विश्वकर्मा पूर्व भाजपा झुग्गी झोपड़ी प्रकोष्ठ वृज क्षेत्र संयोजक एवं अखिल भारतीय विश्वकर्मा महासंघ                                 
उत्तर प्रदेश ने की है


पीलीभीत से खाकी को दागदार करने वाली एक जिन्होंने मामला प्रकाश में आया पीलीभीत पूरनपुर कोतवाल ने 7 माह पहले दबंगई कर मृतक को जबरदस्ती सुपुर्द ए खाक करवा दिया बल्कि अगर पूरनपुर कोतवाल की ही मानी जाए तो एक्सीडेंटल मामले में भी पोस्टमार्टम कराया जाता है माही कोतवाल ने मुकदमा लिखा परिजनों की लागवड लगाने के बाद बी कोतवाल ने पीड़ित पक्ष की बात नहीं सुनी साथ ही अपने उच्चाधिकारियों को भी इस मामले की भनक नहीं लगने दी जिस पर आज पीड़ित पक्ष पूरे परिवार के साथ जिलाधिकारी कलेक्ट्रेट कार्यालय पर इच्छा मृत्यु की मांग के लिए पहुंचे तो कलेक्ट्रेट परिसर में हंगामा मच गया जिलाधिकारी ने पीड़ित पक्ष की गुहार सुनकर तत्काल पोस्टमार्टम के आदेश दिए?

मामला कुछ यूं है कि आज से 7 माह पहले 23 नवंबर सन 2018 को कोतवाली क्षेत्र के रहने वाले साजिद की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी जिस पर परिवारजनों ने आरोप हत्या का लगाया था परिवार वालों का मानना था कि पास के ही रहने वाले जवान ने साजिद की हत्या करवाई उसके पीछे उनका एक मजबूत तर्क भी था परिवार वालों का ऐसा मानना था कि जमाल की बहन के साथ साजिद का प्रेम प्रसंग चल रहा था

जिसके चलते जमाल ने गणित के आधार पर साजिद की हत्या कर दी और बताया कि पूर्व कोतवाल के तिवारी जमाल के घरवालों से सांठगांठ कर और आर्थिक लाभ लेकर साजिद का पोस्टमार्टम नहीं कराया और दबंगई करते हुए जबरदस्ती शव दफनाने के आदेश दे दिए?इच्छा मृत्यु की मांग करने आए पीड़ित पक्ष से मुलाकात करने के बाद बताया कि पीड़ित पक्ष की फरियाद को सुन लिया गया है साथ ही पूरनपुर कोतवाल की सत्यता के आधार पर कड़ी कार्रवाई करने का आदेश दिए गए हैं और पोस्टमार्टम के लिए भी आदेश दे दिया गया है
 

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