दोस्तों माँ ऐसी ही होती है

दोस्तों माँ ऐसी ही होती है

लेखक मान सिंह नेगी

 

घर से निकल कर 

काम पर चला गया 

माँ हैरान परेशान बेटा 

तू कहा चला गया।

 

जब लौटा घर पर 

माँ चिंता में

घबराई सी, शोकाकुल में

 

पूछा माँ से क्या बात है,

रोते हुए बोली डर गई,

सहम गई ,

 

किसी ने कुछ कर तो नहीं दिया,

 

बोली रोते हुए इतनी देर कैसे हुई।

 

मैं सोची कोई मार गया ,

 

हम बोले मरने से क्या डरना माँ 

मौत तो आनी है,

 

माँ और जोर से रोने लगी,

बोली ऐसा क्यों कहता है ,

 

हम बोले माँ हमें भगवान कृष्ण ने अमृत थोड़े दिया है,

 

आया है तो जायगा राजा रंक फकीर 

 

माँ ने यह सुनकर रोते हुए गले से लगा लिया,

 

बोली ऐसा मत बोल  

 

क्योंकि माँ माँ होती है ,

 

ममता मे यह भी भूल गई हम सच कह रहे है।

 

दोस्तों माँ ऐसी ही होती है।

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