फीस स्ट्रक्चर ऐसा हो कि छात्र उसे दे सकें ,और कोर्स का संचालन भी बेहतर कर सकें:विश्वविधालय

फीस स्ट्रक्चर ऐसा हो कि छात्र उसे दे सकें ,और कोर्स का संचालन भी बेहतर कर सकें:विश्वविधालय

भागलपुर:यूजीसी की ऑनलाइन पढ़ाई की योजना 'स्वयं' को लागू करने वाला टीएमबीयू सूबे का पहला विश्वविद्यालय बन गया है।  बुधवार को एकेडमिक काउंसिल की बैठक में इसे मंजूरी दे दी गयी। वहीं, बिहार के विश्वविद्यालयों में स्वीकार करने के लिए मानव संसाधन विभाग की ओर से 11 व 12  अप्रैल को पटना में राज्यस्तरीय बैठक रखी गयी है। 

सभी कोर्स को एकेडमिक काउंसिल को विधिवत मंजूरी।प्रभारी कुलपति प्रो. एलसी साहा ने कहा कि एमएचआरडी के द्वारा 'स्वयं' के प्लेटफार्म पर मैसिव ऑपेन ऑनलाइन कोर्स के द्वारा संचालित सभी कोर्स को एकेडमिक काउंसिल को विधिवत मंजूरी दे दी। कोई भी छात्र इन कोर्स में ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन कर पढ़ाई शुरू कर सकता है। इसकी ऑनलाइन परीक्षा के बाद इसमें मिलने वाले क्रेडिट का 20 फीसदी पीजी के अंकपत्र में जोड़ा जाएगा। विभिन्न कॉलेजों से आए सर्टिफिकेट कोर्स के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। यह जिम्मेदार संबंधित विभागाध्यक्ष और प्राचार्य को दी गई कि विधिवत फीस स्ट्रक्चर बनाकर विवि से मंजूर करा लें। फीस स्ट्रक्चर ऐसा हो कि छात्र उसे दे सकें और कोर्स का संचालन भी बेहतर कर सकें।

टीएमबबीयू ने पढ़ाई के लिए अनुमति दे दी 

पीजी सीबीसीएस में जिन पांच विषयों को राजभवन से मंजूरी के लिए भेजा गया है। उसे टीएमबबीयू ने पास कर पढ़ाई के लिए अनुमति दे दी है। इन पांच विषयों में पीजी अंगिका, अंबेडकर विचार, गांधी विचार, रूरल इकोनॉमिक्स और आईआरपीएम शामिल है। एमबीए 2019-21 सत्र में भी सीबीसीएस के तहत पढ़ाई होगी। इस बैठक में प्रतिकुलपति, रजिस्ट्रार, कई डीन तथा वरिष्ठ प्रोफेसर आदि उपस्थित थे।एमएड की फीस विश्वविद्यालय तय करेगा

एकेडमिक काउंसिल की बैठक में पहला एजेंडा एमएड कॉलेजों को मान्यता देने की थी। बैठक में सीटीई को दो सत्र 2019-21 और 2020-22 में 50-50 सीटों पर नामांकन और पढ़ाई के लिए मान्यता दे दी गई। वहीं एक निजी कॉलेज को भी एमएड सत्र 2019-21 की पढ़ाई के लिए औपबंधिक मान्यता दे दी गई। कोर्स की फीस विवि तय करेगा। एमएड पढ़ाई की क्वालिटी का नियंत्रक विवि के पास रहेगा। 

छात्रों को ये सुविधाएं भी मिलेंगी।बैठक में इक्वीवैलेंस कमेटी के निर्णयों का अनुमोदन किया गया। इसमें साइंस स्नातक स्नातक करने वाले छात्र सोशल साइंस हयूमनिटीज और कोर्स में नामांकन ले सकते हैं। सोशल साइंस वाले अपने विषय को छोड़ कर अन्य सोशल साइंस के विषयों और मानवीकि के विषयों में नामांकन ले सकेंगे। लेकिन प्रैक्टिकल वाले साइकोलॉजी और ज्योग्राफी विषय में नहीं। उसी प्रकार मानविकी से स्नातक करने वाले छात्र मानविकी के अन्य विषयों में एवं सेाशल साइंस के विषयों में नामांकन ले सकेंगे लेकिन ज्योगा्रफी और साइकोलोजी में नहीं। कॉमर्स से स्नातक करने वाले छात्र मानविकी और समाजशास्त्र के विषयों में नामांकन ले सकते हैं। लेकिन भूगोल और साइकोलोजी में नहीं। यह व्यवस्था इसलिए की गई है कि पीजी के कुछ विषयों में नामांकन की संख्या कम थी। इसलिए इस विभाग को जिंदा रखने के लिए ऐसा निर्णय लिया गया।

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