समाज

समाज

          लेखक मान सिंह नेगी 

 

 हम जानते हैं, यह समाज हमारे लिए अब नहीं कभी नहीं रोएगा।

बावजूद इसके हम भलाई करना नहीं छोड़ते।

 

हमने देखा  सड़क पर जगह-जगह गड्ढे पड़े हुए हैं।

 

जहां गाड़ियों का निकलना दूभर होता है. गाड़ियां ऐसे लड़खड़ाती  है।

 

जैसे कोई रेगिस्तान में ऊंट चल रहा हो यह हमारे मन को उद्वेलित कर रहा था।वह हमें प्रेरित करता रहा खुद के लिए जिए तो क्या जिए, अ दिल तू जी सबके लिए।

 

 इसी सोच के साथ हमने वह गड्ढे  आसपास पड़े पत्थरों की सहायता से भरने शुरू कर दिए।

 

 हमें जहां से भी मिट्टी मिली हमने पत्थर और मिट्टी के मिश्रण से गड्ढे भरने शुरू कर दिए।

 

 यह कार्य करते हुए हमें लंबा  समय गुजर चुका है।

 

 जिसके कारण हम कार्यालय भी देर से पहुंचते हैं।

 

परंतु आज अचानक वही कार्य हम कर रहे थे. तभी एक बूढ़ी अम्मा ने धीरे से पूछ लिया बेटा  मिट्टी कहां ले जा रहे हो।

 

हमने भी धीरे से कहा अम्मा यह मिट्टी लोगों की भलाई के लिए ले जा रहा हूं. अम्मा बोली बेटा मैं समझी नहीं।

 

 उसके बाद हम चुपचाप थोड़ी दूर पर पहुंच कर उस मिट्टी के बोरे  को सड़क के बीचो बीच गड्ढे को भरने के लिए डाल दिया।

 

 जब हम दूसरी बार उस मिट्टी को लेने के लिए पहुंचे तब अम्मा ने कहा बेटा बड़ा नेक काम कर रहे हो।

 

हम अपने  नेक काम किसी को बताते नहीं। बताना भी नहीं चाहते।

 

 हम यह मानकर चलते हैं।नेकी कर कुएं में डाल परंतु जब अम्मा ने पूछा बेटा तुम ये नेक काम कब से कर रहे हो? 

 

तब हमने कहा अम्मा यह काम नहीं है।

 

यह हमारी जिम्मेदारी है।

 

 यह हमारा कर्तव्य है।

 

यह हमारी दूसरों के प्रति परवाह है।

 

 हम कभी कभी सूलाहकुल  विहार में बच्चों और स्त्रियों के लिए कपड़े दे देते हैं।

 

कभी खाने पीने का सामान दे देते हैं।

 

कभी चींटियों को आटा चीनी दे देते हैं।

 

 कभी कुत्तों को बिस्कुट खिला देते हैं।

 

 अम्मा बोली बेटा तुम नेकी के रास्ते पर हो।

 

 तुम नेक काम कर रहे हो।

 

हमने कहा ना अम्मा यह काम नहीं यह हमारी रुचि है।

 

ऐसा करना हमें हमारे दिल को भाता है।

 

 यह हमारा शौक है। जिसे हम करने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।

 

 अम्मा की बहू ने हमसे पूछा तुम्हारे कितने बच्चे हैं? हमने कहा अम्मा हमारे दो बच्चे हैं।

 

 बड़ा बेटा प्रबंधक के रूप में मैकडोनाल्ड में कार्यरत है।

 

जबकि छोटे लड़के ने बीकॉम अभी किया है।

 

हमने कहा अम्मा हमारे बेटे का तरक्की का अवसर पास में ही है।

 

 वह बोली  बेटा तुम इतना नेक काम करते हो।

 

तुम्हारे दोनों बेटे सफल होंगे. यह हमारा आशीर्वाद है।हम अम्मा का धन्यवाद कर अपनी ड्यूटी की तरफ दौड़ चले।

 

 एमएसएन विचार

 

 हमारा मानना है , समाज के लिए कितना भी कर लो वो काम है।

 

 यह समाज हमारी अच्छाइयों के लिए कभी नहीं रोएगा।

 

बावजूद इसके हमारा मन लगातार कहता रहता है हमारा मन लगातार कहता रहता है।

 

 भलाई करो,  भलाई करो ना बदले की हो भावना.।

 

भलाई करो चुपचाप भलाई करते रहो।

 

समाज हमारे लिए कभी नहीं रोएगा।

 

 तब भी भलाई करो भलाई का अंत भला ही होता है।

 

इतिश्री

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