ओमबाबा हत्या मामले में अदालत ने आरोपितों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया 

 ओमबाबा हत्या मामले में अदालत ने आरोपितों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया 

भागलपुर:अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (सप्तम) बीके मिश्रा की अदालत ने ओम शर्मा उर्फ ओमबाबा हत्या मामले के सभी आठ आरोपितों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। पूर्व महापौर दीपक भूवानिया, पूर्व वार्ड पार्षद शंकर पोद्दार, पूर्व वार्ड पार्षद संतोष कुमार, व्यवसायी कन्हैया शर्मा, कन्हैया सरावगी, पवन डालुका, संजय कौशिक और संजीव कुमार उर्फ सिंह जी रिहा होने वालों में शामिल हैं।

न्यायालय यह फैसला दोनों पक्षों के वकीलों की दलील सुनने के बाद दिया।सरकार की ओर से लोक अभियोजक सत्यनारायण प्रसाद और बचाव की ओर से अधिवक्ता सुनील कुमार ने बहस में हिस्सा लिया। ओमबाबा देवीबाबू धर्मशाला के पीछे स्थित कमरे में रहते थे। 21 जून 2013 की रात कमरे में उनकी मौत हो गई थी। 22 जून को अंतिम संस्कार के लिए शव ले जाने की तैयारी चल रही थी।

सूचना मिलने पर कोतवाली थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर अमरनाथ तिवारी मौके पर पहुंचे और मामले की छानबीन की। शव का पोस्टमार्टम कराया। कोतवाली इंस्पेक्टर ने अपने बयान पर ओम बाबा की हत्या का का मामला दर्ज कराया। हत्या के पीछे जमीन विवाद बताया गया था। पुलिसिया अनुसंधान में नाम आने पर पूर्व मेयर दीपक भूवानिया, पूर्व वार्ड पार्षद शंकर पोद्दार, संतोष कुमार, पवन डालुका, कन्हैया शर्मा, कन्हैया सरावगी, संजय कौशिक और संजीव कुमार को अप्राथमिकी आरोपित बनाया गया था।

आठ आरोपितों में तीन के खिलाफ वर्ष 2015 में आरोप पत्र दाखिल किया गया था। पवन डालुका, संजीव कुमार और कन्हैया सरावगी के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया गया था। अन्य पांच आरोपितों के खिलाफ केस के अनुसंधानकर्ता ने साक्ष्य नहीं मिलने की बात कही थी।

बचाव की ओर से बहस में हिस्सा लेने वाले अधिवक्ता सुनील कुमार के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ओमबाबा के गले पर खरोंच का निशान पाया गया था। इसके बाद कोतवाली इंस्पेक्टर अमरनाथ तिवारी ने अपने बयान पर गला दबाकर ओमबाबा की हत्या करने का मामला दर्ज कराया था।

उन्होंने बताया कि इस मामले में 11 गवाहों की गवाही हुई थी। जिसमें अभियोजन की ओर केस के तीनों अनुसंधानकर्ता इंस्पेक्टर अमरनाथ तिवारी, दरोगा सुबोध पंडित और दरोगा एचएन कुंवर की गवाही कराई गई थी। एचएन कुंवर और सुबोध पंडित ने हत्या का साक्ष्य नहीं मिलने की बात कही थी, जबकि अन्य गवाह मुकर गए। वर्ष 2015 में आठ में से तीन आरोपितों पवन डालुका, संजीव कुमार उर्फ सिंह जी और कन्हैया सरावगी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया गया था। 08 अप्रैल 2019 को बहस पूरी हो चुकी थी।


 

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