भरत और केवट से त्याग एवं भक्ति की प्रेरणा लेनी चाहिए -अतुल कृष्ण भारद्वाज

भरत और केवट से त्याग एवं भक्ति की प्रेरणा लेनी चाहिए -अतुल कृष्ण भारद्वाज

              रिपोर्टर - बीडी कनौजिया 

शाहजहांपुर-

खिरनीबाग रामलीला मैदान में धर्म जागरण समन्वय के तत्वावधान में हो रही नौ दिवसीय विशाल श्री राम कथा के सातवें दिन राम कथा में कथा व्यास से पूज्य अतुल कृष्ण भारद्वाज जी ने श्रोताओं से कहा कि भरत व केवट से त्याग व भक्तों की प्रेरणा लेनी चाहिए।

क्योंकि राम और भरत ने संपत्ति का बंटवारा नहीं किया बल्कि विपत्ति का बंटवारा किया था। और केवट ने समर्पित भाव से भगवान राम के पैर धोए थे। साथ ही उन्होंने कहा कि दुनिया की कोई भी मां अपने बेटों को कष्ट नहीं देती है।

धर्म जागरण समन्वय के तत्वाधान में हो रही विशाल श्री राम कथा में हर रोज हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं कथा में व्यास जी ने वन गमन के समय श्रीराम की भेंट उनके प्रिय सखा निषाद राज गुरु से कराई। तत्पश्चात गंगा नदी पार करने के लिए भगवान केवट से मिले। भगवान को साक्षात सामने पाकर केवट ने अपनी व्यथा सुनाई।

उसे समाज द्वारा अछूत माना जाता है। उसने प्रभु से कहा कि जब तक आप मुझसे अपने चरण नहीं धुलवाएगे तब तक मैं आपको नदी पार नहीं करवाऊंगा। अंत में भगवान को विवश होकर केवट से चरण धुलवाने पड़े।

भगवान के चरण पकड़ने का अवसर केवट को प्राप्त हुआ जिससे उसके साथ-साथ उसके समस्त पीढ़ी तर गई। आप सभी यदि सच्चे मन से भगवान की भक्ति करेंगे तो भगवान के दर्शन अवश्य प्राप्त होंगे और आप भी तर जाएंगे। श्री भारद्वाज जी राम-भरत मिलन प्रसंग को सुनाते हुए कहा कि प्रभु राम भरत को रघुवंश का हंस कह रहे हैं। भरत प्रेम रूपी अमृत के सागर हैं भरत चित्रकूट से श्री रामजी की चरण पादुका लेकर आए।

चरण पादुका को ही सिंहासन पर रखकर भगवान के अयोध्या वापस आने के पूर्व ही राम राज्य स्थापना कर डाली। उन्होंने श्रोताओं से कहा कि जब हम अपने जीवन मात्र में अपने प्रति अन्य सबसे योगदान के बारे में कहेंगे और भगवान राम पर दृष्टिगत रहेगे तो अनुभव करेंगे कि अपने जीवन में हमारा योगदान शून्य है। हम सभी को अपनी योग्यता बढ़ानी होगी।

देश के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने गीता का सार अध्ययन करने के बाद अपनी योग्यता का विस्तार कर अपना पूरा जीवन राष्ट्र की उन्नति हेतु लगा दिया। स्वामी विवेकानंद जी ने अमेरिका में वेदांत का प्रचार कर अध्यात्म की दिशा में भारत को विश्व का सिरमौर बनाया। जो सच्चा ज्ञानी होता है वही समाज में ज्ञान का प्रकाश फैलाता है।

उन्होंने कहा कि कनिष्ठ भी अपने गुणों से श्रेष्ठ हो सकता है क्योंकि श्रेष्ठता सदैव गुणों पर ही निर्भर करता है। विषम परिस्थितियों में कष्टों को झेलने को देखने का प्रयास करना चाहिए। श्रेष्ठता प्राप्त करने का यह प्रथम सोपान है। भरत से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए कि त्याग व भक्ति ही सदैव श्रेष्ठ होती है।

इस दौरान आज की कथा में मुख्य यजमान त्रिलोकी नाथ पाण्डेय, नवनीत पाठक व यजमान रमेश चन्द्र सक्सेना, डॉ वीपी सिंह, मनीष कालरा, मजय अग्निहोत्री, सुधीर गुप्ता, सत्यदेव जी, महिमा शुक्ल, अमित भारद्वाज ने श्री रामायण जी की आरती उतारी।

कार्यक्रम में अनिल शर्मा वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री बतौर मुख्य अतिथि व अवधेश वर्मा पूर्व मंत्री, ईश्वर जी बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। इस दौरान कथा में आये मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथि का समिति के अध्यक्ष नवनीत पाठक ने राम दरबार भेंटकर उनका स्वागत किया।

इस दौरान अनिल बाजपेई, कुँवर पाल जी, दीप मिश्रा, प्रशांत बाजपेई, नरेंद्र मिश्रा, सुनील कुमार गुप्ता, वेदप्रकाश मौर्य, पुनीत मनीषी, ओंकार मनीषी, रामनिवास गौतम, रामबरन, आशीष मिश्रा, विश्वजीत, राकेश पांडेय, सुमन पाठक, उषा मिश्रा, सीमा बाजपेई आदि हजारों भक्तगण मौजूद रहे।

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